
हमारा अधिकांश समय सोने में ही बीतता है और इस दौरान हमारा चेहरा और बाल सीधे तकिए के संपर्क में रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तकिए पर आप आराम से सोते हैं, वह वास्तव में कितना स्वच्छ है? विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी आपका तकिया टॉयलेट सीट से भी अधिक गंदा हो सकता है।
तकियों में जमा गंदगी और माइक्रोब्स
डॉक्टर्स बताते हैं कि समय के साथ तकिए में पसीना, धूल, त्वचा की मृत कोशिकाएं, तेल और नमी इकट्ठा हो जाती हैं। यह नमी और गंदगी बैक्टीरिया और फंगस के लिए आदर्श स्थल बन जाती है।
तकिए की परतों में पाए जाने वाले कीटाणु और जीवाणु
बैक्टीरिया:
तकियों में समय के साथ स्टेफिलोकोकस और ई.कोलाई जैसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ये बैक्टीरिया मुख्य रूप से त्वचा की मृत कोशिकाओं, पसीने और तेल के जमा होने से बढ़ते हैं। इनके कारण त्वचा पर मुंहासे, रैशेज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में ये संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं और चेहरे, गर्दन या सिर पर फोड़े और जलन का कारण बन सकते हैं।
फंगस:
पसीना और नमी तकिए के अंदर फंगस के लिए आदर्श वातावरण बनाते हैं। फंगस की उपस्थिति न केवल त्वचा पर दाने या खुजली पैदा कर सकती है, बल्कि यह सांस संबंधी परेशानियों जैसे अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस को भी बढ़ा सकती है। लंबे समय तक गंदे तकिए पर सोने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
डस्ट माइट्स:
डस्ट माइट्स छोटे सूक्ष्म जीव हैं जो मुख्य रूप से मृत त्वचा कोशिकाओं पर जीवित रहते हैं। ये तकिए और बेडशीट में आसानी से पनप जाते हैं। इनके कारण छींक, नाक बहना, आंखों में जलन, एलर्जी और गंभीर अस्थमा के लक्षण भी बढ़ सकते हैं। डस्ट माइट्स की उपस्थिति विशेष रूप से उन लोगों के लिए खतरनाक होती है जिन्हें पहले से एलर्जी या श्वसन समस्याएं हैं।
टॉयलेट सीट से ज्यादा गंदा क्यों बनता है तकिया
लोग टॉयलेट सीट को नियमित रूप से साफ करते हैं, लेकिन तकिए की सफाई महीनों तक नहीं होती। लगातार इस्तेमाल से इसमें पसीना, तेल और धूल जमा हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं।
गंदे तकिए के स्वास्थ्य पर प्रभाव
त्वचा संबंधी समस्याएं: मुंहासे, रैशेज और खुजली हो सकती है।
सांस की दिक्कतें: धूल और फंगस अस्थमा और एलर्जी को बढ़ा सकते हैं।
नींद और थकान: गंदे तकिए पर सोने से नींद की गुणवत्ता घटती है, जिससे दिनभर थकान और सिरदर्द महसूस होता है।
तकिए को साफ रखने के आसान उपाय
तकिए का कवर हर हफ्ते बदलें: कवर सबसे पहले धूल और बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, इसलिए इसे नियमित धोना जरूरी है।
तकिए को धूप में रखें: सूर्य की UV किरणें बैक्टीरिया और फंगस को मारने में मदद करती हैं। महीने में कम से कम एक बार तकिए को धूप में रखें।
वॉशेबल तकिया चुनें: ऐसे तकिए का उपयोग करें जिन्हें मशीन में धोया जा सके, ताकि अंदर जमा गंदगी भी पूरी तरह साफ हो सके।














