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जीभ से जानिए सेहत का हाल, रंग बदलना हो सकता है कई बीमारियों का संकेत

जीभ का रंग आपके स्वास्थ्य का आईना है। यदि जीभ पीली, काली, लाल, नीली या सफेद हो जाए तो यह कई बीमारियों का संकेत हो सकता है। जानें, अलग-अलग रंग की जीभ आपके शरीर की कौन-सी समस्या को दर्शाती है और कब डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sat, 06 Sep 2025 9:47:00

जीभ से जानिए सेहत का हाल, रंग बदलना हो सकता है कई बीमारियों का संकेत

जीभ केवल स्वाद चखने का जरिया ही नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की आंतरिक स्थिति का आईना भी होती है। जीभ के रंग और बनावट में होने वाले बदलाव अक्सर छुपी हुई स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में जीभ हल्की गुलाबी और नमी लिए होती है। लेकिन यदि इसका रंग पीला, लाल, नीला, सफेद या काला होने लगे तो इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। आइए जानें, अलग-अलग रंग की जीभ आपके शरीर के बारे में क्या कहती है।

# पीली जीभ

जीभ का पीला पड़ना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। यह स्थिति अक्सर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), एनीमिया, पीलिया और खराब ओरल हाइजीन के कारण दिखाई देती है। साथ ही, लिवर से जुड़ी बीमारियां भी जीभ के पीले रंग की मुख्य वजह बन सकती हैं। इसके अलावा, पाचन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें जैसे गैस्ट्रिक समस्या, बदहजमी या कब्ज भी जीभ को पीला करने में भूमिका निभा सकती हैं। कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन, खासकर एंटीबायोटिक्स या आयरन सप्लीमेंट्स, जीभ की सतह पर पीलापन ला सकते हैं। धूम्रपान करने वालों और तंबाकू का सेवन करने वालों की जीभ भी समय के साथ पीली दिखने लगती है। यही नहीं, ओरल हाइजीन का ध्यान न रखने से बैक्टीरिया और डेड सेल्स जीभ की सतह पर जमा हो जाते हैं, जिससे परत पीली हो जाती है। कुछ मामलों में पीली जीभ लिवर और गॉलब्लैडर की गड़बड़ियों का भी शुरुआती संकेत हो सकती है, क्योंकि पित्त (Bile) के असंतुलन से शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है और इसका असर जीभ पर झलकने लगता है।

# काली जीभ

यदि जीभ का रंग काला हो जाए तो यह अक्सर मुंह की सही तरीके से सफाई न करने, धूम्रपान या तंबाकू सेवन का नतीजा होता है। कई बार लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का उपयोग और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी इस समस्या को जन्म दे सकती हैं। काली जीभ को आमतौर पर "ब्लैक हेयरी टंग" (Black Hairy Tongue) भी कहा जाता है। इसमें जीभ की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे पपिल्ले (papillae) सामान्य से अधिक लंबे हो जाते हैं और उन पर बैक्टीरिया, डेड सेल्स तथा खाने-पीने के कण जमने लगते हैं। इसका नतीजा जीभ के काले या भूरे रंग के रूप में सामने आता है।

यह स्थिति ज्यादातर उन लोगों में देखी जाती है जो—

- बहुत अधिक कॉफी, चाय या शराब का सेवन करते हैं
- धूम्रपान और तंबाकू का उपयोग करते हैं
- मुंह की सफाई को नजरअंदाज करते हैं
- लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स या कुछ दवाइयां लेते हैं

कुछ मामलों में काली जीभ कोई गंभीर रोग नहीं होती और केवल अस्थायी कारणों से होती है। लेकिन यदि इसके साथ मुंह में बदबू, स्वाद का बदलना, जलन, या जीभ पर मोटी परत जैसी समस्याएँ बनी रहें तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

