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आयुर्वेद के अनुसार नाभि में तेल लगाना है फायदेमंद, जानिए किस तेल का इस्तेमाल पहुंचा सकता है सबसे ज्यादा लाभ

आयुर्वेद के अनुसार नाभि में सही तेल लगाने से त्वचा, पाचन, नींद और शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं। जानें किस समस्या में कौन-सा तेल उपयोगी माना जाता है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 05 Aug 2026 12:46:41

आयुर्वेद के अनुसार नाभि में तेल लगाना है फायदेमंद, जानिए किस तेल का इस्तेमाल पहुंचा सकता है सबसे ज्यादा लाभ

आयुर्वेद में नाभि को शरीर का बेहद महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है। मान्यता है कि यह शरीर की ऊर्जा, पोषण और कई जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ा प्रमुख बिंदु होती है। गर्भावस्था के दौरान शिशु को मां से सभी आवश्यक पोषक तत्व नाभि के माध्यम से ही प्राप्त होते हैं। आयुर्वेदिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि शरीर की हजारों नसों का संबंध नाभि क्षेत्र से माना जाता है। इसी कारण नाभि में तेल लगाने की पारंपरिक प्रक्रिया, जिसे 'नाभि पूरण' या 'पेचोटी थेरेपी' कहा जाता है, लंबे समय से अपनाई जाती रही है। माना जाता है कि सही तरीके से और उपयुक्त तेल का उपयोग करने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि नाभि में तेल लगाने के संभावित फायदे क्या हैं और इसके लिए कौन-सा तेल उपयुक्त माना जाता है।

नाभि में तेल लगाने के संभावित फायदे

त्वचा को नमी देने और बालों की देखभाल में सहायक


आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से नाभि में तेल लगाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे फटे होंठ, रूखी त्वचा और एड़ियों के फटने जैसी समस्याओं में राहत महसूस हो सकती है। बादाम का तेल त्वचा को पोषण देने के लिए जाना जाता है, जबकि नीम का तेल त्वचा से जुड़ी परेशानियों, जैसे मुंहासे और दाग-धब्बों में उपयोगी माना जाता है। वहीं नारियल का तेल बालों को पोषण देने और उनकी चमक बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मददगार

कुछ आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरसों के तेल या हींग मिले तेल का हल्का प्रयोग नाभि पर करने से गैस, पेट फूलना, कब्ज और हल्के पेट दर्द जैसी समस्याओं में आराम मिल सकता है। यह पाचन प्रक्रिया को संतुलित रखने और भोजन को बेहतर तरीके से पचाने में सहयोगी माना जाता है।

तनाव कम करने और अच्छी नींद में सहायक

रात को सोने से पहले नाभि में कुछ बूंदें तेल लगाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। माना जाता है कि इससे शरीर को आराम मिलता है और तंत्रिका तंत्र को शांति महसूस होती है। इससे मानसिक तनाव और बेचैनी कम हो सकती है तथा अच्छी और गहरी नींद लेने में सहायता मिल सकती है।

जोड़ों के दर्द और वात संबंधी समस्याओं में राहत

सर्दियों के मौसम में तिल या सरसों का तेल नाभि में लगाने को आयुर्वेद में लाभकारी बताया गया है। यह शरीर की अकड़न कम करने और जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचाने में सहायक माना जाता है। महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाली पेट और कमर की ऐंठन में भी तिल के तेल का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।

हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार नाभि में तेल लगाने से शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसे पुरुषों और महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि यह आंखों के सूखेपन को कम करने और आंखों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है।

नाभि में लगाने के लिए कौन-सा तेल चुनें?

जरूरत और उद्देश्य के अनुसार अलग-अलग प्रकार के तेलों का उपयोग किया जा सकता है।

सरसों का तेल
बादाम का तेल
नीम का तेल
तिल का तेल
नारियल का तेल
देसी घी

ध्यान दें: नाभि में तेल लगाने के ये लाभ मुख्य रूप से पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन दावों के समर्थन में सभी लाभों के लिए पर्याप्त आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। यदि आपको कोई त्वचा रोग, एलर्जी, संक्रमण या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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