
अक्सर लोग मान लेते हैं कि पतला व्यक्ति ज़रूर हेल्दी होगा और थोड़ा मोटा दिखने वाला व्यक्ति अस्वस्थ होगा। लेकिन हेल्थ और फिटनेस एक्सपर्ट्स की राय कुछ और ही है। उनका कहना है कि शरीर का आकार या वजन ही सेहत का सही पैमाना नहीं है। असली सेहत हमारे खानपान, लाइफस्टाइल और शारीरिक एक्टिविटी पर निर्भर करती है।
पतले लोग हमेशा हेल्दी नहीं होते
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कई बार लोग पतले तो दिखते हैं, लेकिन उनकी मसल स्ट्रेंथ, एनर्जी और इम्युनिटी कमजोर होती है। इसे "स्किनी फैट" कहा जाता है। इस स्थिति में बाहर से व्यक्ति पतला लगता है, लेकिन शरीर में फैट जमा रहता है और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर पड़ता है।
हेल्दी रहने की असली पहचान
1. ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल नॉर्मल होना
एक स्वस्थ शरीर में ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर संतुलित होना जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और ब्लड शुगर की असामान्यता (डायबिटीज़) कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, जैसे दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी प्रॉब्लम्स और आंखों की समस्या। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराना और डॉक्टर की सलाह अनुसार नियंत्रण रखना जरूरी है।
2. दिनभर एक्टिव रहने के लिए पर्याप्त एनर्जी होना
सिर्फ नींद पूरी करना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में पर्याप्त एनर्जी होना भी महत्वपूर्ण है। अगर आप दिनभर थकान महसूस करते हैं या जल्दी हार जाते हैं, तो यह स्वास्थ्य के लिए चेतावनी हो सकती है। एनर्जी के लिए सही मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लेना जरूरी है, साथ ही नियमित हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना भी मदद करता है।
3. मजबूत इम्युनिटी ताकि बार-बार बीमार न पड़ें
इम्युनिटी हमारे शरीर की सुरक्षा कवच है। कमजोर इम्युनिटी के कारण सामान्य सर्दी, खांसी या बुखार जैसी समस्याएं बार-बार हो सकती हैं। इसके लिए विटामिन C, D, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार लेना चाहिए। योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम भी इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं।
4. मानसिक स्वास्थ्य संतुलित होना, तनाव और चिंता नियंत्रित रहना
सेहत सिर्फ शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव, चिंता या डिप्रेशन से हार्मोनल असंतुलन और नींद की कमी हो सकती है, जो शरीर पर नकारात्मक असर डालती है। ध्यान, गहरी साँस लेना, शौक और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होना मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।
5. संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शामिल हों
हेल्दी रहने के लिए सिर्फ कम कैलोरी खाना पर्याप्त नहीं है। शरीर को सही पोषण, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। प्रोटीन मसल बिल्डिंग और मरम्मत में मदद करता है, विटामिन और मिनरल्स शरीर के कार्यों को संतुलित रखते हैं। हरी सब्जियां, फल, दलहन, अंडा, दूध और नट्स को अपने आहार में शामिल करें।
अगर ये सभी संकेत ठीक हैं, तो भले ही आपका वजन थोड़ा ज्यादा हो, आप हेल्दी माने जाएंगे।
कब सतर्क रहना जरूरी है
यह समझना जरूरी है कि अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास जमा होने वाला फैट, स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। इसे विसरल फैट कहा जाता है, जो आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है और दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, स्ट्रोक और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का जोखिम बढ़ाता है।
सिर्फ वजन ही नहीं, बल्कि बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और कमर-हिप अनुपात भी हेल्थ का महत्वपूर्ण पैमाना हैं। पुरुषों में कमर 40 इंच से अधिक और महिलाओं में 35 इंच से अधिक होने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य जोखिम माने जाते हैं। इसके अलावा, यदि वजन अचानक बढ़ रहा है या लगातार पेट बढ़ रहा है, तो यह किसी हार्मोनल या मेटाबॉलिक समस्या का संकेत भी हो सकता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल स्तर पर नजर रखना, सतर्क रहने के लिए आवश्यक कदम हैं। इसके साथ ही, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्ट्रेस मैनेजमेंट से वजन नियंत्रण में रखा जा सकता है।
संतुलन में है असली सेहत
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि असली हेल्थ का मतलब केवल वजन नहीं बल्कि संतुलित शरीर, सही खानपान और सक्रिय जीवनशैली है। अत्यधिक पतलापन या अनियंत्रित मोटापा दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं।
सही संतुलन के लिए:
नियमित एक्सरसाइज: हफ्ते में कम से कम 4-5 दिन 30-45 मिनट की हल्की या मध्यम व्यायाम जैसे वॉकिंग, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या कार्डियो।
संतुलित आहार: प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर भोजन, और प्रोसेस्ड फूड, अधिक शुगर व तेल का कम सेवन।
पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की नींद, जो शरीर की रिकवरी और मेटाबॉलिज़्म के लिए जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य: स्ट्रेस कम करने के लिए मेडिटेशन, शौक या सोशल एक्टिविटी।
इन आदतों से कोई भी व्यक्ति फिट और हेल्दी रह सकता है, चाहे उसका वजन थोड़ा ज्यादा ही क्यों न हो। असली हेल्थ शरीर के अंदर की मजबूती और जीवनशैली से तय होती है, न कि सिर्फ तराजू पर दिखाई देने वाले नंबर से।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














