
शादी के बाद अधिकतर दंपत्तियों की यही ख्वाहिश होती है कि समय पर संतान सुख मिले। लेकिन कई बार बार कोशिशों के बावजूद गर्भधारण नहीं होता, जिससे चिंता और सवाल जन्म लेते हैं कि आखिर कब इसे बांझपन (Infertility) माना जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बात का एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का नियम तय है, जिसे जानना हर कपल के लिए महत्वपूर्ण है।
ग्लोबल नियम के अनुसार, अगर कोई दंपत्ति लगातार 12 महीने तक बिना किसी सुरक्षा उपाय के नियमित रूप से फिजिकल रिलेशन करता है और गर्भधारण नहीं होता, तो इसे बांझपन की समस्या माना जाता है।
बांझपन महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि यह केवल महिलाओं की समस्या है, लेकिन ऐसा बिल्कुल सही नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 40% मामलों में समस्या महिलाओं से जुड़ी होती है, जबकि 30-35% मामलों में कारण पुरुषों में पाया जाता है। इसके अलावा, लगभग 20-25% मामलों में दंपत्ति दोनों में ही गर्भधारण की समस्या का सामना करते हैं।
# महिलाओं में बांझपन के कारण:
हॉर्मोनल असंतुलन – महिलाओं में हार्मोन का संतुलन गर्भधारण के लिए बेहद जरूरी होता है। अगर एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन या थायरॉयड हार्मोन असंतुलित हो जाएं तो अंडाणु का सही समय पर परिपक्व होना या ओव्यूलेशन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) – यह एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या है जिसमें अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। इसके कारण ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है और गर्भधारण में कठिनाई आती है।
ब्लॉक्ड फैलोपियन ट्यूब्स – फैलोपियन ट्यूब्स के ब्लॉक होने पर अंडाणु और शुक्राणु का मिलना संभव नहीं होता, जिससे गर्भधारण नहीं हो पाता। यह संक्रमण, यूट्राइन सर्जरी या एंडोमेट्रियोसिस के कारण हो सकता है।
बढ़ती उम्र – महिलाओं की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ घटती है। 30 साल के बाद अंडाणु की संख्या और गुणवत्ता में कमी आने लगती है, और 35-40 साल के बाद गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है।
थायरॉयड या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं – थायरॉयड की गड़बड़ी, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी गर्भधारण में बाधा डाल सकती हैं।
पुरुषों में बांझपन के कारण:
कम स्पर्म काउंट – पुरुषों में यदि शुक्राणु की संख्या सामान्य स्तर से कम हो तो गर्भधारण की संभावना घट जाती है।
स्पर्म की गुणवत्ता में कमी – केवल संख्या ही नहीं, बल्कि शुक्राणु की गति (motility) और आकार (morphology) भी महत्वपूर्ण है। खराब गुणवत्ता वाले शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते।
शराब-सिगरेट का सेवन – धूम्रपान और शराब का नियमित सेवन शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है, जिससे बांझपन की समस्या बढ़ती है।
मोटापा और तनाव – अधिक वजन या मोटापा हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकता है। इसके अलावा मानसिक तनाव और काम का अत्यधिक दबाव भी यौन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
लाइफस्टाइल फैक्टर:
नींद की कमी – पर्याप्त नींद न लेने से हार्मोनल संतुलन बिगड़ता है, जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।
असंतुलित आहार और जंक फूड – पोषण की कमी या गलत आहार शरीर की संतानोत्पत्ति क्षमता को कम कर सकता है।
अत्यधिक मानसिक या शारीरिक तनाव – लगातार तनाव में रहना हार्मोनल असंतुलन, यौन इच्छा में कमी और प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है।
इन सभी कारणों के चलते न केवल महिलाओं और पुरुषों की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि गर्भधारण में देरी या असफलता भी होती है। इसलिए समय रहते स्वास्थ्य जांच और सही जीवनशैली अपनाना बेहद आवश्यक है।
गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए कितनी बार संबंध बनाना चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए मासिक धर्म चक्र के ओव्यूलेशन पीरियड में सप्ताह में 2-3 बार यौन संबंध बनाना पर्याप्त होता है। इसका अर्थ यह है कि केवल संबंध की संख्या बढ़ाने से गर्भधारण की गारंटी नहीं मिलती। सही समय पर संबंध बनाना और शरीर की स्वस्थ स्थिति बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही जीवनशैली, तनाव का स्तर, पोषण और पर्याप्त नींद जैसी आदतें भी गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करती हैं।
# कब लें डॉक्टर की सलाह
- यदि महिला की उम्र 35 साल से कम है और लगातार 12 महीने प्रयासों के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो यह डॉक्टर से परामर्श लेने का संकेत है।
- अगर महिला की उम्र 35 साल से अधिक है, तो केवल 6 महीने की कोशिशों के बाद भी प्रेग्नेंसी न होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
- पुरुषों में लगातार थकान, यौन इच्छा में कमी या अन्य लक्षण दिखाई देने पर भी जरूरी है कि वह टेस्ट और स्वास्थ्य जांच कराएं।
- सही समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने से समस्या का सही निदान और उपचार संभव होता है, जिससे दंपत्ति के लिए संतान सुख की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














