
आज के समय में सेहत से बढ़कर कुछ नहीं है — और यह बात पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं पर भी समान रूप से लागू होती है। महिलाओं की जीवनशैली, जिम्मेदारियां और शारीरिक परिवर्तन उन्हें कई स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं। खासकर 20 की उम्र पार करने के बाद महिलाओं के शरीर में कई जैविक और हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो समय-समय पर जांच की मांग करते हैं। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप कराना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ भविष्य की कुंजी है।
पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट — सर्विकल हेल्थ के लिए अनिवार्य
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को 21 वर्ष की उम्र से ही पैप स्मीयर टेस्ट कराना शुरू कर देना चाहिए। यह टेस्ट सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) में कैंसर या असामान्य कोशिकाओं की जांच के लिए किया जाता है। हर तीन साल में एक बार यह टेस्ट दोहराना चाहिए। साथ ही, 30 वर्ष की उम्र के बाद एचपीवी (HPV) टेस्ट हर पांच साल में करवाना आवश्यक है। यह वायरस सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण होता है, इसलिए इसकी समय पर जांच महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
एसटीडी टेस्ट — छिपी बीमारियों की पहचान के लिए जरूरी
कई यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) बिना किसी लक्षण के होते हैं, इसलिए इनका पता लगाना मुश्किल होता है। लेकिन अगर इनका समय पर पता न चले तो ये प्रजनन स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं, और गर्भावस्था के दौरान बच्चे तक भी पहुंच सकते हैं। इसलिए, जो महिलाएं यौन रूप से सक्रिय हैं, उन्हें नियमित रूप से एसटीडी टेस्ट कराना चाहिए ताकि संक्रमण की रोकथाम समय रहते की जा सके।
डायबिटीज स्क्रीनिंग — बदलती लाइफस्टाइल के साथ बढ़ता खतरा
आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अनियमित खानपान ने डायबिटीज का खतरा युवाओं में भी बढ़ा दिया है। 20 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच करवानी चाहिए। यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या वजन ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह पर यह टेस्ट साल में एक बार करवाना बेहतर रहेगा।
ब्रेस्ट हेल्थ — शुरुआती जांच है जरूरी
20 की उम्र के बाद से ही महिलाओं को ब्रेस्ट की जांच पर ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए, समय पर जांच जीवनरक्षक साबित हो सकती है। हर महीने सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करना और किसी भी असामान्यता जैसे गांठ, दर्द या सूजन का पता चलते ही डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। 30 वर्ष के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार मेमोग्राम टेस्ट करवाना भी अच्छा विकल्प है।
समय पर टेस्ट = स्वस्थ जीवन
इन सभी जांचों को नियमित रूटीन में शामिल करने से न केवल बीमारियों का समय पर पता लगाया जा सकता है, बल्कि उनका प्रभावी उपचार भी संभव हो पाता है। महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर सजग रहना चाहिए, क्योंकि एक स्वस्थ महिला ही परिवार और समाज की मजबूत नींव होती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य चिकित्सा सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य जांच या उपचार से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।














