
12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI171 की भीषण दुर्घटना ने देश को स्तब्ध कर दिया था। इस हादसे में 241 लोगों की जान चली गई, जिसमें यात्रियों के साथ-साथ ग्राउंड पर मौजूद लोग भी शामिल थे। अब जबकि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है, देश के नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने बयान दिया है कि “किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी”। उन्होंने साफ किया कि जांच की प्रक्रिया पारदर्शी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना ही उपयुक्त होगा।
मंत्री का बयान: “हमारे पायलट्स सर्वश्रेष्ठ हैं”
शनिवार को मीडिया से बातचीत में मंत्री नायडू ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें किसी नतीजे पर कूदना चाहिए। हमारे पास दुनिया के बेहतरीन पायलट्स और क्रू हैं और इस समय उनकी कड़ी मेहनत और प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह दुर्घटना अत्यंत दुखद है और हर पहलू की तकनीकी जांच हो रही है। इसलिए फिलहाल किसी दोष या लापरवाही पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या आया सामने?
AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई बंद हो गई थी। दोनों फ्यूल कटऑफ स्विच "RUN" से "CUTOFF" मोड में चले गए, जिससे विमान के दोनों इंजन बंद हो गए। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से यह पूछता है कि क्या उसने ईंधन बंद किया, और उत्तर मिलता है—“नहीं।” इससे यह स्पष्ट होता है कि कॉकपिट में भ्रम की स्थिति थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विमान अधिकतम 180 नॉट्स की स्पीड तक पहुंचा, लेकिन केवल 32 सेकंड तक ही हवा में रह पाया। ईंधन के नमूने जांच में संतोषजनक पाए गए और बर्ड स्ट्राइक की कोई पुष्टि नहीं हुई।
पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों की बात
मंत्री ने बताया कि यह जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और पहली बार ब्लैक बॉक्स का डेटा भारत में ही डिकोड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जा रहा है और पीड़ितों के परिजनों को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे पहले नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भी कहा था कि पायलटों की बातचीत संक्षिप्त थी और अभी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
यह दर्दनाक हादसा अहमदाबाद के मेघानीनगर क्षेत्र में हुआ था, जहां विमान BJ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स क्वार्टर्स पर गिरा। विमान में मौजूद 242 में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा। ज़मीन पर भी कॉलेज से जुड़े नौ छात्र और उनके परिजन हादसे का शिकार हुए। यह घटना भारत के नागर विमानन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक मानी जा रही है।














