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Gold Price: क्या 2027 तक ₹1 लाख से नीचे आएगा सोना? रूस के संभावित फैसले से ग्लोबल मार्केट में बढ़ी हलचल, COMEX पर $3000 का स्तर चर्चा में

क्या 2027 तक सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे आ सकता है? रूस की संभावित डॉलर वापसी, BRICS रणनीति और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच COMEX पर गोल्ड $3000 प्रति औंस तक फिसलने की चर्चा तेज। जानें निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 16 Feb 2026 9:43:59

Gold Price: क्या 2027 तक ₹1 लाख से नीचे आएगा सोना? रूस के संभावित फैसले से ग्लोबल मार्केट में बढ़ी हलचल, COMEX पर $3000 का स्तर चर्चा में

सोने की कीमतों को लेकर एक बार फिर बाजार में तीखी बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में गोल्ड की चमक फीकी पड़ सकती है? खासतौर पर रूस से जुड़ी एक अहम खबर ने अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और अमेरिकी डॉलर दोबारा मजबूती से उभरा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $3000 प्रति औंस तक फिसल सकता है। ऐसे परिदृश्य में भारत में भी कीमतें ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे आ सकती हैं।

रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसला सोना

साल 2025 सोने के निवेशकों के लिए बेहद शानदार रहा। जबरदस्त रिटर्न के बाद जनवरी 2026 में कीमतों ने नया शिखर छुआ। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि हालिया कारोबारी सत्रों में तेज मुनाफावसूली देखने को मिली और पिछले सप्ताह सोना ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यह अपने उच्चतम स्तर से लगभग 13.5% की गिरावट दर्शाता है।

वैश्विक स्तर पर भी कमजोरी साफ नजर आई। न्यूयॉर्क के COMEX पर सोना $5,626.80 प्रति औंस के ऐतिहासिक शिखर से लुढ़ककर $5,046.30 प्रति औंस पर आ गया, यानी करीब 10.5% की गिरावट। यह संकेत देता है कि बाजार में फिलहाल अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल है।

रूस की संभावित डॉलर वापसी से बढ़ी चिंता

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस अमेरिकी डॉलर में ट्रेड सेटलमेंट दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि क्रेमलिन अमेरिका के साथ सीमित आर्थिक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो यह वैश्विक वित्तीय समीकरणों को बदल सकता है।

दरअसल, BRICS समूह—जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं—पिछले कुछ वर्षों से डी-डॉलराइजेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा था। इन देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने की रणनीति अपनाई थी। रूस की डॉलर में संभावित वापसी इस मुहिम को कमजोर कर सकती है, जिसका सीधा असर गोल्ड की मांग पर पड़ेगा।

सेंट्रल बैंकों की खरीद ने दी थी मजबूती


बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में सोने की तेज रैली के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद रही है। खासकर BRICS देशों के सेंट्रल बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदा, जिससे मांग बढ़ी और सप्लाई सीमित रही। 2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्वर्ण खरीद में इन देशों की हिस्सेदारी 50% से अधिक रही।

लेकिन यदि रूस डॉलर-आधारित लेनदेन की ओर लौटता है, तो यह ट्रेंड पलट सकता है। केंद्रीय बैंक अपनी आक्रामक खरीदारी रोक सकते हैं या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली भी कर सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आ सकती है, जो कीमतों पर दबाव बनाएगी।

क्या $3000 प्रति औंस तक आएगा भाव?

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट केवल अस्थायी उछाल (डेड कैट बाउंस) के बाद और गहरी हो सकती है। यदि अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है और फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को टालता है, तो सोने की मांग घट सकती है। मजबूत डॉलर आमतौर पर गोल्ड की कीमतों को नीचे धकेलता है, क्योंकि यह अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2027 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $3000 प्रति औंस के स्तर तक आ सकता है। ऐसे में भारत में कीमतें ₹90,000 से ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में स्थिर हो सकती हैं। हालांकि यह परिदृश्य पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक हालात, महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनाव पर निर्भर करेगा।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?

पारंपरिक रूप से अनिश्चितता के दौर में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इतिहास बताता है कि हर संकट में केवल गोल्ड ही बेहतर प्रदर्शन नहीं करता। 2008 की वित्तीय मंदी के दौरान लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड ने भी मजबूत रिटर्न दिया था।

ऐसे में निवेशकों को केवल एक एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। मौजूदा उतार-चढ़ाव संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतें नई दिशा ले सकती हैं—या तो फिर से नई ऊंचाई या फिर उल्लेखनीय गिरावट।

फिलहाल बाजार की नजर रूस के अगले कदम, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की रणनीति पर टिकी है। यही कारक तय करेंगे कि सोना ₹1 लाख के नीचे फिसलेगा या फिर दोबारा चमक बिखेरेगा।

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