
हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप आज के समय में एक आम लेकिन खतरनाक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। लेकिन लंबे समय तक कंट्रोल न करने पर यह दिल, दिमाग, आंख, किडनी और पूरे शरीर को गहराई से प्रभावित करता है। आइए जानते हैं हाई बीपी होने पर शरीर में क्या-क्या बदलाव नजर आते हैं।
1. आर्टरीज पर प्रभाव
लगातार उच्च रक्तचाप आर्टरीज की दीवारों पर दबाव बढ़ा देता है। समय के साथ आर्टरीज की दीवारों में सूक्ष्म कट या क्षति होने लगती है। इन जगहों पर फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है, जिसे प्लाक कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप धमनियां संकरी हो जाती हैं और खून का प्रवाह कम हो जाता है। संकरी हुई धमनियों के कारण शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते, जिससे अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यही स्थिति दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक (Stroke) का खतरा बढ़ा देती है। इसके अलावा, लंबे समय तक हाई बीपी रहने पर आर्टरीज कठोर हो जाती हैं (एथेरोस्क्लेरोसिस), जिससे ब्लड सर्कुलेशन और भी मुश्किल हो जाता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
2. दिमाग और स्ट्रोक का जोखिम
हाई ब्लड प्रेशर मस्तिष्क की नसों पर भी गहरा असर डालता है। लगातार बढ़ा हुआ प्रेशर किसी नस को फटने या ब्लॉक होने के लिए मजबूर कर सकता है। जब दिमाग तक खून का प्रवाह रुकता है, तो स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक उच्च रक्तचाप रहने से दिमाग की छोटी-छोटी नसें कमजोर हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप याददाश्त कमजोर होना, सोचने-समझने की क्षमता में कमी और डिमेंशिया जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।
3. आंखों पर असर
हमारी आंखों की रक्त नलिकाएं बेहद पतली और संवेदनशील होती हैं। उच्च रक्तचाप की वजह से इन पर दबाव बढ़ जाता है। नलिकाएं फट सकती हैं, सूजन आ सकती है या खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसका परिणाम धुंधला दिखाई देना, आंखों में सूजन और गंभीर स्थिति में स्थायी दृष्टिहीनता भी हो सकता है। लंबे समय तक unmanaged हाई बीपी रेटिना (आंख की पीछे की परत) को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
4. दिल की कार्यप्रणाली पर प्रभाव
हाई बीपी होने पर दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है ताकि खून पूरे शरीर में पहुंच सके। लगातार अधिक दबाव की वजह से दिल की मांसपेशियां मोटी और सख्त होने लगती हैं, जिसे लेफ्ट वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी कहते हैं। शुरुआत में दिल मजबूत लगता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता घटने लगती है और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप के कारण दिल की धड़कन अनियमित (Arrhythmia) भी हो सकती है।
5. किडनी पर असर
किडनी शरीर से विषैले तत्व और अतिरिक्त पानी निकालने का काम करती है। लेकिन लगातार उच्च रक्तचाप रहने पर किडनी की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं, जिससे फिल्टरिंग क्षमता कम हो जाती है। लंबे समय तक unmanaged हाई बीपी किडनी फेलियर तक का कारण बन सकता है। इसके अलावा, किडनी की खराब कार्यप्रणाली शरीर में अतिरिक्त पानी और सोडियम जमा होने का कारण बन सकती है, जिससे ब्लड प्रेशर और बढ़ सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” क्यों कहते हैं
हाई ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है और शुरुआत में पता भी नहीं चलता। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना बेहद जरूरी है।
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को नियमित रूप से लें।
- संतुलित आहार अपनाएं, जिसमें कम नमक और कम प्रोसेस्ड फूड शामिल हो।
- नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
- तनाव कम करने के उपाय अपनाएं, जैसे मेडिटेशन या योग।
- सही देखभाल और जीवनशैली अपनाकर आप हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने शरीर को गंभीर स्वास्थ्य खतरों से बचा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














