कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना किए जाने के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। थरूर के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की तीखी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी भी खुलकर इस बहस में उतर आई है। बीजेपी ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी को लेकर पार्टी की राजनीति इतनी विरोधात्मक हो चुकी है कि वह अपनी ही पार्टी के नेताओं की सकारात्मक टिप्पणियों को भी स्वीकार नहीं कर पा रही है।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। बीजेपी का कहना है कि जब कोई विपक्षी नेता राष्ट्रीय हित से जुड़े किसी विषय पर प्रधानमंत्री की भूमिका की सराहना करता है, तो कांग्रेस नेतृत्व उसे सहजता से लेने के बजाय असहज हो जाता है। पार्टी का आरोप है कि यही कारण है कि शशि थरूर के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी देखने को मिली।
बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस की मानसिकता पर उठाए सवाल
कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी. आर. केसवन ने प्रेस के सामने आकर राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी की राजनीतिक सोच में गहरी असुरक्षा और विरोध की भावना दिखाई देती है।
केसवन ने दावा किया कि शशि थरूर ने केवल एक ऐसे मुद्दे पर प्रधानमंत्री की प्रशंसा की थी जो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं की ओर से जिस तरह की प्रतिक्रिया आई, वह यह दर्शाती है कि पार्टी किसी भी सकारात्मक टिप्पणी को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता राष्ट्रीय हित में उठाए गए कदमों की सराहना करता है, तो उसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। लेकिन कांग्रेस ने इस पूरे मामले को अनावश्यक विवाद का रूप दे दिया।
Chennai, Tamil Nadu: BJP National Spokesperson C.R. Kesavan says, "The deep-rooted hate and insecurity of Rahul Gandhi and the Congress party against Prime Minister Narendra Modi is the real reason for the Congress party`s outburst against Mr. Shashi Tharoor for praising and… pic.twitter.com/YnXvFUe8QN
— IANS (@ians_india) June 21, 2026
'राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस बदल चुकी है'
बीजेपी प्रवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली पहले की तुलना में अधिक कटु और पूर्वाग्रहपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब लोकतांत्रिक संवाद और राजनीतिक शिष्टाचार जैसे मूल्यों से दूर होती नजर आ रही है।
केसवन के मुताबिक कांग्रेस आज उस स्थिति में पहुंच चुकी है जहां वह विपक्ष के दायित्वों और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन नहीं बना पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का पूरा ध्यान केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रह गया है, जबकि राष्ट्रीय मुद्दों पर रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीति लंबे समय से एक विशेष परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है और इसी वजह से राष्ट्रीय हितों से जुड़े कई मुद्दों पर पार्टी का रुख अक्सर सवालों के घेरे में आ जाता है। उन्होंने दावा किया कि यही कारण है कि पार्टी अपने ही नेताओं की स्वतंत्र राय को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाती।
आखिर शशि थरूर ने ऐसा क्या कहा था?
दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत शशि थरूर के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भूमिका की सराहना की थी। थरूर ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान भारत की चिंताओं और दृष्टिकोण को पूरी स्पष्टता और मजबूती से सामने रखा।
थरूर के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंचों के साथ-साथ निजी बैठकों में भी यह मुद्दा उठाया कि युद्ध या संघर्ष की स्थिति में व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत नागरिक नाविकों को सैनिकों की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। इसलिए उन्हें किसी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिक नाविकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अमेरिकी नेतृत्व के सामने स्पष्ट शब्दों में रखा। थरूर का मानना था कि यह भारत की ओर से अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम था।
इसी बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई, जो अब पार्टी नेतृत्व, राजनीतिक विचारधारा और राष्ट्रीय हित जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।













