
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि 15 अगस्त केवल स्वतंत्रता का उत्सव नहीं है, बल्कि हर भारतीय की गौरवगाथा का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। आज़ादी के बाद भारत ने लोकतंत्र की राह चुनते हुए चुनौतियों का सामना किया और हर वयस्क नागरिक को मताधिकार प्रदान किया। राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान की सराहना की, जिनके प्रयासों से 78 साल पहले भारत को आज़ादी मिली। राष्ट्रपति ने हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ मानवता की लड़ाई का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान पहलगाम हमले के बाद भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया थी, जिसने साबित किया कि हमारी सशस्त्र सेनाएं किसी भी स्थिति का सामना करने को पूरी तरह तैयार हैं।
पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या अमानवीय
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “इस वर्ष हमें आतंकवाद की चुनौती का सामना करना पड़ा। कश्मीर में छुट्टियों के दौरान निर्दोष नागरिकों की हत्या पूरी तरह अमानवीय और घातक थी। ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि हमारे सशस्त्र बल किसी भी परिस्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। रणनीतिक स्पष्टता और तकनीकी दक्षता के साथ, उन्होंने सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को निष्प्रभावी किया। यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ मानवता की लड़ाई में एक मिसाल के रूप में इतिहास में दर्ज होगा।” राष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान में भारत की एकता सबसे महत्वपूर्ण तत्व थी। देश की एकता ने उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश दिया जो भारत को विभाजित करना चाहते थे। संसद के विभिन्न दलों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की गई।
ऑपरेशन सिंदूर: आत्मनिर्भर भारत के लिए परीक्षण
राष्ट्रपति ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आत्मनिर्भर भारत मिशन के रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परीक्षण भी था। इससे यह साबित हुआ कि भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में आत्मनिर्भर होता जा रहा है। स्वदेशी उत्पादन क्षमता ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। ये उपलब्धियां स्वतंत्रता के बाद से भारत के रक्षा इतिहास में मील का पत्थर हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों को याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने लोकतंत्र का मार्ग अपनाया, जिसमें हर नागरिक को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अधिकार मिला। चुनौतियों के बावजूद, भारतवासियों ने लोकतंत्र को मजबूती से अपनाया।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त देश की सामूहिक स्मृति में दर्ज एक ऐतिहासिक तारीख है। लंबे उपनिवेशी शासन के दौरान पीढ़ियों ने इस दिन की कल्पना की थी। देश के हर कोने में युवा, बुजुर्ग, स्त्री और पुरुष सभी स्वतंत्रता की चाह रखते थे। उनका संघर्ष अटूट आशावाद और साहस से भरा था, जिसने स्वतंत्रता के बाद भी देश के विकास को आगे बढ़ाया।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम कल तिरंगे को सलामी देंगे, तो उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देंगे, जिनके बलिदान से 78 साल पहले 15 अगस्त को भारत को आज़ादी मिली।














