जोधपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यमुना जल परियोजना को लेकर राज्य सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि सरकार वास्तव में यमुना का पानी नीमकाथाना तक पहुंचाने में सफल हो जाती है, तो वह स्वयं मुख्यमंत्री आवास जाकर मुख्यमंत्री को माला पहनाकर उनका अभिनंदन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केवल बैठकों और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता को धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
बुधवार को जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्होंने पहले भी इस परियोजना का स्वागत किया था और आज भी अपने उसी रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों का वर्षों पुराना सपना यमुना का पानी राज्य तक पहुंचाने का रहा है। यदि वर्तमान सरकार इस सपने को साकार कर देती है, तो वह सबसे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के घर जाकर उन्हें सम्मानित करेंगे। गहलोत ने कहा कि दिल्ली और चंडीगढ़ में लगातार होने वाली बैठकों से जनता की प्यास नहीं बुझेगी, असली उपलब्धि तब होगी जब पानी वास्तव में राजस्थान की धरती तक पहुंचेगा।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा उनके हालिया बयान पर जताई गई आपत्ति को लेकर भी गहलोत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी विशेष विधायक या सांसद को घोड़ा, गधा या अन्य शब्दों से संबोधित नहीं किया था। उनका निशाना उन जनप्रतिनिधियों पर था जो जनता के विश्वास से चुने जाने के बाद राजनीतिक लाभ के लिए अपना पक्ष बदल लेते हैं। गहलोत ने कहा कि जब करोड़ों रुपये लेकर जनादेश का सौदा किया जाता है, तो यह लोकतंत्र और मतदाताओं दोनों के साथ विश्वासघात है। ऐसे लोगों की पूजा नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि मदन राठौड़ अपने वरिष्ठ नेताओं को खुश करने के लिए इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं।
राज्य मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओं पर भी गहलोत ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और यह पूरी तरह उनका निर्णय होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह चाहते हैं कि भजनलाल शर्मा ही मुख्यमंत्री बने रहें। गहलोत ने कहा कि पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि मुख्यमंत्री को बदला जा सकता है, लेकिन उनकी राय में भजनलाल शर्मा एक सरल और व्यवहारकुशल व्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लोगों से सम्मानपूर्वक बातचीत करते हैं और उनके व्यक्तित्व में सौम्यता दिखाई देती है। ऐसे व्यक्तियों पर मुख्यमंत्री का पद शोभा देता है। गहलोत ने मुस्कुराते हुए कहा कि भजनलाल शर्मा उन्हें “सूट” करते हैं और वह चाहते हैं कि वे अपने पद पर बने रहें। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
राज्य में विभिन्न संस्थाओं और बोर्डों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियों को लेकर भी गहलोत ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश में अपने वैचारिक एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहा है। गहलोत का आरोप था कि शिक्षा संस्थानों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संघ और भाजपा की विचारधारा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियुक्तियां की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना से अलग सोच रखने वाले लोगों को प्रमुख पदों पर बैठाना देश के लिए चिंता का विषय है। गहलोत के अनुसार, वर्तमान समय में सरकार और राज्यपाल दोनों ही भाजपा के प्रभाव क्षेत्र में हैं, इसलिए इस प्रकार की नियुक्तियां लगातार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इसे रोकने की सीमित संभावनाएं हैं, लेकिन इसका असर देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र और चिरंजीवी योजना को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर सवाल खड़े किए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने मौजूद लोगों से गांवों में चिरंजीवी योजना की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान शुरू की गई चिरंजीवी योजना देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक थी, जिसके तहत लोगों को 25 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाता था।
गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में यह योजना केवल कागजों तक सीमित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि अस्पतालों में इलाज के लिए उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। उनके अनुसार निजी अस्पतालों को सरकार की ओर से समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे मरीजों से राशि वसूलने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अस्पतालों की भी पूरी तरह गलती नहीं है, क्योंकि उन्हें भी अपने संचालन के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कई सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की कमी की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। गहलोत ने कहा कि यदि जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू नहीं होंगी, तो सबसे अधिक नुकसान गरीब और जरूरतमंद वर्ग को उठाना पड़ेगा।














