
पीरियड्स के समय कई महिलाएं अपने आप को थका हुआ, कमजोर या असहज महसूस करती हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इस दौरान फिजिकल रिलेशन (शारीरिक संबंध) करना सुरक्षित है या इससे कोई नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं वैज्ञानिक और डॉक्टरों की दृष्टि से पूरी सच्चाई।
# पीरियड्स और शरीर में बदलाव
पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव काफी स्पष्ट रूप से महसूस किए जाते हैं। इस दौरान एस्ट्रोज़न और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे मूड स्विंग्स, क्रेंप्स, सिरदर्द, पीठ और पेट में दर्द, और कभी-कभी शरीर में थकान और कमजोरी आम हैं। हार्मोनल बदलाव केवल शारीरिक तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं। कई महिलाओं को इस दौरान चिड़चिड़ापन, उदासी या चिंता महसूस हो सकती है।
इसके अलावा, पीरियड्स के दौरान शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे सूजन और वजन में हल्का बढ़ना महसूस हो सकता है। पेट और कमर के आसपास मसल्स तनावग्रस्त हो जाते हैं, जिससे gentle movement या stretching करने से राहत मिलती है। यही कारण है कि कई लोग इस समय intimacy से दूर रहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि शारीरिक संबंध उनके शरीर के लिए तनावपूर्ण या असुरक्षित हो सकते हैं।
लेकिन यह जरूरी नहीं कि फिजिकल रिलेशन हमेशा हानिकारक हो। सही precautions और comfortable स्थिति अपनाने पर यह दर्द और क्रेंप्स को कम करने में मदद भी कर सकता है।
# फिजिकल रिलेशन के दौरान शरीर में क्या होता है
गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, यदि दोनों पार्टनर स्वस्थ हैं, तो पीरियड्स के दौरान शारीरिक संबंध लेना अधिकांश महिलाओं के लिए सुरक्षित होता है। इस दौरान intimacy के दौरान ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, जो मसल्स को रिलैक्स करता है और दर्द को कम करता है।
साथ ही, blood flow बढ़ने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे पेट और पीठ के दर्द में कुछ राहत मिल सकती है। यह मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा, gentle intimacy और ऑर्गैज्म के दौरान एंडॉर्फ़िन्स रिलीज़ होते हैं, जो शरीर को आराम और सुखद अनुभूति प्रदान करते हैं।
# इन्फेक्शन का खतरा
पीरियड्स के दौरान शारीरिक संबंध बनाते समय इन्फेक्शन का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है। ब्लीडिंग की वजह से वेजाइना में बैक्टीरिया और माइक्रोऑर्गेनिज़्म के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। यह विशेष रूप से तब अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब पार्टनर या महिला के शरीर में किसी तरह की इन्फेक्शन या इम्यूनिटी संबंधित समस्या हो।
इसलिए इस दौरान हाइजीन का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कुछ जरूरी उपाय इस प्रकार हैं:
कंडोम का उपयोग: संक्रमण से बचाव के लिए हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें।
साफ़ सुथरी चादर और बेडशीट: प्रयोग के दौरान clean sheets का उपयोग करें।
शरीर की सफाई: संभोग से पहले और बाद में शॉवर लेना और जननांगों की सफाई करना जरूरी है।
अत्यधिक तनाव या चोट से बचें: पीरियड्स के दौरान शरीर संवेदनशील होता है, इसलिए अत्यधिक दबाव या चोट से बचना चाहिए।
# प्रेग्नेंसी का रिस्क
पीरियड्स के दौरान फिजिकल रिलेशन करने से प्रेग्नेंसी का जोखिम कम होता है, क्योंकि ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) इस समय आमतौर पर नहीं होता। फिर भी, यह पूरी तरह से असंभव नहीं है। अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी से बचना चाहती है, तो कंट्रासेप्शन का उपयोग हमेशा advisable है।
# क्रेंप्स में राहत और मूड सुधार
कई महिलाएं रिपोर्ट करती हैं कि gentle intimacy के दौरान उनके पीरियड्स के क्रेंप्स कम हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण है शरीर में blood flow का बढ़ना और मसल्स का रिलैक्स होना। इसके अलावा, ऑर्गैज्म के दौरान रिलीज़ होने वाले एंडॉर्फ़िन्स दर्द को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके साथ ही शरीर में तनाव कम होता है और मानसिक रूप से भी आराम महसूस होता है।
# डॉक्टर क्या कहते हैं
गायनेकोलॉजिस्ट का मानना है कि पीरियड्स के दौरान शारीरिक संबंध लेना ज्यादातर महिलाओं के लिए सुरक्षित है, बशर्ते हाइजीन और comfort का ध्यान रखा जाए। यदि किसी महिला को अत्यधिक दर्द, असहजता या संक्रमण की संभावना महसूस हो, तो इसे टालना चाहिए।
# डॉक्टर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं:
- कंडोम का इस्तेमाल करें।
- आरामदायक और सुरक्षित स्थिति अपनाएं।
- किसी भी असामान्य लक्षण जैसे जलन, तेज दर्द या असामान्य डिस्चार्ज महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- शुरुआत में हल्का और gentle intimacy ही बेहतर होती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














