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झागदार पेशाब: इसे न करें नजरअंदाज, हो सकती है गंभीर समस्या

पेशाब में लगातार झाग बनना सामान्य नहीं है। जानें इसके कारण, संभावित स्वास्थ्य जोखिम और कब डॉक्टर से जांच करानी जरूरी है। किडनी रोग, डिहाइड्रेशन, यूटीआई या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जुड़े लक्षण और बचाव के उपाय विस्तार से पढ़ें।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Fri, 15 Aug 2025 3:19:40

झागदार पेशाब: इसे न करें नजरअंदाज, हो सकती है गंभीर समस्या

हम अक्सर साबुन या शैंपू पानी में डालते ही झाग बनते देखते हैं, लेकिन अगर पेशाब में बिना किसी कारण के लगातार झाग दिखे, तो इसे हल्के में लेना खतरे की घंटी हो सकती है। शुरुआत में यह मामूली लक्षण लग सकता है, लेकिन असल में यह शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत दे सकता है। पेशाब में झाग अक्सर तब बनता है जब मूत्र में प्रोटीन की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है, जिसे मेडिकल टर्म में प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है।

डॉक्टरों की सलाह

यदि पेशाब में बार-बार झाग बनने लगे या लगातार झाग बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह किडनी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है।

झागदार पेशाब के संभावित कारण

1. किडनी रोग


किडनी हमारे शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को फिल्टर करती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती या किसी बीमारी जैसे ग्‍लोमेरुलोनफ्राइटिस, नेफ्रोसिस सिंड्रोम या डायबिटिक नेफ्रोपैथी से प्रभावित होती है, तो प्रोटीन मूत्र में निकलने लगता है। इस वजह से पेशाब में झाग बनता है, जो कई बार लंबे समय तक देखा जा सकता है। साथ ही, किडनी रोग में अन्य लक्षण जैसे पैरों में सूजन, थकान, हाई ब्लड प्रेशर और मूत्र का रंग बदलना भी दिखाई दे सकता है।

2. डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)

जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो मूत्र सामान्य से ज्यादा गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा मूत्र अधिक सांद्र (concentrated) होने के कारण झाग बनाने की प्रवृत्ति रखता है। डिहाइड्रेशन अक्सर गर्म मौसम, पर्याप्त पानी न पीने, अत्यधिक पसीना बहने या उल्टी/दस्त की वजह से होता है। अगर यह लगातार बना रहे, तो केवल झाग ही नहीं बल्कि पेशाब का रंग भी गहरा पीला या नारंगी दिखाई दे सकता है।

3. यूटीआई (यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन)

यूटीआई यानी मूत्र मार्ग में संक्रमण की वजह से मूत्र में सूक्ष्म बैक्टीरिया या कोशिकाएं आ जाती हैं, जिससे पेशाब में झाग बन सकता है। इसके साथ-साथ जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब का रंग बदलना या गंध आना जैसी समस्या भी हो सकती है। महिलाएं और बुजुर्ग लोग इस संक्रमण के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं। यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो संक्रमण किडनी तक फैल सकता है और पेशाब में अधिक झाग, खून या पाचन समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।

4. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। उच्च ब्लड शुगर स्तर और उच्च रक्तचाप से किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि मूत्र में प्रोटीन और अन्य अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं, जिससे पेशाब में झाग बनता है। लंबे समय तक कंट्रोल न करने पर यह किडनी डैमेज का संकेत भी हो सकता है। साथ ही, व्यक्ति में लगातार थकान, आँखों के नीचे सूजन और बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कब कराएं जांच?

यदि पेशाब में लगातार झाग बनता है और यह कई दिनों तक बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सबसे पहले किसी योग्य नेफ्रोलॉजिस्ट या चिकित्सक से संपर्क करें। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांचों की सलाह देते हैं:

यूरिन टेस्ट (Urine Test): पेशाब में प्रोटीन, ग्लूकोज, बैक्टीरिया या अन्य असामान्य पदार्थों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए।

ब्लड टेस्ट (Blood Test): किडनी, लिवर और ब्लड शुगर के स्तर की जाँच के लिए।

किडनी फंक्शन टेस्ट (Kidney Function Test): किडनी की फिल्टरिंग क्षमता और स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए।

इन जांचों से यह साफ हो जाता है कि झाग का कारण साधारण है या किसी गंभीर रोग जैसे किडनी डिजीज, डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का संकेत है।

बचाव और सावधानी के उपाय


पर्याप्त पानी पिएं: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिनभर में कम से कम 7-8 गिलास पानी पिएं। यह मूत्र को पतला करता है और झाग बनने की संभावना कम करता है।

नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें: अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं और हाई ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं। इसलिए भोजन में ताजे और कम नमक वाले पदार्थों का सेवन करें।

ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित रखें: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से किडनी पर गंभीर असर पड़ता है। नियमित जांच कराएँ और डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाइयां लें।

संतुलित आहार अपनाएं: प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर की सलाह अनुसार सीमित रखें, खासकर यदि किडनी से संबंधित समस्या है। ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त आहार अपनाने से किडनी की सुरक्षा होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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