
पाकिस्तान के प्रति असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा रुख अपनाया और इस दौरान पाकिस्तान को इजरायल का छोटा भाई बताते हुए जमकर आलोचना की। ओवैसी ने कहा कि "हमारा पड़ोसी पाकिस्तान भी इजरायल की तरह है। ये दोनों देश अपने पड़ोसियों को कभी भी शांति से रहने नहीं देंगे।" उन्होंने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हुए बमबारी में 400 लोग मारे गए। ओवैसी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस्लाम का बड़ा दावा करता है, लेकिन उसे इस्लाम की बुनियादी बातें भी समझ में नहीं आतीं।
कयामत और इंसाफ की बात
ओवैसी ने आगे कहा कि कई लोग कहते हैं कि "कयामत नहीं होगी", लेकिन फिलिस्तीनी कहेंगे कि इंसाफ होना चाहिए और कयामत आएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि "जिन जालिमों ने मुसलमानों का खून बहाया है, उनका हिसाब कयामत के दिन लिया जाएगा।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने खुद को नेतन्याहू और ट्रंप के पक्ष में रख लिया है, जिससे सवाल उठता है कि आखिर युद्ध को कैसे रोका जाएगा।
न्यूट्रल रहने का महत्व
ओवैसी ने कहा कि अगर कोई न्यूट्रल होता, तो उसकी बातें ज्यादा प्रभावशाली होतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि "आप खुलकर नहीं बोल रहे कि यह युद्ध गलत है। बीजेपी-आरएसएस वाले देशवासियों से मोहब्बत नहीं दिखाते जो घरबार छोड़कर बाहर काम करने गए हैं। आप ट्रंप और नेतन्याहू के मोहब्बत में फंसे हुए हैं।"
मुसलमानों और विदेश में काम कर रहे भारतीयों की चिंता
ओवैसी ने यह भी कहा कि बहुत सारे भारतीय नागरिक—UAE, दुबई, हैदराबाद, सऊदी अरब और कतर में काम कर रहे हैं, जिनमें लाखों गरीब मजदूर शामिल हैं। ये लोग अपनी रोज़ी-रोटी कमाते हैं और उनकी नौकरियों पर संकट आ सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने इस पर जवाब दिया, लेकिन काफी देर से। ओवैसी ने सवाल उठाया कि "असल में अब क्या होगा?"
ओवैसी की अपील: युद्ध को रोकना ही होगा
ओवैसी ने जोर देकर कहा कि यह युद्ध तुरंत खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि "जब गैस की सप्लाई में रुकावट आती है, तो अचानक सभी बोलने लगते हैं कि सप्लाई जारी रहनी चाहिए।" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इंसानी जान की कोई कीमत है या केवल गैस की सप्लाई पर ध्यान दिया जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि "जो लोग इंसानियत के पक्ष में होने का दावा करते हैं, उन्हें मानवाधिकारों का असली मतलब समझना चाहिए।" उन्होंने स्कूलों में मरते बच्चों का जिक्र करते हुए कहा कि तब पूरी दुनिया खामोश थी, लेकिन अब जब देशों की गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है, तो अचानक युद्ध रोकने की आवाजें उठ रही हैं।














