नई दिल्ली: देश की संसदीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने की संभावनाएं जताई जा रही हैं, जहां NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 300 से अधिक सीटों के आंकड़े तक पहुंचने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसका प्रमुख कारण तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बढ़ती अंदरूनी टूट को माना जा रहा है। ममता बनर्जी की पार्टी इस समय लोकसभा और राज्यसभा दोनों में असंतोष और अस्थिरता का सामना कर रही है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने की घटनाओं ने भी राजनीतिक संतुलन को प्रभावित किया था। अब टीएमसी के भीतर चल रही हलचल ने इस समीकरण को और जटिल बना दिया है।
लोकसभा में NDA की संभावित बढ़त
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में NDA के पास लगभग 293 सांसदों का समर्थन मौजूद है। यदि तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 बागी सांसद वास्तव में सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में जाते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है। 543 सदस्यीय लोकसभा में यह एक मजबूत बहुमत की स्थिति को और सुदृढ़ कर देगा। बताया जा रहा है कि टीएमसी के लगभग 19 सांसदों की सूची पहले ही सामने आ चुकी है, जिनके रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राज्यसभा में भी बदलते समीकरण
राज्यसभा में भी राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। राघव चड्ढा सहित AAP के सात सांसदों के समर्थन के बाद भाजपा के सदस्यों की संख्या 113 तक पहुंच गई थी, जबकि पूरी NDA गठबंधन की ताकत बढ़कर 148 के करीब हो गई थी। हाल ही में हुए निर्विरोध चुनावों के बाद 19 नए सांसदों के शामिल होने से यह आंकड़ा लगभग 167 तक पहुंच गया है।
इसी बीच पिछले चार दिनों में TMC के चार राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये नेता NDA में शामिल होंगे या किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की ओर बढ़ेंगे। इन इस्तीफों के बाद टीएमसी की राज्यसभा संख्या घटकर 13 से 9 रह गई है, जिनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, प्रकाश बरेक और कोयल मलिक जैसे नाम चर्चा में हैं।
संसदीय शक्ति संतुलन पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह राजनीतिक बदलाव इसी तरह आगे बढ़ता है, तो संसद में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। पहले परिसीमन संबंधी एक महत्वपूर्ण विधेयक के दौरान NDA को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था, जिससे उसे राजनीतिक झटका लगा था। अब संभावित बदलावों से गठबंधन की स्थिति मजबूत हो सकती है।
फिलहाल लोकसभा में पूर्ण दो-तिहाई बहुमत के लिए NDA को लगभग 360 सीटों की आवश्यकता है। तीन सीटें—बशीरहाट, शिलॉन्ग और नौगांव—अभी खाली हैं, लेकिन इसके बावजूद यह लक्ष्य अभी दूर माना जा रहा है। हालांकि, TMC के भीतर जारी असंतोष इस दिशा में समीकरण बदल सकता है और आने वाले समय में और सांसदों के इस्तीफे की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
2024 चुनाव के बाद का परिदृश्य
2024 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 240 सीटें हासिल की थीं। इसके बाद तेलुगु देशम पार्टी के 16, जनता दल (यू) के 12, शिवसेना के एक गुट, लोक जनशक्ति पार्टी के 5, जनता दल सेक्युलर के 2 समेत कई सहयोगी दलों के समर्थन से NDA की सरकार बनी, और कुल आंकड़ा 292 तक पहुंच गया था।
इसके बाद केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार ने सत्ता संभाली, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदलती रही हैं।
DMK और कांग्रेस के बीच बढ़ता तनाव
दक्षिण भारत की राजनीति में भी हलचल जारी है, जहां तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) और कांग्रेस के बीच तनाव खुलकर सामने आ रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने डीएमके नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया था, लेकिन उसके बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी और मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी भी डीएमके के कुछ नेताओं से संपर्क में है और राजनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले मॉनसून सत्र के दौरान संसद और देश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।














