
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की ‘दीवार’ माने जाने वाले पुजारा ने 103 टेस्ट मैचों में 7195 रन बनाए और कई ऐतिहासिक जीत में अपनी अहम भूमिका निभाई।
अपने करियर में उन्होंने ऐसे-ऐसे कीर्तिमान बनाए जो उन्हें विराट कोहली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों से भी आगे ले जाते हैं। आइए, नज़र डालते हैं पुजारा के उन 5 धाकड़ रिकॉर्ड्स पर जो उनके करियर को हमेशा यादगार बनाएंगे।
टेस्ट मैच के पांच दिन बल्लेबाजी
चेतेश्वर पुजारा पिछले 40 सालों में ऐसे इकलौते भारतीय बल्लेबाज बने, जिन्होंने एक ही टेस्ट मैच के सभी 5 दिन बल्लेबाजी की। उन्होंने यह कारनामा 2017 में श्रीलंका के खिलाफ किया था। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक केवल 13 बल्लेबाज ही यह उपलब्धि हासिल कर पाए हैं।
जीत में 50+ स्कोर — कोहली और लक्ष्मण से आगे
पुजारा टेस्ट मैच जीत में सबसे ज्यादा 50 प्लस स्कोर बनाने वाले भारतीय खिलाड़ियों में तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने 36 बार यह उपलब्धि हासिल की है। इस मामले में वह विराट कोहली और वीवीएस लक्ष्मण (30 बार) से आगे हैं। उनसे ऊपर सिर्फ सचिन तेंदुलकर (44) और राहुल द्रविड़ (38) हैं।
सबसे ज्यादा SENA टेस्ट जीत का हिस्सा
SENA देशों (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में भारतीय टेस्ट जीत की बात हो तो पुजारा सबसे आगे हैं। वह 11 बार भारत की SENA जीत का हिस्सा रहे। उनके बाद जसप्रीत बुमराह (10) का नंबर आता है।
एक पारी में सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का भारतीय रिकॉर्ड
पुजारा के नाम एक टेस्ट पारी में सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का भारतीय रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 525 गेंदों का सामना किया था। इस मामले में उन्होंने राहुल द्रविड़ (495 गेंद, पाकिस्तान 2004) को भी पीछे छोड़ दिया।
फर्स्ट क्लास में 18 दोहरे शतक
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पुजारा ने 18 डबल सेंचुरी लगाई हैं। वह इस मामले में भारत के टॉप बल्लेबाज हैं और ओवरऑल लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं। सबसे ज्यादा डबल सेंचुरी का वर्ल्ड रिकॉर्ड महान डॉन ब्रैडमैन (37) के नाम है।
चेतेश्वर पुजारा का करियर सिर्फ रन और आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी गिनती टेस्ट क्रिकेट की असली आत्मा को जीवित रखने वाले खिलाड़ियों में होती है। उनके ये रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह याद दिलाते रहेंगे कि क्रिकेट सिर्फ आक्रामकता का नहीं, बल्कि धैर्य, संयम और जज्बे का भी खेल है।














