मुंबई में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि SIR के दौरान जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके परिवार के तीन सदस्यों के नाम फाइनल मतदाता सूची से हटा दिए गए। प्रियंका चतुर्वेदी के मुताबिक, अब मुंबई की अंतिम वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए उन्हें दोबारा दस्तावेज जमा करने और व्यक्तिगत रूप से चुनाव कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके, उनके पति और बेटे के सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए गए थे। इसके बाद शुरुआती वोटर लिस्ट में तीनों के नाम दिखाई दिए थे। उनका दावा है कि बाद में जारी फाइनल वोटर लिस्ट में उनके परिवार के तीनों नाम नहीं हैं।
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि अब नाम जुड़वाने के लिए उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के साथ खुद चुनाव कार्यालय पहुंचना होगा। प्रियंका चतुर्वेदी ने इसी संदर्भ में कहा कि वह मुंबई के चुनाव कार्यालय में लगने वाली लाइन में मिलेंगी।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों वाली खबर पर भी सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने SIR प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आई उस खबर पर भी सवाल उठाए, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया था।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। प्रियंका चतुर्वेदी के मुताबिक, पिछले 10 महीनों के दौरान संधू और जोशी ने SIR को लागू करने के दौरान आयोग की ओर से उठाए गए कदमों पर 14 बार आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने से जुड़े कुछ मामलों में उन्हें अंधेरे में रखे जाने की बात कही है। प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर "अनधिकृत और गैरकानूनी" बताया है।
वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण पर भी उठाया सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने बयान में मतदाता डेटाबेस के एक्सेस को लेकर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि वोटर डेटाबेस तक पहुंच को दिल्ली में केंद्रीकृत किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका को नजरअंदाज किए जाने की बात भी चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में सामने आई है। हालांकि, ये बातें प्रियंका चतुर्वेदी की ओर से रखे गए दावों और उनके द्वारा संदर्भित रिपोर्ट के आधार पर कही गई हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
इन आरोपों और आपत्तियों का हवाला देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि सामने आए खुलासे से चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी समस्याएं सार्वजनिक हुई हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति की मर्जी से चलने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह नियमों के आधार पर काम करने वाली वैधानिक संस्था है। उनके अनुसार, आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची और चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखना है।
उन्होंने आगे कहा कि संधू और विवेक जोशी की ओर से उठाई गई आपत्तियों को देखते हुए उन्हें लगता है कि इस प्रक्रिया में वह स्थिति नहीं रही, जो चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के अनुरूप होनी चाहिए।
इस तरह प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ओर अपने परिवार के नाम फाइनल वोटर लिस्ट से हटाए जाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर SIR की प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।













