
भारतीय क्रिकेट में साल 2024 का अक्टूबर महीना कई बड़े सवाल छोड़ गया। ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए वनडे टीम की घोषणा होनी थी, लेकिन जैसे ही टीम शीट में शुभमन गिल के नाम के आगे ‘कप्तान’ लिखा दिखा, क्रिकेट प्रेमियों को बड़ा संकेत मिल गया। यह साफ हो गया कि रोहित शर्मा और विराट कोहली के युग पर अब विराम लगाया जा रहा है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि रोहित शर्मा से कप्तानी ऐसे वक्त छीनी गई, जब कुछ ही महीनों पहले उन्होंने अपनी अगुवाई में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी जिताई थी। इसी फैसले को लेकर अब भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने गौतम गंभीर पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिससे क्रिकेट गलियारों में बहस तेज हो गई है।
अगरकर के कंधे पर रखकर चली बंदूक?
इंडिया टुडे से बातचीत में मनोज तिवारी ने रोहित शर्मा को वनडे कप्तानी से हटाए जाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि इसके पीछे असली वजह क्या थी। अजीत अगरकर मजबूत व्यक्तित्व वाले इंसान हैं और मुश्किल फैसले लेने से नहीं घबराते। लेकिन यह भी सोचना जरूरी है कि क्या किसी और ने उन्हें अपने कंधे पर बंदूक रखकर फैसला लेने के लिए प्रभावित किया?”
तिवारी के इस बयान के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया कि क्या चयन समिति के फैसले के पीछे पर्दे के पीछे कोई और ताकत काम कर रही थी।
नाम लिए बिना गंभीर की ओर इशारा
मनोज तिवारी ने सीधे तौर पर गौतम गंभीर का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि भले ही चयन का ऐलान चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने किया हो, लेकिन टीम मैनेजमेंट और कोच की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
तिवारी के मुताबिक, “इतने बड़े फैसले कोई एक व्यक्ति अकेले नहीं लेता। चयनकर्ता और कोच—दोनों की इसमें बराबर जिम्मेदारी होती है।”
इस बयान के बाद माना जाने लगा कि तिवारी का इशारा टीम के कोच गौतम गंभीर की ओर था, जो उस समय भारतीय क्रिकेट के फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे थे।
रोहित शर्मा के साथ हुआ अन्याय?
पूर्व क्रिकेटर ने मौजूदा वनडे टीम की स्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्लेइंग इलेवन के चयन में लगातार गलतियां देखने को मिल रही हैं और इसी वजह से उनका वनडे क्रिकेट देखने का उत्साह भी कम होता जा रहा है।
मनोज तिवारी ने साफ शब्दों में कहा, “जब एक कप्तान जिसने टी20 वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जिताई हो, उसे अचानक हटाकर किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी दे दी जाए, तो यह फैसला अनावश्यक लगता है। मैंने रोहित शर्मा के साथ खेला है, उनके साथ मेरा जुड़ाव रहा है। जिस तरीके से यह बदलाव किया गया, वह मुझे बिल्कुल सही नहीं लगा। यह उस खिलाड़ी के प्रति अपमान जैसा है, जिसने भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है।”
तिवारी के इस बयान ने एक बार फिर रोहित शर्मा की कप्तानी छिनने के फैसले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला भविष्य की रणनीति का हिस्सा था या फिर जल्दबाजी में लिया गया एक विवादित कदम—जिसकी गूंज लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट में सुनाई देती रहेगी।












