मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव के बावजूद भारत के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से भारतीय जरूरतों का सामान लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही फिलहाल बिना किसी बड़ी बाधा के जारी है। पिछले 72 घंटों के दौरान कुल 9 मालवाहक जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। इनमें से 7 जहाज भारत के लिए आवश्यक वस्तुएं लेकर आ रहे हैं। इसके साथ ही शनिवार तक इस मार्ग से सुरक्षित गुजरने वाले भारत से जुड़े जहाजों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है। हाल के तीन दिनों में इस रास्ते से निकले 9 जहाजों में 4 भारतीय ध्वज वाले और 5 विदेशी ध्वज वाले पोत शामिल हैं।
हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। भारत की ओर आने वाले 15 अन्य जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और सुरक्षित समुद्री रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इन जहाजों में 10 भारतीय ध्वज वाले बड़े मालवाहक पोत शामिल हैं। इनमें चार जहाज उर्वरक लेकर भारत आ रहे हैं, जबकि एक जहाज कच्चे तेल और गैस की खेप लेकर खाड़ी क्षेत्र में खड़ा है। सुरक्षा एजेंसियां इन सभी जहाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
तनावपूर्ण हालात में भी जारी रही जहाजों की आवाजाही
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद शनिवार को भारतीय ध्वज वाला बल्क कैरियर एपीजे प्रीति 2 (APJ Priti 2) लगभग 65 हजार टन उर्वरक लेकर सुरक्षित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने में सफल रहा। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भी दो बड़े जहाज इसी समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकले थे। इनमें देश सुरक्षा नामक जहाज एक लाख टन से अधिक कच्चा तेल लेकर आगे बढ़ा, जबकि प्रभु पार्वती लगभग 18,732 टन जरूरी सामान के साथ इस जलमार्ग को पार कर भारत की ओर रवाना हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही भारत के लिए राहत की बात है, क्योंकि देश की ऊर्जा, कृषि और औद्योगिक जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए पहुंचता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित होता, तो कच्चे तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी।
समझौते के बाद तेज हुई जहाजों की आवाजाही
हालांकि गुरुवार को हुए ड्रोन हमले, उसके बाद शुक्रवार को अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए हवाई हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के चलते पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है, लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जून के दौरान कूटनीतिक प्रयासों का सकारात्मक असर भी देखने को मिला है।
आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 17 जून के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण केवल 19 जहाज ही इस समुद्री मार्ग से गुजर पाए थे। लेकिन 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद हालात में कुछ सुधार देखने को मिला। इसके बाद पिछले 10 दिनों में अकेले 25 भारतीय हितों से जुड़े जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और कूटनीतिक प्रयासों का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है।
भारत के लिए कौन-कौन से जहाज लेकर आ रहे हैं जरूरी सामान?
समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली एजेंसियों और Ship Trackers के मुताबिक, 1 मार्च से अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने वाले भारत से जुड़े जहाजों में सबसे अधिक संख्या बल्क कैरियर की रही है। इस अवधि में 15 बल्क कैरियर, 13 एलपीजी कैरियर, 11 क्रूड ऑयल टैंकर और दो एलएनजी जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर भारत की ओर बढ़े हैं।
भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय लगातार फारस की खाड़ी में मौजूद जहाजों के कप्तानों, शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई किसी भी परिस्थिति में प्रभावित न हो तथा सभी जहाज सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही इसी तरह सामान्य बनी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है, जिसका असर भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।













