
न्यूयॉर्क सिटी के सेंट्रल हार्लेम इलाके में अचानक लेजियोनेयर्स डिजीज (Legionnaires’ Disease) का कहर सामने आया है। शहर के हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार, इस बीमारी से अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और 58 लोग संक्रमित हो चुके हैं। यह रोग भले ही दुर्लभ हो, लेकिन इसकी गंभीरता जानलेवा साबित हो सकती है। इसका मुख्य कारण है लीजियोनेला बैक्टीरिया (Legionella Bacteria), जो वातावरण में आसानी से पनप सकता है।
संक्रमण कैसे फैलता है?
यह बीमारी प्रायः उन स्थानों पर फैलती है, जहां गर्म और स्थिर पानी जमा रहता है। बैक्टीरिया विशेष रूप से कूलिंग टावर्स, बड़े भवनों की पाइपलाइन, हॉट टब्स और सजावटी फव्वारों में विकसित होते हैं। जब ऐसे पानी से धुंध या भाप निकलकर हवा में मिलती है और लोग उसे सांस के साथ अंदर लेते हैं, तो इंफेक्शन फैल जाता है। खास बात यह है कि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता।
हार्लेम प्रकोप – मामला कैसे बढ़ा?
जुलाई के अंतिम सप्ताह में स्वास्थ्य अधिकारियों ने हार्लेम क्षेत्र में मामलों का समूह पाया। शुरुआती जांच में 22 लोग बीमार और एक मौत दर्ज हुई। लेकिन अगस्त की शुरुआत तक आंकड़े बढ़कर 58 मरीज और 2 मौतों तक जा पहुंचे। यह संक्रमण पांच ज़िप कोड क्षेत्रों (10027, 10030, 10035, 10037 और 10039) में फैल चुका था। जांच के दौरान 11 कूलिंग टावर्स में लीजियोनेला बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई, जिन्हें तुरंत साफ कर संक्रमणमुक्त किया गया।
लक्षण और खतरे
इस बीमारी के लक्षण संक्रमण के 2 से 10 दिनों के भीतर सामने आते हैं।
प्रमुख लक्षण:
- तेज बुखार और कंपकंपी
- लगातार खांसी (बलग़म वाली या सूखी)
- सांस लेने में दिक़्क़त
- सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न
गंभीर हालात में उल्टी, दस्त, भूख में कमी और भ्रम (कन्फ्यूजन) भी देखने को मिलता है। चूंकि लक्षण अक्सर फ्लू या कोविड-19 जैसे प्रतीत होते हैं, इसलिए समय रहते इसकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है।
किन्हें है सबसे बड़ा खतरा?
- 50 वर्ष से अधिक आयु वाले लोग
- धूम्रपान करने वाले
- जिनको पुरानी फेफड़ों की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी है
अगर सही समय पर इलाज न मिले तो रोगी की स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर, शॉक या मल्टी-ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच सकती है। औसतन मृत्यु दर 10% है, लेकिन बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में यह आंकड़ा 25% तक बढ़ सकता है।
इलाज और बचाव के उपाय
फिलहाल लेजियोनेयर्स डिजीज की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इस बीमारी के उपचार में एंटीबायोटिक्स (जैसे एजिथ्रोमाइसिन, लेवोफ्लॉक्सासिन या डॉक्सीसाइक्लिन) का उपयोग किया जाता है। हल्के मामलों में दवा असरदार साबित होती है, जबकि गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना अनिवार्य होता है।
रोकथाम के लिए ज़रूरी कदम:
- इमारतों के कूलिंग टावर्स और वॉटर सिस्टम की समय-समय पर सफाई और डिसइंफेक्शन।
- बड़े भवनों में अनुपयोगी पाइप या नलों को सप्ताह में एक बार फ्लश करना।
- घरेलू स्तर पर वॉटर हीटर का तापमान 120°F (49°C) पर रखना और शॉवरहेड्स को नियमित रूप से साफ करना।
- गार्डन होज को प्रयोग के बाद खाली करना और ह्यूमिडिफ़ायर या विंडशील्ड वॉशर फ्लुइड का उपयोग केवल निर्माता की गाइडलाइन के अनुसार करना।
सीख क्या मिलती है?
हार्लेम का यह प्रकोप यह स्पष्ट करता है कि शहरी इलाकों में पानी से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी और रखरखाव बेहद जरूरी है। शुरुआती पहचान और उचित इलाज से अनगिनत जानें बचाई जा सकती हैं। साथ ही, अफवाहों से बचकर केवल आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी पर भरोसा करना भी उतना ही आवश्यक है।














