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असम में NDA का फॉर्मूला फाइनल, बीजेपी, AGP और BPF के बीच सीटें तय

असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले NDA में सीटों का बंटवारा लगभग तय। बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें, AGP और BPF को भी मिला हिस्सा, जानें पूरा समीकरण।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 18 Mar 2026 3:40:18

असम में NDA का फॉर्मूला फाइनल, बीजेपी, AGP और BPF के बीच सीटें तय

असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसी बीच एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ी तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में उतर सकती है, जबकि उसके सहयोगी दलों के बीच बाकी सीटों का बंटवारा तय किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि बीजेपी करीब 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। वहीं उसके सहयोगी असम गण परिषद (AGP) को लगभग 26 सीटें मिल सकती हैं, जबकि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) करीब 11 सीटों पर चुनाव लड़ सकता है। इस तरह एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग अंतिम रूप ले चुका है। असम की सभी 126 सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित है, जिससे पहले सभी दल अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हुए हैं।

इसी कड़ी में एक अहम नाम प्रद्युत बोरदोलोई का भी सामने आ रहा है, जिन्हें दिसपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस पर आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं।

इससे पहले, 17 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने संकेत दिया था कि बीजेपी आगामी चुनाव में 89 सीटों पर ही फोकस करेगी, जबकि शेष सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही गठबंधन की पूरी रणनीति सामने आएगी। बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी इस बार भी गठबंधन के साथ समन्वय बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

अगर पिछले चुनावों पर नजर डालें, तो 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय एजीपी को 26 सीटें और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) को 8 सीटें दी गई थीं। उस चुनाव में एनडीए की जीत ऐतिहासिक मानी गई थी, क्योंकि पहली बार किसी गैर-कांग्रेस गठबंधन ने असम में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी।

असम की राजनीति में सीटों का बंटवारा हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता है, खासकर बोडोलैंड जैसे क्षेत्रों में जहां क्षेत्रीय दलों का प्रभाव काफी मजबूत है। ऐसे इलाकों में सही संतुलन बनाना गठबंधन के लिए बेहद जरूरी होता है, ताकि चुनावी परिणाम उनके पक्ष में जा सके।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि गठबंधन पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है और उनका लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन करना है। राज्य में अब चुनावी माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है और सभी प्रमुख दल उम्मीदवारों के चयन और गठबंधन समीकरणों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो एनडीए ने कुल 126 में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें बीजेपी ने अकेले 60 सीटें जीती थीं, जबकि एजीपी को 9 सीटें मिली थीं। इस बार भी गठबंधन इसी प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर करने की कोशिश में जुटा है।

कुल मिलाकर, असम में एनडीए का सीट शेयरिंग फॉर्मूला लगभग तय होने से चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि उम्मीदवारों की घोषणा और चुनावी रणनीति के अंतिम रूप के बाद यह गठबंधन मैदान में किस तरह प्रदर्शन करता है।

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