
कोरोना ने पूरी दुनिया के हालात बद से बदतर कर दिए हैं। स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ ही आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा हैं। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के हालात तो इस कदर खराब हैं कि अनाज की किल्लत हो गई हैं और सिर्फ 21 दिन का ही गेहूं बचा हैं। पाकिस्तान में 2018 में इमरान खान के सत्ता में आने के बाद से महंगाई चरम पर है। जहां गेहूं आटे की कीमत दोगुनी हो चुकी है। वहीं चीनी, तेल, चिकन, अंडे और सब्जियों की कीमत आसमान छू रही है।
अचानक गेहूं की कमी को लेकर इमरान सरकार चिंतित है। सरकार विदेशों से गेहूं आयात करने पर विचार कर रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री शौकत तारिन के मुताबिक देश को 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं भंडार की तत्काल आवश्यकता है। नेशनल प्राइस मॉनिटरिंग कमेटी (NPMC) के मुताबिक, इस साल गेहूं का अनुमानित उत्पादन 2.6 करोड़ मीट्रिक टन है। अगले साल की कुल खपत की तुलना में 30 लाख टन कम है।
पाकिस्तान में नेशनल प्राइस मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में वित्त मंत्री शौकत तारिन भी शामिल हुए। कमेटी के एक अधिकारी ने बताया कि देश में अप्रैल अंत तक गेहूं का संकट पैदा हो जाएगा। गेहूं का भंडार पिछले सप्ताह 647,687 मीट्रिक टन बचा है। जो इस महीने के आखिरी हफ्ते में कम होकर 3,84,000 मीट्रिक टन रह जाएगा। बता दें कि













