
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को दो दशक से ज्यादा समय से फरार चल रही एक आरोपी को अमेरिका से भारत लाने में बड़ी सफलता मिली है। आयात-निर्यात घोटाले की मुख्य आरोपी मोनिका कपूर को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा रहा है।
सीबीआई ने मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी कि करीब 23 वर्षों से फरार मोनिका कपूर को अमेरिका से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित कर लिया गया है। यह मामला देश के उन प्रमुख आर्थिक अपराधों में से एक है, जिसमें सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया था। एजेंसी के मुताबिक, यह घोटाला 1998 में अंजाम दिया गया था, जब मोनिका कपूर ने अपने भाइयों राजन खन्ना और राजीव खन्ना के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये की ड्यूटी-फ्री सोने की खेप हासिल की थी।
फर्जी दस्तावेजों से हासिल किए लाइसेंस, भारी नुकसान हुआ
सीबीआई की जांच में सामने आया कि मोनिका कपूर, जो ‘मोनिका ओवरसीज’ नाम की फर्म की मालिक थी, ने अपने भाइयों के साथ मिलकर फर्जी शिपिंग बिल, चालान और बैंक सर्टिफिकेट तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से उन्होंने छह रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस हासिल किए, जिनसे उन्हें करीब 2.36 करोड़ रुपये के ड्यूटी-फ्री गोल्ड के आयात की अनुमति मिली। इन लाइसेंसों को बाद में प्रीमियम दर पर अहमदाबाद की एक फर्म ‘दीप एक्सपोर्ट्स’ को बेच दिया गया, जिसने इनका उपयोग कर सोने का आयात किया।
इस पूरे फर्जीवाड़े से वर्ष 1998 में सरकार को करीब 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में जांच पूरी कर सीबीआई ने 31 मार्च 2004 को मोनिका कपूर, राजन खन्ना और राजीव खन्ना के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
कोर्ट से भगोड़ा घोषित, इंटरपोल ने जारी किया रेड कॉर्नर नोटिस
जहां राजन और राजीव खन्ना को दिसंबर 2017 में दोषी ठहराया गया, वहीं मोनिका कपूर जांच और अदालती कार्यवाही से लगातार बचती रही। इस पर 13 फरवरी 2006 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया और 2010 में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।
19 अक्टूबर 2010 को अमेरिका से मोनिका के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद लगातार 14 साल तक सीबीआई और अमेरिकी एजेंसियों के बीच समन्वय बना रहा और आखिरकार, हाल ही में सीबीआई की एक टीम अमेरिका गई और उसे हिरासत में लिया।
अब भारत लाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा
सीबीआई ने कहा है कि मोनिका कपूर को अब भारत लाया जा रहा है और अदालत में पेश कर उसके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एजेंसी ने इस पूरे घटनाक्रम को आर्थिक अपराधों के खिलाफ अपनी कठोर नीति का हिस्सा बताया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीबीआई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परवाह किए बिना आर्थिक अपराधियों को न्याय के कटघरे तक लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मोनिका कपूर की गिरफ्तारी भारत के लिए एक बड़ी कानूनी और कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। यह मामला एक मिसाल पेश करता है कि चाहे आरोपी कितनी भी दूर क्यों न चला जाए, यदि मामला गंभीर हो तो भारतीय एजेंसियां उसे कानून के दायरे में लाकर रहेंगी। सीबीआई की इस कार्रवाई से आने वाले समय में ऐसे अन्य आर्थिक अपराधियों पर भी दबाव बनेगा, जो विदेश में जाकर छुपने की कोशिश करते हैं।














