देश की राजनीतिक और वैचारिक बहसों के बीच एक अनोखा घटनाक्रम सामने आया है, जहां सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने एक नई राजनीतिक पहल की घोषणा की है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के चर्चाओं में आने के कुछ समय बाद ही उन्होंने ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) नामक एक नए विचार-आधारित संगठन की शुरुआत का ऐलान किया है। जस्टिस काटजू का कहना है कि यह पहल देश की गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए एक वैचारिक प्रयास है। इसी दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को भी इस नई पहल से जुड़ने का प्रस्ताव दिया है, जिसने इस घोषणा को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
CJP पर तीखी टिप्पणी और वैचारिक बहस
अपने फेसबुक पोस्ट और सोशल मीडिया बयानों में जस्टिस काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने पार्टी की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए तीखा रुख अपनाया और संगठन के उद्देश्यों को लेकर असहमति जताई। गौरतलब है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है।
इसी संदर्भ में काटजू ने यह भी कहा कि केवल मंत्री का इस्तीफा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि सत्ता संरचना में बदलाव से वास्तविक सुधार नहीं आता।
‘इश्क’ को बताया सामाजिक एकता का माध्यम
एक अन्य पोस्ट में जस्टिस काटजू ने स्पष्ट किया कि ‘इश्क करो पार्टी’ को हल्के या मनोरंजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग इसे शायद रोमांस या वैलेंटाइन डे जैसी अवधारणा से जोड़कर देखें, लेकिन इसका उद्देश्य इससे कहीं अधिक गंभीर और सामाजिक है। उनके अनुसार भारत की गरीबी, कुपोषण, बेरोजगारी और अन्य जटिल समस्याओं का समाधान केवल सामाजिक एकता और आपसी समझ से ही संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में विभाजनकारी सोच को खत्म करने के लिए लोगों के बीच प्रेम और एकजुटता की भावना को बढ़ावा देना जरूरी है।
Aims and objectives of Ishq Karo Party
— Markandey Katju (@mkatju) June 8, 2026
By Justice Katju, patron of IKP
Some people may think that the formation of the newly created IKP is a joke, a kind of Valentine`s Day for promoting romance between boys and girls. But that is a total misconception.
In fact it is a very…
‘सभी के प्रति इश्क’ का विचार
जस्टिस काटजू ने अपने विचार को विस्तार देते हुए कहा कि समाज में जाति, धर्म, नस्ल और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर हर व्यक्ति के प्रति प्रेम और स्वीकार्यता की भावना होनी चाहिए। उनके अनुसार यही ‘इश्क’ एक मजबूत और संगठित समाज की नींव रख सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग इस सोच को अपनाते हैं, तो आधुनिक और जागरूक नेतृत्व के माध्यम से एक मजबूत जन आंदोलन खड़ा किया जा सकता है, जो समाज के कमजोर वर्गों को बेहतर स्थिति में ला सके।
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अक्सर नेता सत्ता और पद के लालच में जनता की वास्तविक समस्याओं से दूर हो जाते हैं। इसी प्रवृत्ति के खिलाफ ‘इश्क करो पार्टी’ एक वैचारिक आंदोलन के रूप में काम करेगी।
CJP और जंतर-मंतर प्रदर्शन पर टिप्पणी
6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद जस्टिस काटजू ने एक बार फिर इस संगठन और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से किसी भी बड़े बदलाव की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
उनका यह भी कहना था कि किसी एक मंत्री के हटने से व्यवस्था में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आता, क्योंकि उसकी जगह दूसरा व्यक्ति आ जाता है और समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। इस तरह उन्होंने आंदोलन की दिशा और उसके उद्देश्यों को लेकर भी सवाल उठाए थे।














