
उत्तरप्रदेश के बरेली से लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया था जहां साल 2010 में ऑपरेशन के दौरान गर्भवती महिला के पेट में कॉटन का बंडल छोड़ दिया गया था जिसकी वजह से उनका तीन बार ऑपरेशन किया गया और महिला को अक्टूबर 2010 से जनवरी 2012 तक तक इस पीड़ा का सामना करना पड़ा था। इस मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डॉक्टर एम खान हॉस्पिटल और डॉ. यास्मीन खान पर 55 लाख 74 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग के आदेश के अनुसार, इस राशि पर 1 नवंबर 2010 से 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा।
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ के सदस्य राजेंद्र सिंह ने साबिहा हामिद के शिकायती वाद पर बुधवार को यह फैसला सुनाया। आयोग से मिले ब्यौरे के अनुसार, साबिहा हामिद गर्भवती थीं, जिसके लिए वह डॉ. एम. खान हॉस्पिटल गईं। वहां डॉ. यास्मीन खान ने सिजेरियन ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उन्हें लगातार दर्द की शिकायत बनी रही। साबिहा ने अस्पताल जाकर कई बार डॉ. यास्मीन खान को दिखाया, पर वह उसका कोई इलाज नहीं कर सकीं। फिर डॉ. यास्मीन ने उन्हें मुरादाबाद के डॉ. राजीव गुप्ता के पास भेजा, लेकिन वह भी उनके रोग का इलाज नहीं कर सके। साबिहा खान ने लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में आकर अपनी जांच कराई, तब मालूम हुआ कि सिजेरियन ऑपरेशन के समय उनके पेट में कॉटन का बंडल लापरवाही से छोड़ दिया गया था।














