देश में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद अब केंद्र सरकार ने दिल्ली से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाईस्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना का ऐलान किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कोलकाता दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि यह कॉरिडोर उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बीच तेज़ और आधुनिक रेल संपर्क स्थापित करेगा।
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों को जोड़ा जाएगा। इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद वर्तमान में 18 से 22 घंटे में पूरा होने वाला लंबा रेल सफर घटकर लगभग 6 से 7 घंटे का रह सकता है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना यात्रियों के समय की बचत के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगी।
दो हाईस्पीड कॉरिडोर को जोड़ने की तैयारी
दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना को दो हिस्सों में विकसित करने की योजना बनाई गई है। पहला खंड दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित हाईस्पीड रेल नेटवर्क का होगा, जबकि दूसरा हिस्सा वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगा। दोनों कॉरिडोर को जोड़कर एक लंबा और व्यापक हाईस्पीड मार्ग तैयार किया जाएगा।
केंद्र सरकार पहले ही हाईस्पीड रेल परियोजनाओं को अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल कर चुकी है। इसी क्रम में इस नए कॉरिडोर को भी भविष्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
किन शहरों को मिलेगा सीधा लाभ?
प्रस्तावित रूट पर कई बड़े शहर शामिल किए गए हैं, जिससे लाखों यात्रियों को फायदा मिलने की संभावना है। राजधानी दिल्ली से शुरू होकर यह ट्रेन उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों से गुजरेगी और फिर बिहार तथा पश्चिम बंगाल को जोड़ेगी।
संभावित स्टेशनों की सूची में नई दिल्ली, नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, पटना और सिलीगुड़ी शामिल हैं। सिलीगुड़ी स्टेशन को न्यू जलपाईगुड़ी क्षेत्र के आसपास विकसित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। भविष्य में इस कॉरिडोर को असम के गुवाहाटी तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
यात्रा समय में आएगा बड़ा बदलाव
वर्तमान में दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस और अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए लगभग 18 से 20 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है। लेकिन हाईस्पीड रेल नेटवर्क शुरू होने के बाद यही दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी।
करीब 1500 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बुलेट ट्रेन की संभावित गति 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। अनुमान है कि दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरा हो सकेगा, जबकि दिल्ली से पटना की दूरी करीब 4 घंटे 20 मिनट में तय की जा सकती है। वहीं वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का सफर लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होने का अनुमान लगाया गया है।
उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच बनेगा नया संपर्क
यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर केवल एक परिवहन परियोजना नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिलीगुड़ी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है और यह क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से पर्यटन, व्यापार, औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सैन्य और लॉजिस्टिक मूवमेंट को भी अधिक तेज़ और प्रभावी बनाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में रेल यात्रियों की भारी भीड़ को कम करने में भी यह कॉरिडोर मददगार साबित हो सकता है।
दिल्ली-हावड़ा रूट पर भी पड़ेगा असर
दिल्ली से हावड़ा के बीच का रेल मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्क में गिना जाता है। प्रस्तावित हाईस्पीड कॉरिडोर इस रूट के बड़े हिस्से को कवर करेगा, जिससे लंबी दूरी की पारंपरिक ट्रेनों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और रेल सेवाओं की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बुलेट ट्रेन सहित विभिन्न रेल परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इससे राज्य के रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया पर फोकस
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण और रूट अलाइनमेंट की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का विस्तार सिलीगुड़ी तक करने के लिए विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना के बाद यह देश की सबसे बड़ी बुलेट ट्रेन योजनाओं में शामिल हो सकती है। रेल मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकारों के बीच इस दिशा में लगातार बातचीत चल रही है ताकि जरूरी अनुमतियों और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
कोलकाता मेट्रो और अन्य रेल परियोजनाओं पर भी जोर
कोलकाता दौरे के दौरान रेल मंत्री ने राज्य में चल रही अन्य रेलवे परियोजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए रेलवे बजट में पहले की तुलना में कहीं अधिक धनराशि आवंटित की है। उनके अनुसार 2026-27 के लिए राज्य को 14,205 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई परियोजनाएं वर्षों तक विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कारणों से लंबित रहीं। अब सरकार इन परियोजनाओं को गति देने की दिशा में काम कर रही है। कोलकाता मेट्रो नेटवर्क के लिए 60 नई पीढ़ी की आधुनिक ट्रेनें शामिल करने की योजना भी घोषित की गई है।
सरकार का दावा है कि पश्चिम बंगाल में 100 से अधिक लंबित रेल परियोजनाओं को फिर से सक्रिय किया जाएगा। वहीं राज्य स्तर पर भी इन परियोजनाओं को आवश्यक मंजूरी और सहयोग देने का भरोसा जताया गया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में बंगाल और पूर्वी भारत के रेल ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।














