
दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी किया है। जानकारी के अनुसार, आतंकी लाल किले के पास धमाका कर सकते हैं और चांदनी चौक स्थित मंदिरों को भी निशाना बना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा ने सक्रिय हो कर आईईडी हमले की योजना बनाई है। यह कदम पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 6 फरवरी को हुए मस्जिद विस्फोट के बदले के रूप में देखा जा रहा है।
लश्कर-ए-तैयबा की साजिश
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का उद्देश्य भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देना है। वे कथित तौर पर 6 फरवरी को पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती विस्फोट का बदला लेना चाहते हैं, जिसमें 31 लोग मारे गए और 160 से अधिक घायल हुए थे। हालांकि, इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली थी। आईएस ने बयान जारी करते हुए कहा कि "मस्जिद के भीतर आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक जैकेट में धमाका कर दिया, जिससे बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए।"
लाल किले की पिछली घटनाओं का संदर्भ
यह अलर्ट उस समय जारी किया गया है, जब 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास कार विस्फोट में 12 लोग मारे गए और लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए थे। विस्फोटक से भरी कार लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास फली, जिससे आसपास की कई गाड़ियां आग की चपेट में आ गईं। डीएनए जांच में पता चला कि फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के डॉक्टर उमर मोहम्मद उर्फ़ उमर उन नबी ने उस कार को चलाया था।
सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियां
सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली के प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों पर सतर्कता बढ़ा चुकी हैं। लाल किले और चांदनी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में अतिरिक्त चेकिंग और मोबाइल पेट्रोलिंग की जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध वस्तुओं और गतिविधियों पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
खतरा गंभीर
विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर-ए-तैयबा की योजना बड़े पैमाने पर हानिकारक साबित हो सकती है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां 24 घंटे अलर्ट पर हैं और आतंकवाद विरोधी टीमों को सक्रिय किया गया है। यह कदम न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश में सुरक्षा की गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।













