
आज के समय में लोग अपनी त्वचा की सेहत को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। साफ़, बेदाग और हेल्दी स्किन हर किसी की चाहत होती है। ऐसे में जब शरीर पर एक के बाद एक तिल दिखाई देने लगते हैं, तो मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर ये तिल बनते क्यों हैं और क्या इनका दिखना किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है? भले ही तिल देखने में स्किन पर मौजूद एक छोटा-सा निशान लगता हो, लेकिन कई बार यह शरीर के अंदर हो रहे बदलावों के बारे में अहम संकेत दे सकता है। खासतौर पर जब कोई तिल अचानक उभर आए, उसका रंग बदल जाए या उसका आकार पहले से अलग दिखने लगे, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं होता। ऐसे में आइए विस्तार से समझते हैं कि शरीर पर ज्यादा तिल बनने के पीछे क्या कारण होते हैं।
आखिर तिल होते क्या हैं?
तिल बनने की प्रक्रिया सीधे तौर पर त्वचा में मौजूद मेलानिन पिगमेंट से जुड़ी होती है। स्किन की ऊपरी परत में मेलानोसाइट्स नाम की कोशिकाएं होती हैं, जो त्वचा को रंग देने का काम करती हैं। जब ये कोशिकाएं किसी एक जगह इकट्ठा होकर सामान्य से ज्यादा मेलानिन बनाने लगती हैं, तो वहीं तिल बन जाता है। तिल का रंग हमेशा एक जैसा नहीं होता। यह हल्के भूरे से लेकर गहरे काले, गुलाबी या कभी-कभी नीले रंग का भी हो सकता है। कुछ तिल जन्म से ही शरीर पर मौजूद होते हैं, जबकि कई तिल बचपन या युवावस्था में धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं। स्किन विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति के शरीर पर औसतन 10 से 40 तिल होना सामान्य माना जाता है। उम्र बढ़ने के साथ तिलों में हल्का बदलाव आना भी आम बात है। कई बार तिल उभरे हुए दिखने लगते हैं, रंग फीका पड़ सकता है या कुछ तिल समय के साथ अपने आप भी गायब हो जाते हैं।
शरीर पर ज्यादा तिल बनने के कारण
डॉक्टरों का मानना है कि तिल बनने के पीछे एक नहीं, बल्कि कई वजहें जिम्मेदार होती हैं। सबसे पहले इसमें आनुवंशिक कारण अहम भूमिका निभाते हैं। अगर परिवार के किसी सदस्य के शरीर पर अधिक तिल हैं, तो अगली पीढ़ी में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव भी नए तिल बनने की बड़ी वजह हो सकते हैं। किशोरावस्था, गर्भावस्था या हार्मोनल असंतुलन के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर त्वचा पर भी पड़ता है। इस दौरान नए तिल उभर सकते हैं और पुराने तिलों का रंग या आकार भी बदल सकता है। धूप में ज्यादा समय बिताना भी तिल बढ़ने का एक अहम कारण है। सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें मेलानिन के उत्पादन को तेज कर देती हैं, जिससे खासकर खुले हिस्सों जैसे चेहरे, गर्दन, हाथ और पीठ पर तिल ज्यादा दिखाई देने लगते हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र के साथ स्किन की संरचना में होने वाले प्राकृतिक बदलाव भी तिल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
क्या तिल बनना खतरे की घंटी हो सकता है?
अधिकतर मामलों में तिल बिल्कुल सामान्य होते हैं और इन्हें लेकर घबराने की जरूरत नहीं होती। ऐसे तिल न तो दर्द देते हैं और न ही किसी तरह की परेशानी पैदा करते हैं। हालांकि, कुछ खास लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर किसी तिल का आकार तेजी से बढ़ने लगे, उसका रंग अचानक गहरा या असामान्य हो जाए, किनारे टेढ़े-मेढ़े दिखें, उसमें खुजली या दर्द महसूस हो, या बिना किसी चोट के खून आने लगे—तो यह चिंता का विषय हो सकता है। ऐसे संकेत स्किन कैंसर जैसी गंभीर समस्या से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए ऐसे किसी भी बदलाव की स्थिति में तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।













