
मां बनना एक अविश्वसनीय अनुभव होता है – भावनाओं से भरा, नई जिम्मेदारियों से लदा और चुनौतियों से भरा हुआ। खासकर ब्रेस्टफीडिंग, जो जितनी स्वाभाविक प्रक्रिया है, उतनी ही नई माताओं के लिए कभी-कभी जटिल भी साबित हो सकती है। अगर सही जानकारी समय पर मिल जाए, तो यह सफर काफी आसान हो सकता है। तो चलिए आइए जानते हैं इन 9 जरूरी बातों के बारे में, जो आपकी इस नई यात्रा को सहज बना सकती हैं।
1. बच्चे को अपने करीब रखें
चाहे डिलीवरी नॉर्मल हो या सी-सेक्शन, अपने नवजात को पास रखने की कोशिश करें। स्किन-टू-स्किन कॉन्टेक्ट न केवल मां-बच्चे के बीच गहरा जुड़ाव बनाता है, बल्कि इससे मिल्क प्रोडक्शन को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चे का स्पर्श हार्मोनल बदलाव लाकर स्तनपान को प्रभावी बनाने में मदद करता है।
2. जन्म के पहले घंटे में ही स्तनपान कराना शुरू करें
शुरुआती घंटों में बच्चे को दूध पिलाने से मिल्क फ्लो बेहतर होता है और बच्चा मां से जल्दी जुड़ता है। इस आदत से ब्रेस्टफीडिंग की नींव मजबूत होती है और आगे की फीडिंग आसान हो जाती है।
3. बच्चे की भूख के अनुसार फीड कराएं
समय निर्धारित करने के बजाय बच्चे की मांग पर फीड कराना ज़्यादा सही है। बच्चा जब भी भूखा होता है, तो कुछ खास संकेत देता है – जैसे मुंह चलाना, मुट्ठी चूसना या रोना। नवजात आमतौर पर दिन में 8 से 12 बार फीड कर सकता है।
4. लैचिंग की तकनीक पर ध्यान दें
बच्चे को सही तरीके से स्तन पकड़वाना बेहद ज़रूरी है। अगर निप्पल ठीक से मुंह में नहीं आ रहा है, तो मां को दर्द, जलन और घाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, दूध की आपूर्ति भी सही से नहीं हो पाएगी।
5. ये संकेत पहचानें कि बच्चा भरपूर दूध पी रहा है या नहीं
अगर बच्चा नियमित रूप से पेशाब और मल कर रहा है, उसका वज़न बढ़ रहा है और फीडिंग के समय दूध निगलने की आवाज़ें सुनाई देती हैं, तो समझिए कि वह पर्याप्त दूध ले रहा है।
6. खुद को हाइड्रेटेड और पोषित रखें
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां के शरीर को अधिक पानी और ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इसलिए ढेर सारा पानी पीएं और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लें – जैसे फल, दालें, दूध, हरी सब्ज़ियां आदि।
7. आर्टिफिशियल निप्पल देने से बचें
बहुत जल्दी बोतल या पैसिफायर देने से बच्चे की नैचुरल फीडिंग आदतें बिगड़ सकती हैं। इससे बच्चे को स्तन से दूध पीने में परेशानी होती है और दूध की मात्रा भी घट सकती है।
8. प्रोफेशनल मदद लेने में हिचकें नहीं
अगर ब्रेस्टफीडिंग में कोई समस्या हो रही है – जैसे दूध कम आना, दर्द होना या बच्चा लैच न कर पाना – तो लेक्टेशन कंसल्टेंट या डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। शुरुआती मदद आगे बड़ी परेशानियों से बचा सकती है।
9. धैर्य और समझदारी रखें
ब्रेस्टफीडिंग हर मां-बच्चे के लिए एक नया अनुभव होता है। कभी-कभी बच्चा फीड नहीं कर पाता या मां को तकलीफ होती है। ऐसे में निराश न हों, थोड़ा समय लें, गहरी सांस लें और दोबारा प्रयास करें। यह प्रक्रिया अभ्यास से बेहतर होती जाती है।
सशक्त शुरुआत के लिए सही जानकारी
ब्रेस्टफीडिंग मां और शिशु के बीच गहरा रिश्ता बनाने का पहला कदम होता है। यह एक नेचुरल लेकिन सिखने योग्य कला है। यदि नई माताएं धैर्य, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन के साथ इसे अपनाएं, तो यह अनुभव जीवनभर की खूबसूरत यादों में बदल सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














