
कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो हर साल लाखों जिंदगियां छीन लेती है। इसके कई प्रकार पाए जाते हैं, जिनमें मुंह का कैंसर भी बेहद सामान्य है। विशेष रूप से तंबाकू, गुटखा, बीड़ी और सिगरेट का सेवन करने वाले लोगों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अक्सर यह बीमारी शुरुआती चरण में कुछ संकेत देती है, जिन्हें लोग सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है।
मुंह के कैंसर के संभावित लक्षण
1. लाल या सफेद धब्बे
यदि आपके होंठ, जीभ या गाल की अंदरूनी सतह पर लाल या सफेद रंग के धब्बे दिखाई दे रहे हैं और ये लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहे, तो इसे हल्के में न लें। यह मुंह के कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। सामान्य तौर पर ऐसे धब्बे संक्रमण या घाव के कारण कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यदि यह कई हफ्तों तक बने रहें या आकार और रंग में बदलाव दिखाएं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इन धब्बों के साथ जलन, दर्द या खून निकलने की समस्या भी दिखाई दे सकती है। कई बार यह धब्बे मोटे परत जैसे हो जाते हैं और धीरे-धीरे छालों का रूप ले लेते हैं। तंबाकू, गुटखा, शराब या धूम्रपान करने वालों में इस तरह के धब्बे बनने की संभावना और अधिक रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लाल या सफेद धब्बे लगातार बने रहें तो तुरंत बायोप्सी या संबंधित जांच करानी चाहिए। जल्दी जांच और सही इलाज से कैंसर की रोकथाम संभव है।
2. सूजन या गांठ
मुंह के किसी भी हिस्से — चाहे वह जीभ हो, मसूड़े, तालू या गाल की अंदरूनी सतह — पर अचानक गांठ या सूजन महसूस होना कैंसर का संकेत हो सकता है। सामान्यत: मामूली सूजन कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन अगर यह लगातार बढ़ती जाए, दर्द दे या छूने पर कठोर महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। कई बार यह गांठ धीरे-धीरे बड़ी होती है और खाने-पीने, बोलने या निगलने में कठिनाई पैदा कर देती है। यदि सूजन के साथ खून निकलना, जलन होना या ज़ख्म जैसा अहसास हो, तो यह और भी गंभीर लक्षण माना जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तंबाकू, गुटखा और शराब का सेवन करने वालों में ऐसी गांठें कैंसर के शुरुआती चरण का संकेत हो सकती हैं। इसलिए यदि आपको लंबे समय तक मुंह में कोई असामान्य सूजन या गांठ महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना बेहद ज़रूरी है।
3. बोलने में परेशानी
यदि बोलते समय आपकी आवाज़ अचानक बदलने लगे, भारी हो जाए या शब्द स्पष्ट न निकलें, तो यह मुंह के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। जब मुंह में कैंसर के सेल्स बढ़ने लगते हैं, तो उनका असर जीभ और जबड़े की मांसपेशियों पर पड़ता है। इससे बोलने की गति धीमी हो सकती है या आवाज़ में कंपन और खराश जैसी समस्या महसूस हो सकती है। कई बार मरीज को लंबे वाक्य बोलने में कठिनाई होती है और हर शब्द को स्पष्ट करने में दिक्कत होती है। यदि इसके साथ-साथ जीभ सुन्न होना, लार अधिक बनना या दांत ढीले पड़ने जैसी समस्या दिखे, तो इसे सामान्य थकान या पोषण की कमी समझने की गलती न करें। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी परेशानी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए यदि बोलने के तरीके या आवाज़ में लगातार बदलाव दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
4. खाना चबाने में कठिनाई
अगर आपको खाना चबाने या निगलने में लगातार परेशानी हो रही है, तो इसे मामूली समस्या समझकर नज़रअंदाज़ करना खतरनाक साबित हो सकता है। मुंह के कैंसर की वजह से जीभ, मसूड़ों और जबड़े की गतिशीलता प्रभावित हो जाती है। इससे न केवल खाना चबाने में कठिनाई होती है बल्कि कई बार निगलते समय भी दर्द या जलन महसूस हो सकती है। कई मरीजों को यह शिकायत रहती है कि भोजन करते समय ऐसा लगता है मानो गले या मुंह में कोई चीज़ अटक रही हो। इसके साथ ही जबड़े का कसाव, मसूड़ों में सूजन और दांतों का ढीला होना भी इस समस्या को और गंभीर बना देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाना चबाने और निगलने में बार-बार कठिनाई हो, तो यह पोषण की कमी या पाचन संबंधी समस्या मात्र नहीं हो सकती। यह मुंह के कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना बेहद ज़रूरी है, ताकि सही समय पर इलाज मिल सके।
5. कान में दर्द
अक्सर लोग कान दर्द को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह हमेशा मामूली कारणों से नहीं होता। कई बार बिना किसी संक्रमण या चोट के कान में लगातार दर्द रहना मुंह के कैंसर का एक छुपा हुआ संकेत हो सकता है। मुंह के कैंसर में जबड़े, गले और नसों पर दबाव पड़ने लगता है। यह दबाव कान की नसों से भी जुड़ा होता है, जिसके कारण कान में असामान्य दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। कई मरीजों में यह दर्द समय-समय पर बढ़ता या लगातार बना रहता है। अगर कान दर्द के साथ-साथ गले में खराश, बोलने में बदलाव, या मुंह में घाव जैसी अन्य समस्याएं भी दिखें, तो यह और भी गंभीर संकेत हो सकता है। इसे सामान्य कान दर्द समझकर अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि कान दर्द लंबे समय तक बना रहे और सामान्य इलाज से भी ठीक न हो, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या ऑन्कोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। समय रहते पता चलने पर मुंह के कैंसर का उपचार संभव है।
6. वजन में अचानक गिरावट
अगर आपका वजन बिना किसी वजह के तेज़ी से घटने लगे, तो इसे कभी भी सामान्य न समझें। यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। मुंह का कैंसर भी उन बीमारियों में से एक है, जिसकी वजह से रोगी का वजन अचानक कम होना शुरू हो जाता है। कैंसर की वजह से शरीर की ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है और पोषण का अवशोषण सही से नहीं हो पाता। इसके अलावा, मरीज को खाने-पीने में परेशानी, निगलने में तकलीफ और भूख न लगने जैसी समस्याएं भी होती हैं। इन कारणों से वजन लगातार गिरता चला जाता है, जिससे कमजोरी और थकान और भी बढ़ जाती है।
सावधानी है जरूरी
मुंह का कैंसर धीरे-धीरे पनपने वाली गंभीर बीमारी है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते इलाज शुरू किया जाए तो इससे बचाव संभव है। यदि आपके मुंह में लाल या सफेद धब्बे, गांठ या सूजन, बोलने और चबाने में दिक्कत, कान दर्द या वजन में अचानक कमी जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। याद रखें—समय पर जांच और सही उपचार ही इस बीमारी पर काबू पाने का सबसे प्रभावी तरीका है। जितनी जल्दी पहचान होगी, उपचार की संभावना उतनी ही बेहतर होगी और जीवन को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














