
जैसे-जैसे उम्र तीस की दहलीज़ पार करने लगती है, हमारे शरीर में कई आंतरिक बदलाव चुपचाप शुरू हो जाते हैं। हम भले ही खुद को फिट और स्वस्थ महसूस करें, लेकिन कई समस्याएं ऐसी होती हैं जो बिना लक्षण के पनपती रहती हैं। सिर्फ हेल्दी खाना और वर्कआउट ही पर्याप्त नहीं है, समय-समय पर जरूरी हेल्थ स्क्रीनिंग भी बेहद अहम है।
हाल ही में लाइफस्टाइल एक्सपर्ट और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अनामिका रघुवंशी ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में 1990 से 1997 के बीच जन्मी महिलाओं के लिए कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट की सलाह दी है। अगर आप इस एज ग्रुप में आती हैं, तो ये टेस्ट आपकी मौजूदा सेहत के साथ-साथ भविष्य की परेशानियों से बचाव करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्यों जरूरी हैं समय पर जनरल हेल्थ टेस्ट?
30 की उम्र के आसपास शरीर की चुपचाप बदलती ज़रूरतों को समझना बहुत ज़रूरी है। अगर कोई बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो उसका इलाज आसान होता है। इसलिए नियमित टेस्ट कराना किसी स्मार्ट लाइफस्टाइल डिसीजन से कम नहीं।
डॉ. अनामिका के मुताबिक, नीचे दिए गए 7 सामान्य टेस्ट हर महिला को करवा लेने चाहिए:
कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC): यह टेस्ट शरीर में खून की स्थिति, इंफेक्शन या अन्य स्वास्थ्य संकेतों का पता लगाने में मदद करता है।
फेरिटिन टेस्ट (Iron Stores): शरीर में आयरन स्टोरेज कैसा है, इसका संकेत देता है जिससे एनीमिया जैसी समस्या समय रहते पकड़ी जा सकती है।
विटामिन D लेवल: हड्डियों की ताकत और इम्यून सिस्टम को बनाए रखने में मददगार।
विटामिन B12: इसकी कमी थकान, चिड़चिड़ापन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकती है।
लिपिड प्रोफाइल: इसमें कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जानकारी मिलती है, जो हृदय रोगों से बचाव के लिए जरूरी है।
फास्टिंग ब्लड शुगर / HbA1c: डायबिटीज के खतरे की पहचान के लिए ये टेस्ट बहुत जरूरी है।
थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3/T4): हार्मोनल असंतुलन का सीधा असर वजन, मूड और प्रजनन क्षमता पर पड़ता है।
प्रजनन स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ न करें — ये 5 टेस्ट बेहद ज़रूरी हैं
अक्सर महिलाओं को लगता है कि जब तक वे बच्चे की प्लानिंग नहीं करतीं, तब तक फर्टिलिटी से जुड़े टेस्ट्स की ज़रूरत नहीं है। लेकिन यह सोच खतरनाक हो सकती है। ओवेरियन हेल्थ और हार्मोनल संतुलन को समझना बहुत जरूरी है, चाहे आप फैमिली प्लान कर रही हों या नहीं।
डॉ. रघुवंशी के अनुसार, ये 5 रिप्रोडक्टिव हेल्थ टेस्ट भी 28 से 35 की उम्र के बीच ज़रूर करवा लेने चाहिए:
AMH (एंटी-म्यूलरियन हार्मोन): यह टेस्ट यह दर्शाता है कि आपके ओवेरियन रिज़र्व में कितने अंडे बचे हैं और उनकी गुणवत्ता क्या है।
FSH (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन): मासिक धर्म के तीसरे दिन यह टेस्ट ओवरी के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करता है।
LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन): यह भी तीसरे दिन किया जाता है और ओव्यूलेशन की जानकारी देता है।
एस्ट्राडियोल (Estradiol - E2): हार्मोनल संतुलन को मापने का एक जरूरी टेस्ट।
प्रोलैक्टिन लेवल: यह हार्मोन यदि असंतुलित हो जाए तो पीरियड्स, फर्टिलिटी और ब्रेस्ट हेल्थ पर असर डाल सकता है।
आपकी उम्र और आपकी हेल्थ ज़िम्मेदारी से जुड़ी है
28 से 35 की उम्र वो दौर होता है जब महिलाएं न सिर्फ करियर और परिवार के बीच संतुलन बना रही होती हैं, बल्कि उनका शरीर भी कई बदलावों से गुजर रहा होता है। इन टेस्ट्स को अपनी हेल्थ चेकलिस्ट का हिस्सा बनाना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
ये सभी जांचें सिर्फ बीमारियों की पहचान के लिए नहीं हैं, बल्कि एक हेल्दी और बैलेंस्ड लाइफस्टाइल की ओर कदम बढ़ाने के लिए भी हैं। सही समय पर सही फैसला लेना आपकी फिज़िकल, मेंटल और रिप्रोडक्टिव वेलनेस को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है।
शरीर हमें कई संकेत देता है, लेकिन हर संकेत को समझना आसान नहीं होता। टेस्ट ही एकमात्र तरीका है जिससे आप अपने शरीर के भीतर चल रही गतिविधियों को जान सकते हैं। इसलिए अगर आप 1990 से 1997 के बीच जन्मीं हैं, तो आज ही इन हेल्थ स्क्रीनिंग को शेड्यूल करें और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।














