
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई बच्चा अपने ही सिर के बाल खाना शुरू कर दे तो? सुनने में अजीब लगता है, पर यह एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर मेडिकल कंडीशन है — रैपुंजल सिंड्रोम। यह केवल एक अजीब आदत नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करने वाली बीमारी है, जो बच्चों के साथ-साथ कुछ वयस्कों में भी देखी जा सकती है।
यह समस्या क्यों पैदा होती है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति की जड़ें अक्सर मानसिक दबाव, चिंता, गुस्सा, या बचपन में हुए भावनात्मक सदमे में छिपी होती हैं। कई बार यह ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) का हिस्सा भी हो सकती है। कुछ बच्चे तनाव या गुस्से में खुद को शांत करने के लिए अपने बाल खींचकर मुंह में डाल लेते हैं। ध्यान की कमी, अकेलेपन का अहसास, या भावनात्मक उपेक्षा भी इसे जन्म दे सकती है। समय के साथ यह आदत इतनी गहरी हो जाती है कि बच्चा चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पाता।
इसके खतरे कितने बड़े हैं?
रैपुंजल सिंड्रोम के परिणाम केवल मनोवैज्ञानिक नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी खतरनाक होते हैं। लगातार बाल निगलने से पेट दर्द और बार-बार उल्टी की समस्या हो सकती है। पाचन तंत्र में रुकावट (इंटेस्टाइनल ब्लॉकेज) बन सकती है। पोषण की कमी, वजन में तेजी से गिरावट और कमजोरी आ सकती है। गंभीर मामलों में आंत फटने जैसी जानलेवा स्थिति भी हो सकती है। अगर पेट में बने हेयरबॉल का आकार बहुत बड़ा हो जाए, तो उसे सर्जरी से निकालना पड़ सकता है।
किन लक्षणों से करें पहचान?
यदि आपका बच्चा—
- बार-बार सिर के बाल खींचता है
- बाल चबाता या निगलता है
- पेट दर्द, उल्टी या भूख कम होने की शिकायत करता है
- अचानक बिना वजह वजन घटा रहा है
- पेट में लगातार भारीपन या सूजन महसूस करता है
- कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है
- स्कूल या दोस्तों से दूरी बनाने लगा है
- हमेशा चिंतित, उदास या चिड़चिड़ा रहता है
- बालों के पैच-दार झड़ने (टक्कल जैसे हिस्से) के लक्षण दिखा रहा है
- या गले और पेट में रुकावट जैसी समस्या महसूस कर रहा है
इलाज और रोकथाम कैसे करें?
इस सिंड्रोम का इलाज केवल शारीरिक समस्या को नहीं, बल्कि मानसिक कारणों को भी दूर करना है। सही समय पर पहचान और उचित देखभाल से बच्चा पूरी तरह ठीक हो सकता है।
साइकोलॉजिकल थेरेपी: जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) बच्चों को इस आदत से बाहर निकलने में मदद करती है, साथ ही उन्हें तनाव और चिंता को मैनेज करने के तरीके सिखाती है।
काउंसलिंग: बच्चे की भावनाओं को समझना, उनकी असुरक्षाओं को पहचानना और उन्हें स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना सिखाना जरूरी है।
परिवार का सहयोग: प्यार, ध्यान और सुरक्षा का माहौल बच्चे की मानसिक स्थिति को स्थिर करता है। माता-पिता को धैर्य रखना और बच्चे पर दबाव न डालना चाहिए।
पोषण और स्वास्थ्य देखभाल: संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित हेल्थ चेकअप बच्चे की शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत को मजबूत बनाते हैं।
जागरूकता बढ़ाना: बच्चे को समझाएं कि बाल खाना शरीर के लिए हानिकारक है और इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।














