महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों के साथ हुई एक अहम बैठक में ऐसा संदेश दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सूत्रों के मुताबिक, ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो वह स्वतंत्र है, उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की जाएगी। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि जो लोग अलग राह चुनना चाहते हैं, उनके लिए उनके मन में कोई कटुता नहीं है और वह केवल उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुए उस राजनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया, जब शिवसेना में बड़ी बगावत हुई थी और पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भी उन्हें पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी भी विधायक या नेता को संगठन में बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया। सूत्रों के अनुसार ठाकरे ने कहा, “चार वर्ष पहले पार्टी के भीतर बड़ी टूट हुई थी और लगभग 40 विधायक अलग हो गए थे। क्या किसी को लगता है कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी?”
उन्होंने आगे कहा कि जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और शिवसेना को छोड़ने का निर्णय लिया, उन्हें एक दिन अपने फैसले पर पछतावा जरूर होगा। हालांकि उस समय तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी। ठाकरे ने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि राजनीति में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। “संभव है कि आज परिस्थितियां मेरे पक्ष में न हों, लेकिन आने वाला समय जरूर बदलेगा। हमें तब तक संघर्ष करते रहना है और अपना आत्मविश्वास बनाए रखना है,” उन्होंने कहा।
संजय राउत ने खबरों को बताया भ्रामक
उधर, दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरी बैठक के दौरान मौजूद थे और उद्धव ठाकरे ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया कि जो सांसद पार्टी छोड़ना चाहें, वे जा सकते हैं।
राउत ने कहा, “यह खबर पूरी तरह गलत है। उद्धव ठाकरे कभी भी इस तरह की बात नहीं कह सकते। बैठक में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार की टूट या असंतोष की बातें केवल अफवाहें हैं। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के सभी नौ सांसद एकजुट होकर पार्टी नेतृत्व के साथ खड़े हैं।
उद्धव की कार्यशैली का किया बचाव
संजय राउत ने उद्धव ठाकरे की नेतृत्व क्षमता और कार्यशैली का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हैं जो कार्यकर्ताओं और आम लोगों से इतने व्यापक स्तर पर संवाद करते हों।
राउत ने कहा, “शरद पवार के बाद यदि कोई नेता सबसे अधिक लोगों से मिलता है तो वह उद्धव ठाकरे हैं। मातोश्री के दरवाजे हमेशा कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए खुले रहते हैं।” उन्होंने दोहराया कि सांसदों और विधायकों के बीच किसी तरह के मतभेद की बातें पूरी तरह निराधार हैं और पार्टी पूरी मजबूती के साथ एकजुट है।
राजनीतिक मुलाकातों को गलत नजरिए से न देखें
विभिन्न दलों के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातों पर उठ रहे सवालों को लेकर भी राउत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि का दूसरे दल के मंत्री या नेता से मिलना राजनीति का सामान्य हिस्सा है और इसे दल-बदल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यदि कोई सांसद या विधायक जनता के काम के लिए किसी मंत्री से मिलता है तो इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। अगर कल मुझे किसी सार्वजनिक मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलने की जरूरत पड़े, तो मैं उनसे भी मिलूंगा। प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं और मुख्यमंत्री पूरे राज्य के। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जनहित के कार्यों के लिए संवाद हमेशा जारी रहना चाहिए।”
ऑपरेशन टाइगर को लेकर शिंदे गुट का बढ़ा दावा
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना लगातार 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने दावा किया कि यह कोई अस्थायी राजनीतिक अभियान नहीं है, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के ऐसे कार्यकर्ता और नेता, जो अपने संगठन में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, वे शिंदे के नेतृत्व और शिवसेना की वर्तमान विचारधारा से प्रभावित होकर उनके साथ जुड़ रहे हैं। सरनाइक का कहना है कि आने वाले समय में इस प्रक्रिया की गति और तेज हो सकती है।
इसी बीच शिवसेना विधायक कृपाल तुमाने ने भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के अधिकांश सांसद और कई विधायक शिंदे गुट के संपर्क में हैं। उनके अनुसार उद्धव ठाकरे गुट के नौ सांसदों में से सात सांसद तथा करीब 16 विधायक विकास कार्यों और राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिंदे खेमे के साथ संवाद बनाए हुए हैं। हालांकि इन दावों पर शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर सत्ता और संगठन की लड़ाई को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाएं केवल राजनीतिक रणनीति साबित होती हैं या फिर राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।













