
बरसात के मौसम में सड़क किनारे भुट्टे की महक और उसका गरमागरम स्वाद किसी को भी लुभा सकता है। नमक और नींबू की हल्की परत चढ़ाकर सेंका गया मक्का न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन और मिनरल्स सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। यह पाचन को बेहतर करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूती देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों के लिए यह स्वादिष्ट स्नैक नुकसान का कारण भी बन सकता है?
1. डायबिटीज के मरीज
मक्के में प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इसे खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज तेजी से अवशोषित होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक वृद्धि हो सकती है। खासकर जब भुट्टा उबालकर या भूनकर बिना किसी प्रोटीन या हेल्दी फैट के साथ खाया जाता है, तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स और भी ज्यादा असर डालता है।
अगर डायबिटीज के मरीज भुट्टा खाना चाहें, तो इसे सीमित मात्रा में, प्रोटीन जैसे दही, पनीर या अंकुरित दाल के साथ लें, ताकि शुगर लेवल का स्पाइक कम हो सके। साथ ही, मीठा मक्का (Sweet Corn) की जगह देसी मक्का का चुनाव बेहतर रहेगा, क्योंकि उसमें शुगर अपेक्षाकृत कम होती है। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करने वाले लोग कभी-कभी नियंत्रित मात्रा में भुट्टा ले सकते हैं, लेकिन रोज़ाना का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए।
2. पाचन समस्याओं से जूझ रहे लोग
भुट्टा फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो सामान्य परिस्थितियों में पाचन के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन ज्यादा फाइबर का सेवन उन लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है, जिन्हें पहले से पेट फूलना, गैस, कब्ज़ या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याएं हैं। मक्के का बाहरी छिलका सेल्यूलोज़ (Cellulose) से बना होता है, जिसे पचाना इंसानी पाचन तंत्र के लिए कठिन है। यही कारण है कि कई बार यह आंशिक रूप से अपचित रह जाता है और पेट में गैस या ऐंठन का कारण बनता है। अगर आपको एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या है, तो भुट्टा खाने के बाद लक्षण और भी बढ़ सकते हैं। इन स्थितियों में मक्का खाने से पहले उसे अच्छी तरह उबालकर या लंबे समय तक पकाकर फाइबर को थोड़ा नरम करना और साथ में पर्याप्त पानी पीना पाचन को आसान बना सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों को बार-बार पेट से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उन्हें भुट्टा खाने की मात्रा सीमित रखनी चाहिए और रात के समय इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
3. मक्के से एलर्जी वाले लोग
कुछ लोगों में मक्के (कॉर्न) के प्रति प्राकृतिक संवेदनशीलता या एलर्जी पाई जाती है, जो हल्के से लेकर गंभीर लक्षण पैदा कर सकती है। भुट्टा खाने के कुछ समय बाद त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, सूजन, होंठ या पलकों में फुलाव, और यहां तक कि सांस लेने में कठिनाई जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं। यह एलर्जी मुख्य रूप से मक्के के प्रोटीन से ट्रिगर होती है, और कभी-कभी इसमें मौजूद परागकण (Corn Pollen) भी समस्या का कारण बन सकते हैं। गंभीर मामलों में यह एनाफिलैक्टिक रिएक्शन (Anaphylaxis) तक का रूप ले सकती है, जो मेडिकल इमरजेंसी है। अगर आपको पहले से मक्के या उससे बने किसी उत्पाद—जैसे कॉर्नफ्लोर, पॉपकॉर्न, या स्वीट कॉर्न—से एलर्जी का अनुभव है, तो भुट्टा खाने से पहले डॉक्टर या एलर्जिस्ट से सलाह जरूर लें। कई बार एलर्जी टेस्ट करवाना भी फायदेमंद साबित होता है, ताकि पता चल सके कि शरीर की प्रतिक्रिया किस घटक के प्रति है।
4. वजन कम करने वाले लोग
भुट्टा स्वाद और टेक्सचर में लाजवाब है, लेकिन यह कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट से भी भरपूर होता है। एक मध्यम आकार के भुट्टे में लगभग 100–120 कैलोरी और पर्याप्त मात्रा में स्टार्च होता है, जो शरीर में जल्दी ग्लूकोज में बदल जाता है। जो लोग वजन घटाने के लिए कैलोरी डेफिसिट डाइट फॉलो कर रहे हैं, उनके लिए बार-बार भुट्टा खाना अनजाने में कुल कैलोरी इनटेक बढ़ा सकता है, जिससे वेट लॉस की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। अगर आपको भुट्टा बहुत पसंद है और फिर भी डाइट में शामिल करना चाहते हैं, तो इसे बिना मक्खन, नमक या अतिरिक्त मसालों के हल्का भूनकर या उबालकर खाएं। साथ ही, इसकी मात्रा सीमित रखें और इसे प्रोटीन और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों—जैसे उबले अंडे, दही, या सलाद—के साथ खाएं, ताकि ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी न हो और लंबे समय तक पेट भरा रहे।
5. किडनी के मरीज
मक्का पोटैशियम और फॉस्फोरस से भरपूर होता है, जो स्वस्थ लोगों के लिए जरूरी मिनरल्स हैं, लेकिन किडनी रोगियों के लिए ये हानिकारक साबित हो सकते हैं। जब किडनी पूरी क्षमता से काम नहीं करती, तो शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम और फॉस्फोरस को बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। इससे रक्त में पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है (हाइपरकैलीमिया), जो मांसपेशियों की कमजोरी, अनियमित दिल की धड़कन, और गंभीर मामलों में हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। इसी तरह, ज्यादा फॉस्फोरस हड्डियों को कमजोर कर सकता है और कैल्शियम लेवल को असंतुलित कर सकता है। किडनी रोगियों को भुट्टे या उससे बने उत्पादों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका मिनरल इनटेक डॉक्टर द्वारा निर्धारित सीमा में हो। किडनी डाइट में बदलाव करने से पहले नेफ्रोलॉजिस्ट या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
6. दिल के मरीज
भुट्टा खुद में हार्ट के लिए बहुत बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन जिस तरीके से इसे तैयार किया जाता है, वही समस्या पैदा कर सकता है। भुट्टे पर ज्यादा मात्रा में मक्खन, नमक, या चीज डालने से इसकी कैलोरी और सोडियम कंटेंट काफी बढ़ जाता है। अत्यधिक सोडियम ब्लड प्रेशर को तेजी से बढ़ा सकता है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना हो जाता है। वहीं, मक्खन या चीज से आने वाला सैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ाकर धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है। हार्ट पेशेंट्स को भुट्टे का आनंद लेने के लिए इसे उबालकर या बिना तेल के हल्का भूनकर, सिर्फ हल्का सा नींबू और चुटकी भर मसाले के साथ खाना चाहिए। इस तरह वे स्वाद भी ले सकेंगे और दिल की सेहत भी बरकरार रख पाएंगे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














