
दिल की बीमारियां यानी कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ (CVDs) आज पूरी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं। हर साल करीब 1.79 करोड़ लोग इन रोगों की वजह से अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से 80% से अधिक मामले हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़े होते हैं।
# हार्ट अटैक क्यों होता है?
हार्ट अटैक, जिसे मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (Myocardial Infarction) कहा जाता है, तब होता है जब दिल की धमनियों (Coronary Arteries) में ब्लड फ्लो रुक जाता है। ये धमनियां दिल को ऑक्सीजन और पोषण से भरपूर खून पहुंचाने का काम करती हैं। जब इन धमनियों में रुकावट होती है, तो दिल की मांसपेशियों (Heart Muscles) तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
# हार्ट अटैक के पीछे मुख्य कारण
प्लाक जमना (Atherosclerosis)
धमनियों की भीतरी सतह पर फैटी पदार्थ, कोलेस्ट्रॉल और अन्य अपशिष्ट जमा होकर प्लाक बनाते हैं। धीरे-धीरे यह प्लाक धमनियों को संकरा कर देता है।
प्लाक फटना और क्लॉट बनना
कई बार यह प्लाक फट जाता है, जिससे खून का थक्का (Blood Clot) बन जाता है। यह क्लॉट पूरी तरह से ब्लड फ्लो को रोक सकता है और दिल तक खून पहुंचना बंद हो जाता है।
ब्लड सप्लाई बाधित होना
जब धमनियों में बनी रुकावट या थक्का ब्लड फ्लो को बाधित करता है, तो दिल की मांसपेशियां ऑक्सीजन से वंचित हो जाती हैं। ऑक्सीजन न मिलने पर मांसपेशियों की कोशिकाएं मरने लगती हैं। यही प्रक्रिया हार्ट अटैक कहलाती है।
# किस समय आता है ज्यादा खतरा?
हार्ट अटैक का खतरा हर पल समान नहीं होता, बल्कि यह मौसम, सप्ताह का दिन और दिन के समय पर काफी हद तक निर्भर करता है।
1. सर्दियों का मौसम
- ठंडी हवाओं और तापमान में गिरावट से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं।
- ठंड के कारण शरीर को गर्म रखने के लिए हार्ट पर दबाव बढ़ता है।
- इस समय इन्फेक्शन और फ्लू का खतरा भी ज्यादा रहता है, जिससे शरीर पर अतिरिक्त स्ट्रेस पड़ता है।
- इसी वजह से दिसंबर के आखिरी दिनों और जनवरी की शुरुआत को कई बार "हार्ट अटैक सीज़न" कहा जाता है।
2. सप्ताह के दिन
- सोमवार को हार्ट अटैक के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं।
- वजह है वीकेंड के बाद कामकाज शुरू होने का तनाव और मानसिक दबाव (Work Stress)।
- पश्चिमी देशों में सोमवार सबसे संवेदनशील दिन माना जाता है, जबकि मिडिल ईस्ट में शुक्रवार और जापान में वीकेंड के दौरान हार्ट अटैक के केस ज्यादा देखे गए हैं।
3. दिन का समय
- सुबह 6 बजे से दोपहर तक का समय सबसे खतरनाक माना जाता है।
- विशेषकर नींद से जागने के पहले 3 घंटे में खतरा अधिक होता है।
सुबह:
- ब्लड वेसेल्स सिकुड़ी होती हैं।
- खून गाढ़ा होता है और उसमें थक्का बनने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है।
- शरीर को अधिक ऑक्सीजन चाहिए होती है, लेकिन सप्लाई कम मिलती है।
- अगर धमनियों में पहले से प्लाक जमा है, तो यह स्थिति तुरंत हार्ट अटैक को ट्रिगर कर सकती है।
हार्ट अटैक का रिस्क किन पर ज्यादा?
आपकी उम्र, खान-पान, दिनचर्या, तनाव का स्तर और फैमिली हिस्ट्री—all मिलकर हार्ट अटैक के खतरे को तय करते हैं। यह अचानक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ते रिस्क फैक्टर्स का नतीजा होती है।
हार्ट अटैक से बचाव के 5 अहम उपाय
1. संतुलित और पौष्टिक भोजन करें
- अपने आहार में हरी सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज, दालें और नट्स शामिल करें।
- जंक फूड, तैलीय भोजन, अधिक नमक और शक्कर से दूरी बनाएं।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड जैसे अखरोट, अलसी के बीज और मछली दिल को मजबूत बनाते हैं।
2. रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करें
- रोज़ कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या हल्का कार्डियो करें।
- एक्सरसाइज से दिल की नसें लचीली रहती हैं और ब्लड फ्लो बेहतर होता है।
- ज़्यादा देर तक बैठे रहने की आदत से बचें।
3. तनाव को कंट्रोल करें
- तनाव दिल की बीमारियों का बड़ा कारण है।
- इसके लिए ध्यान (Meditation), प्राणायाम और डीप ब्रीदिंग का अभ्यास करें।
- अपनी नींद पूरी लें और पर्याप्त आराम करें।
4. डॉक्टर से समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहें
- ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें।
- अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है तो डॉक्टर से रेगुलर कंसल्ट करें।
- समय रहते समस्या पकड़ में आने पर गंभीर खतरे से बचा जा सकता है।
5. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें
- लो-डेंसिटी कोलेस्ट्रॉल (LDL) यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने की कोशिश करें।
- उच्च रक्तचाप दिल की धमनियों पर दबाव डालता है, इसलिए इसे नियंत्रित रखना बेहद ज़रूरी है।
- दवाओं के साथ-साथ हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल भी मदद करते हैं।
मुख्य कारण
हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ है, जिसमें धमनियां प्लाक जमा होने से ब्लॉक हो जाती हैं। इसके अलावा हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी, डायबिटीज, धूम्रपान, तंबाकू, मोटापा, अस्वस्थ खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक तनाव भी खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। शराब का अधिक सेवन और परिवार में दिल की बीमारियों का इतिहास होना भी बड़ा रिस्क फैक्टर है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














