
व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे रोजाना खाने से क्यों मना किया जाता है? आजकल कई लोग टेबल सॉल्ट की जगह नियमित रूप से सेंधा नमक का उपयोग कर लेते हैं। लेकिन यदि इसे रोज खाया जाए तो यह सिर्फ स्वादिष्ट नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। सेंधा नमक अधिक सेवन से किडनी और हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं कैसे सेंधा नमक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है और व्रत में इसका सेवन क्यों विशेष रूप से किया जाता है।
# ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा
सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा टेबल सॉल्ट की तुलना में कम होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे रोजाना बड़ी मात्रा में सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। लगातार अधिक सेवन करने से शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, जो रक्त वाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर केवल हृदय रोग का कारण नहीं बनता, बल्कि इससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेष रूप से जो लोग पहले से ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे हैं या हृदय रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए सेंधा नमक का अत्यधिक सेवन जोखिम भरा साबित हो सकता है।
इसके अलावा, ज्यादा सोडियम शरीर में पानी की मात्रा को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, तो यह अतिरिक्त पानी को शरीर में रोकता है, जिससे सूजन, ऐंठन और पैरों में फुलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस कारण सेंधा नमक का सीमित और नियंत्रित सेवन ही स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है।
# डिहाइड्रेशन और ब्लॉटिंग की समस्या
सेंधा नमक हल्का कम नमकीन लगता है, इसलिए कई लोग इसे असावधानी से अधिक मात्रा में खा लेते हैं। शरीर में ज्यादा सोडियम जमा होने पर यह पानी को सेल्स के बाहर खींचने लगता है या कभी-कभी शरीर में पानी को इकट्ठा कर देता है, जिससे डिहाइड्रेशन, थकावट, ब्लॉटिंग, सूजन और असुविधा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अत्यधिक सोडियम के कारण ब्लोटिंग सिर्फ पेट में ही नहीं बल्कि पूरे शरीर में सूजन का कारण बन सकती है। पैरों, हाथों और आंखों के आसपास सूजन होना आम बात है। इसके अलावा, शरीर में पानी का असंतुलन होने से मसल्स में ऐंठन, सिरदर्द और कमजोरी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
जो लोग भारी व्यायाम करते हैं, लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहते हैं या पहले से ही शरीर में फ्लूइड इम्बैलेंस से प्रभावित हैं, उन्हें सेंधा नमक का सेवन विशेष रूप से नियंत्रित करना चाहिए। इसके अलावा, ज्यादा सोडियम वाले भोजन के साथ सेंधा नमक का सेवन करने से इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे हार्ट और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
संतुलित पानी की मात्रा बनाए रखने और ब्लॉटिंग से बचने के लिए सेंधा नमक को कम मात्रा में इस्तेमाल करना और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना अत्यंत आवश्यक है।
# थायराइड पर प्रभाव
सेंधा नमक में प्राकृतिक रूप से आयोडीन की मात्रा नगण्य होती है। आयोडीन थायराइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज के लिए बेहद जरूरी है। थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा उत्पादन, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य, हृदय और मांसपेशियों के कामकाज को नियंत्रित करता है। अगर टेबल सॉल्ट पूरी तरह छोड़कर केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाए, तो शरीर में आयोडीन की कमी हो सकती है, जिससे थायराइड संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
आयोडीन की कमी से हाइपोथायराइडिज्म जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं, जिसमें थकावट, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, त्वचा की सूखापन और मानसिक सुस्ती जैसी समस्याएं सामने आती हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से भ्रूण के मस्तिष्क और शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है। बुजुर्गों में आयोडीन की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और ऊर्जा स्तर में गिरावट आ सकती है।
# पाचन संबंधी परेशानियां
ज्यादा सेंधा नमक खाने से पाचन तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। शरीर में सोडियम की अधिकता पेट की एसिडिटी को बढ़ा सकती है, जिससे एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न की समस्या होने लगती है। लंबे समय तक अधिक सेवन से पेट की परतें कमजोर हो सकती हैं, जिससे अल्सर और गैस्ट्रिक इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, अधिक नमक खाने से पानी का संतुलन बिगड़ता है और पाचन तंत्र में सूजन और ब्लॉटिंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इससे कब्ज़, डायरिया और मितली जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। बच्चों और बुजुर्गों में पाचन तंत्र पहले से कमजोर होता है, ऐसे में सेंधा नमक का अत्यधिक सेवन उनके लिए और भी हानिकारक हो सकता है।
इमरजेंसी में या व्रत के दौरान सेंधा नमक का सीमित मात्रा में इस्तेमाल लाभकारी होता है, लेकिन रोजमर्रा के आहार में अधिक सेवन से हाजमा कमजोर पड़ सकता है और पोषण अवशोषण में बाधा आ सकती है।
व्रत में सेंधा नमक खाने के फायदे
# शुद्धता
सेंधा नमक को सबसे शुद्ध और प्राकृतिक नमक माना जाता है। यह समुद्री खानों या पहाड़ी खानों से प्राकृतिक रूप से प्राप्त किया जाता है और इसमें किसी प्रकार के रासायनिक तत्व या एडिटिव्स नहीं मिलाए जाते। व्रत के दौरान कई बार भोजन सरल और हल्का होता है, ऐसे में शुद्ध सेंधा नमक खाने से भोजन का स्वाद बढ़ता है और शरीर को हानिकारक तत्वों से बचाया जा सकता है। शुद्ध नमक का सेवन शरीर के अंदरूनी अंगों और रक्त प्रणाली को भी स्वच्छ रखने में मदद करता है।
# आयुर्वेद में श्रेष्ठ नमक
आयुर्वेद में पांच प्रकार के नमक बताए गए हैं, जिनमें से सुवर्चला लवण यानी सेंधा नमक सबसे प्राकृतिक और शुद्ध माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह नमक ना केवल भोजन का स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण में भी मदद करता है। यह किडनी और लिवर की कार्यप्रणाली को संतुलित रखने में सहायक होता है और शरीर में विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में भी योगदान देता है।
# डाइजेशन में सहायक
व्रत के दौरान कई बार ऐसे आहार लिए जाते हैं जो भारी या कठिन पचने वाले होते हैं। सेंधा नमक की कूलिंग प्रॉपर्टी शरीर को ठंडक प्रदान करती है और पेट की गैस्ट्रिक एंजाइम्स को सक्रिय रखती है। इसका नियमित सीमित सेवन भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या को कम करता है। इसके अलावा, यह भोजन में स्वाद के साथ-साथ पाचन क्रिया को भी संतुलित बनाए रखता है।
# इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखता है
सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा कम और पोटैशियम अधिक होता है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मांसपेशियों की कार्यक्षमता और नाड़ी की गति संतुलित रहती है। व्रत के दौरान अक्सर पानी और अन्य फ्लूइड की कमी हो सकती है, ऐसे में सेंधा नमक शरीर में आवश्यक मिनरल्स का स्तर बनाए रखकर थकान और कमजोरी को कम करता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी योगदान देता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














