
हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है, लेकिन इस दिन के मायने अब पहले जैसे नहीं रहे। यह बीमारी, जो पहले केवल बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, अब धीरे-धीरे युवाओं को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि अल्जाइमर एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे-धीरे मरने लगती हैं। इसका सीधा असर याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार पर पड़ता है।
अकेलापन और डिप्रेशन बन रहे हैं बढ़ते कारण
आज की भागदौड़ और डिजिटल दुनिया में जहां युवा सोशल मीडिया पर तो एक्टिव हैं, लेकिन असल जिंदगी में बेहद अकेले होते जा रहे हैं। यह भावनात्मक अकेलापन और लंबे समय तक चलने वाला अवसाद, अल्जाइमर जैसी बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी ऑफ इंडिया के मुताबिक, भारत में करीब 80 लाख लोग अल्जाइमर से ग्रसित हैं, और ये आंकड़े आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकते हैं।
युवाओं में क्यों बढ़ रही यह बीमारी?
पहले जहां यह बीमारी 60 वर्ष से ऊपर की उम्र में देखने को मिलती थी, अब 30-40 वर्ष की उम्र के लोग भी लक्षणों के साथ सामने आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण जेनेटिक फैक्टर, तनावपूर्ण जीवनशैली, नींद की कमी, डिप्रेशन और सामाजिक अलगाव है। हाल के वर्षों में अस्पताल में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ी है जो भूलने की शिकायत लेकर आ रहे हैं – यह केवल स्मृति की समस्या नहीं, बल्कि अल्जाइमर की शुरुआत हो सकती है।
अल्जाइमर के लक्षण क्या होते हैं?
अल्जाइमर की शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है। सामान्यतः इसके लक्षणों में शामिल हैं:
—याददाश्त कमजोर होना
—रोजमर्रा के कामों को करने में कठिनाई
—लोगों और स्थानों को पहचानने में दिक्कत
—बार-बार सवाल पूछना या बात दोहराना
—मूड और व्यवहार में बदलाव
डॉक्टर बताते हैं कि 80 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगभग 50% लोग अल्जाइमर से प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन अब यह उम्र सीमा कम होती जा रही है।
इलाज में अब भी पीछे है भारत
जहां अमेरिका जैसे देशों में अल्जाइमर के लिए उन्नत चिकित्सा पद्धतियां और दवाएं उपलब्ध हैं, वहीं भारत में अभी भी केवल लक्षणों को कुछ समय के लिए नियंत्रित करने वाली दवाएं दी जा रही हैं। दवा बंद करते ही लक्षण फिर से उभरने लगते हैं। इसीलिए बीमारी को रोकने के लिए सबसे जरूरी है जीवनशैली में बदलाव। धूम्रपान, शराब से दूरी, पर्याप्त नींद, मानसिक तनाव से बचाव और सामाजिक जुड़ाव – ये सभी कदम अल्जाइमर की रोकथाम में सहायक हो सकते हैं।