# लाल जीभ


गुलाबी से ज्यादा लाल होती जीभ सामान्य नहीं मानी जाती। यह स्कार्लेट फीवर या कावासाकी रोग का संकेत हो सकती है। इस दौरान जीभ स्ट्रॉबेरी जैसी लाल और दानेदार दिखने लगती है। इसके अलावा, विटामिन बी की कमी भी जीभ को लाल करने का प्रमुख कारण हो सकती है।
लाल जीभ को कभी-कभी “स्ट्रॉबेरी टंग” (Strawberry Tongue) भी कहा जाता है। इस अवस्था में जीभ की सतह पर छोटे-छोटे दाने या उभार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इसके संभावित कारण हो सकते हैं:

स्कार्लेट फीवर (Scarlet Fever):
यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जिसमें जीभ लाल और खुरदरी दिखने लगती है।

कावासाकी डिजीज: यह बच्चों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ बीमारी है, जो रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है और जीभ को गहरा लाल बना देती है।

विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की कमी: पोषण की कमी से जीभ लाल और सूजी हुई दिखाई देती है।

गर्म और मसालेदार भोजन का अधिक सेवन: लंबे समय तक मसालेदार और बहुत गर्म चीजें खाने से जीभ में लालिमा बढ़ सकती है।

एलर्जी या संक्रमण: कभी-कभी एलर्जी या वायरल इंफेक्शन भी जीभ को लाल कर देते हैं।

# नीली जीभ

जीभ का नीला रंग सामान्य स्थिति नहीं है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह अक्सर शरीर में ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) की तरफ इशारा करता है। जब रक्त में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का संचार नहीं हो पाता, तो इसका असर जीभ और होंठों के रंग पर दिखाई देने लगता है।

संभावित कारण:

दिल की बीमारियां: हृदय सही तरीके से रक्त पंप नहीं कर पाता, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है।

फेफड़ों की समस्या: अस्थमा, निमोनिया, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी बीमारियां फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे जीभ नीली हो सकती है।

संचार संबंधी गड़बड़ी: रक्त वाहिकाओं में रुकावट या रक्त का सही से प्रवाह न होना भी इसका कारण हो सकता है।

ठंड का प्रभाव: अत्यधिक ठंड में कभी-कभी अस्थायी रूप से जीभ और होंठ नीले पड़ सकते हैं, लेकिन यह जल्दी सामान्य हो जाते हैं।

किन लक्षणों पर ध्यान दें:


यदि नीली जीभ के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ़, छाती में दर्द, तेज़ थकान, चक्कर आना या होंठ और नाखूनों का नीला पड़ना भी दिखे, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

# सफेद जीभ


जीभ पर सफेद परत चढ़ना एक आम समस्या है, जिसे अधिकांश लोग कभी न कभी अनुभव करते हैं। सामान्य तौर पर यह स्थिति तब होती है जब जीभ की सतह पर बैक्टीरिया, फंगस या मृत कोशिकाएं जमा हो जाती हैं।

संभावित कारण:

ओरल थ्रश (फंगल इंफेक्शन): यह कैंडिडा नामक फंगस के कारण होता है और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में अधिक देखा जाता है।

मुँह की सफाई की कमी: सही तरीके से ब्रश या जीभ की सफाई न करना।

डिहाइड्रेशन और ड्राई माउथ: पानी की कमी और लार का कम बनना, जिससे बैक्टीरिया आसानी से पनपने लगते हैं।

धूम्रपान और शराब का सेवन: यह जीभ पर परत जमने और बैक्टीरिया बढ़ने का प्रमुख कारण है।

बीमारियां: पाचन संबंधी समस्या, टॉन्सिल इंफेक्शन और बुखार के दौरान भी जीभ सफेद पड़ सकती है।

किन लक्षणों पर ध्यान दें:

जीभ पर मोटी सफेद परत का लंबे समय तक बने रहना।
- मुँह से बदबू आना।
- जीभ में दर्द या जलन।
- स्वाद महसूस करने में कमी।

क्या करें:

- रोज़ाना ब्रश करने के साथ जीभ की सफाई भी करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
- धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें।
- यदि लंबे समय तक सफेद परत बनी रहे या दर्द और जलन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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