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राम मंदिर में चढ़ावे का विवाद गहराया, 3500 करोड़ की नकदी और आभूषणों का रिकॉर्ड नहीं, 2020 की रिपोर्ट आई चर्चा में

राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 3500 करोड़ रुपये से अधिक नकद दान और सोने-चांदी के रिकॉर्ड पर सवाल उठे हैं। 2020 की ऑडिट रिपोर्ट में प्रबंधन संबंधी कमियों की चेतावनी दी गई थी, जबकि एसआईटी जांच में भी कई अहम खामियां सामने आई हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 24 Jun 2026 12:23:03

राम मंदिर में चढ़ावे का विवाद गहराया, 3500 करोड़ की नकदी और आभूषणों का रिकॉर्ड नहीं, 2020 की रिपोर्ट आई चर्चा में

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा वर्षों से चढ़ाए जा रहे नकद दान और बहुमूल्य सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर उठे विवाद ने अब एक बड़े वित्तीय मामले का रूप ले लिया है। करोड़ों रुपये के चढ़ावे और कीमती धातुओं के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच एक पुरानी ऑडिट रिपोर्ट फिर चर्चा में आ गई है। सामने आया है कि ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद वर्ष 2020 में एक निजी ऑडिट एजेंसी ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी।

बताया जा रहा है कि उस समय ऑडिट एजेंसी ने दान प्रबंधन व्यवस्था में कई खामियां इंगित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा था कि चढ़ावे का रिकॉर्ड रखने के लिए कोई मजबूत और व्यवस्थित प्रणाली मौजूद नहीं है। साथ ही भविष्य में संभावित वित्तीय जोखिमों से बचने के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने की सलाह भी दी गई थी। हालांकि आरोप है कि इन सुझावों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते आज स्थिति विवादों के केंद्र में पहुंच गई है।

इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। इसके बाद से देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण और धार्मिक गतिविधियों के लिए उदारतापूर्वक दान दिया। अनुमान लगाया जा रहा है कि केवल नकद चढ़ावे के रूप में ही ट्रस्ट को अब तक लगभग 3500 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी भक्तों द्वारा अर्पित की गई हैं।

2020 की ऑडिट रिपोर्ट में क्या कहा गया था?

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2020 में ट्रस्ट से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुरोध पर एक प्रतिष्ठित निजी ऑडिट फर्म ने इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट को लेकर विस्तृत अध्ययन किया था। इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।

ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि प्रबंधन के विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट जवाबदेही और नियंत्रण व्यवस्था का अभाव है। डेटा प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पेशेवर दृष्टिकोण की कमी बताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वित्तीय लेनदेन और डेटा एंट्री की जांच के लिए द्वितीय या तृतीय स्तर की सत्यापन प्रणाली मौजूद नहीं थी, जिससे त्रुटियों और अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।

सोने-चांदी के रिकॉर्ड को लेकर भी जताई गई थी चिंता

रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया था कि मंदिर में आने वाले आभूषणों, सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का अलग और व्यवस्थित स्टॉक रजिस्टर तैयार किया जाना चाहिए। ऑडिट एजेंसी ने आगाह किया था कि ऐसा न होने पर भविष्य में रिकॉर्ड मिलान और संपत्ति सत्यापन में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।

इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, संवेदनशील डेटा की सुरक्षा, सर्वर प्रबंधन और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी के लिए पर्याप्त आंतरिक नियंत्रण मौजूद नहीं थे। इससे डेटा चोरी, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी संभावनाओं का जोखिम बढ़ सकता था।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आईं चार बड़ी कमियां

हाल ही में ट्रस्ट के एक पूर्व लेखा कर्मचारी द्वारा चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने और एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद होने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित इस टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में चार प्रमुख बिंदुओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

दान पेटियों से नकदी निकालने की प्रक्रिया पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि दान पेटियों से नकदी निकालने, उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और फिर उसकी गिनती करने की पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था दिखाई नहीं दी। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले चढ़ावे को देखते हुए अधिक मजबूत सुरक्षा और ऑडिट प्रणाली की आवश्यकता है।

विशेष रूप से महाकुंभ और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए इस प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित बनाए जाने की जरूरत बताई गई है।

आभूषणों का रिकॉर्ड अधूरा या अनुपलब्ध

एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि नियमित बैठकों में नकद दान का विवरण तो प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड कई मामलों में अधूरा या अनुपस्थित पाया गया।

इस वजह से जांच एजेंसियों को वास्तविक स्थिति का आकलन करने में अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं।

खरीद और टेंडर प्रक्रियाओं की भी जांच

रिपोर्ट में मंदिर परिसर की सुरक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े कुछ टेंडर तथा खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा के दौरान नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच दल अब इन प्रक्रियाओं से संबंधित दस्तावेजों और स्वीकृतियों की विस्तृत पड़ताल कर रहा है।

नियुक्तियों में रिश्तेदारी के आरोप

प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे मामलों की भी जानकारी मिली है, जहां प्रभावशाली व्यक्तियों के करीबी रिश्तेदारों को मंदिर प्रशासन या उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में अवसर दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि इन मामलों की विस्तृत जांच अभी जारी है।

सीसीटीवी बैकअप अवधि बनी जांच की चुनौती

एसआईटी के सामने सबसे बड़ी तकनीकी समस्या यह है कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जाता है। इससे पुराने घटनाक्रमों की जांच में कठिनाई आ रही है क्योंकि कई संभावित डिजिटल साक्ष्य अब उपलब्ध नहीं हैं।

जांच टीम ने सुझाव दिया है कि सीसीटीवी डेटा की स्टोरेज अवधि कम से कम 180 दिन की जाए। साथ ही दान से संबंधित रिकॉर्ड का दैनिक दस्तावेजीकरण और साप्ताहिक ऑडिट अनिवार्य बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।

जांच जारी, आगे हो सकती है कानूनी कार्रवाई

एसआईटी ने फिलहाल उन कर्मचारियों को दान गिनती और बैंकिंग संबंधी प्रक्रियाओं से अलग कर दिया है, जिनकी गतिविधियां जांच के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद टीम प्रमुख विजय विश्वास पंत ने कहा कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और अगले 10 से 15 दिनों में विस्तृत जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उधर, इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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