देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की सरकारी पहल के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने नई बहस को जन्म दे दिया है। दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले एक वाहन की फ्यूल टैंक के आसपास बड़ी संख्या में चींटियां जमा हो गईं। इसके बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या पेट्रोल में मिलाया जा रहा इथेनॉल वास्तव में चींटियों को आकर्षित कर रहा है? साथ ही कई लोग यह जानना चाह रहे हैं कि E20 ईंधन में वास्तव में क्या होता है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण क्या हो सकते हैं।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई जिज्ञासा
सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे एक वीडियो को सिक्किम का बताया जा रहा है। करीब 56 सेकंड के इस वीडियो में एक व्यक्ति ने वाहन के पेट्रोल कैप के आसपास कैमरा फोकस किया है। फुटेज में दिखाई देता है कि फ्यूल टैंक के ढक्कन के पास बड़ी संख्या में चींटियां घूम रही हैं।
वीडियो में सवाल उठाया गया है कि क्या प्रकृति खुद संकेत दे रही है कि आजकल पेट्रोल में गन्ने से बने इथेनॉल की मात्रा कितनी बढ़ गई है। इसी दावे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी और लोग E20 पेट्रोल तथा इथेनॉल मिश्रण के प्रभावों पर चर्चा करने लगे।
क्या इथेनॉल की वजह से आकर्षित होती हैं चींटियां?
विशेषज्ञों के अनुसार इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब देना आसान नहीं है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि इथेनॉल में एक विशिष्ट प्रकार की गंध होती है, जो कुछ परिस्थितियों में कीड़ों और चींटियों को आकर्षित कर सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि फ्यूल कैप के आसपास इथेनॉल की थोड़ी मात्रा वाष्पित हो रही हो, तो उसकी गंध किसी मीठे पदार्थ या फलों जैसी महसूस हो सकती है। चींटियां भोजन की तलाश में ऐसी गंध की ओर आकर्षित हो सकती हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल सीधे तौर पर चींटियों को भोजन उपलब्ध करा रहा है। इस विषय पर अभी तक कोई व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन सामने नहीं आया है जो वायरल वीडियो के दावे की पुष्टि करता हो।
Is this nature telling you how much sugarcane juice is in your petrol nowadays?
— Kapil (@kapsology) June 14, 2026
(Video from Sikkim) pic.twitter.com/JR9HQPDFur
क्या E22 या E30 ईंधन पर चल सकती हैं मौजूदा गाड़ियां?
इथेनॉल मिश्रण को लेकर लोगों के मन में एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा वाहन अधिक इथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकते हैं। फिलहाल देश में अधिकांश वाहनों के लिए E22 या E30 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधन का व्यापक उपयोग संभव नहीं माना जाता।
सरकार ने अभी तक इन मिश्रणों को सामान्य खुदरा बिक्री के लिए व्यापक स्तर पर लागू करने की कोई घोषणा नहीं की है। किसी वाहन की ईंधन अनुकूलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कब बनाया और बेचा गया था।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि 1 अप्रैल 2023 से पहले बेचे गए अधिकांश वाहन E10 ईंधन के अनुरूप तैयार किए गए थे। वहीं, 1 अप्रैल 2023 के बाद निर्मित और बेचे गए वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं।
वाहनों पर लगेंगे विशेष स्टिकर
उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने के लिए वाहन निर्माताओं को प्रत्येक मॉडल पर स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। इसके तहत वाहन पर एक स्टिकर लगाया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि संबंधित मॉडल अधिकतम कितने प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग कर सकता है।
यह स्टिकर आमतौर पर फ्यूल टैंक के ढक्कन के पास या उसके अंदर लगाया जाता है ताकि वाहन मालिक आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। इसका उद्देश्य गलत ईंधन इस्तेमाल से होने वाली तकनीकी समस्याओं को रोकना है।
देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार हुई लॉन्च
इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम भी उठाया गया है। 4 जून को मारुति सुज़ुकी इंडिया ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार पेश की। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन 20 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकते हैं।
कंपनी के अनुसार यह वाहन E20 से लेकर E100 तक विभिन्न अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण का उपयोग करने में सक्षम है। इस तकनीक को लोकप्रिय हैचबैक वैगन आर में शामिल किया गया है। यह वही मॉडल है जो पहले से ही सीएनजी और एलपीजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों के विकल्पों के साथ भारतीय बाजार में उपलब्ध है।
100 प्रतिशत इथेनॉल के इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम
इसी बीच केंद्र सरकार ने शुद्ध इथेनॉल के उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 100 प्रतिशत इथेनॉल को ईंधन के रूप में वैध बनाने की नियामक प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है।
उन्होंने कहा कि संबंधित नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब देश में शुद्ध इथेनॉल आधारित ईंधन को कानूनी मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा चुका है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
समय से पहले हासिल हुआ इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य
केंद्र सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत ने निर्धारित समय से पहले ही अपने इथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को हासिल कर लिया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर केवल 1.5 प्रतिशत था, जो नवंबर 2022 तक बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंच गया। सरकार ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य मूल रूप से वर्ष 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह उपलब्धि निर्धारित समय से काफी पहले 2024 में ही हासिल कर ली गई।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर बहस जारी है और लोग E20 पेट्रोल के प्रभावों पर अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद यह घटना इथेनॉल आधारित ईंधन को लेकर लोगों की जिज्ञासा और जागरूकता को जरूर बढ़ा रही है।













