
कोरोना के इस दौर में कई मामले ऐसे देखने को मिले जहां अपनों ने ही साथ छोड़ दिया। लेकिन इसके उलट कई मामले ऐसे भी आए जहां इस कहर के बीच अपने ही ताकत बने हैं। इससे जुड़ा एक मामला सामने आया अजमेर में जहां 93 साल की बुजुर्ग महिला लक्ष्मी देवी कोरोना को मात देकर घर लौटी। लक्ष्मीदेवी ने कोरोना पर इस जीत का कारण अपने संयुक्त परिवार के साथ को बताया हैं। परिवार की सेवा और चिकित्सीय परामर्श की बदौलत कोरोना को हराना मुमकिन हो पाया।
अजमेर के रेंबल रोड पर रहने वाले पेशे से हाेटल-रेस्तरां काराेबारी अनिल तेजवानी बताते हैं कि उनकी दादी लक्ष्मी देवी के 18 मई काेराेना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। शुरुआती छह दिनों में वे ठीक रहीं लेकिन सातवें दिन अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें क्षेत्रपाल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां डाॅक्टर प्रतीक काेठारी और फैमिली डाॅक्टर कुणाल काेहली के मार्गदर्शन में इलाज शुरू किया गया। अब मेरी दादी ठीक होकर घर लौट चुकी हैं।
तेजवानी ने बताया कि उनके पिता के पांच भाई हैं। चाचा महेश तेजवानी अमेरिका में परफ्यूम का काराेबार करते हैं। उन्हें जैसे ही पता चला कि मां काेराेना पॉजिटिव हैं, वे तुरंत अमेरिकी सरकार से विशेष अनुमति लेकर फ्लाइट से भारत पहुंचे। चाचा महेश सहित बाकी सभी भाई मां की सेवा में जुटे रहे। घर की बहुएं और पाेते-पाेतियाें ने पूरी सावधानी बरतते हुए सेवा की, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने है। दादी की विल पाॅवर बहुत अच्छी है, इतनी उम्र में भी वे हमेशा सकारात्मक साेच रखती है। संयुक्त परिवार हमारी ताकत है, दादी काे पाेते-पाेतियाें से बहुत लगाव है और यही लगाव उनके स्वस्थ्य हाेने में रामबाण साबित हुआ है।














