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The Ba***ds of Bollywood: एक शानदार कहानी, लेकिन गालियों की भरमार ने बिगाड़ा स्वाद, टूटती दिखीं शाहरुख खान से जुड़ी उम्मीदें

नेटफ्लिक्स पर इस सीरीज की स्ट्रीमिंग होते ही अपने पूरे परिवार के साथ देखना शुरू किया। लेकिन चंद मिनटों के बाद इसे देखते हुए शर्मिन्दगी का अहसास हुआ। मैं और मेरी पत्नी तुरन्त उठकर दूसरे कमरे में चले गए और बच्चे उस सीरीज को देखते रहे।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Mon, 22 Sept 2025 1:45:56

The Ba***ds of Bollywood: एक शानदार कहानी, लेकिन गालियों की भरमार ने बिगाड़ा स्वाद, टूटती दिखीं शाहरुख खान से जुड़ी उम्मीदें

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की पहली निर्देशकीय सीरीज का बहुत बेसब्री से इंतजार था। नेटफ्लिक्स पर इस सीरीज की स्ट्रीमिंग होते ही अपने पूरे परिवार के साथ देखना शुरू किया। लेकिन चंद मिनटों के बाद इसे देखते हुए शर्मिन्दगी का अहसास हुआ। मैं और मेरी पत्नी तुरन्त उठकर दूसरे कमरे में चले गए और बच्चे उस सीरीज को देखते रहे। यह कदम हमें इस सीरीज में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों को लेकर उठाना पड़ा। जिस तरह से आर्यन खान ने अपनी इस सीरीज में माँ, बहन को लेकर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया है उससे मन में यह सवाल उठा कि क्या पूरा का पूरा फिल्म उद्योग आम बोलचाल में इसी तरह से बात करता है।

आर्यन खान का डायरेक्टोरियल डेब्यू The Ba**ds of Bollywood* नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होते ही सुर्खियों में आ गया है। दर्शकों ने इसके डार्क ह्यूमर, अलग ट्रीटमेंट और स्टार-कास्ट की परफॉर्मेंस को सराहा है। लेकिन जितनी तारीफें हो रही हैं, उतनी ही आलोचना भी होनी चाहिए — और हो रही है। वजह है इस शो में बेहिसाब और अनावश्यक गालियों का इस्तेमाल, जो बार-बार कहानी से ध्यान भटकाता है और कई बार उसे अश्लीलता की सीमा तक ले जाता है।

शो की कहानी में कोई दो राय नहीं कि वो समकालीन बॉलीवुड के यथार्थ को दिखाने की एक ईमानदार कोशिश करती है। इसमें एक स्ट्रगलर की आंखों से इंडस्ट्री की चमक-दमक, अंधेरा, झूठ और चालाकी को दिखाया गया है। लक्ष्य ने आसमान सिंह के किरदार को बखूबी जिया है, वहीं राघव जुयाल ने परवेज़ के रूप में इमोशनल और फनी दोनों रंग बिखेरे हैं। इमरान हाशमी का कैमियो और राघव का 'कहो ना कहो' वाला सीन यादगार बन पड़ा है। लेकिन इन सभी खूबसूरत पहलुओं के बीच अगर कुछ सबसे ज्यादा खटकता है, तो वह है— अश्लील और लगातार इस्तेमाल होने वाली गालियां, जिनका कोई ठोस नाटकीय उद्देश्य नज़र नहीं आता।

इस शो को शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस Red Chillies Entertainment ने प्रोड्यूस किया है। शाहरुख, जो पिछले तीन दशकों से भारतीय सिनेमा का चेहरा रहे हैं, उनसे हमेशा एक ऊंची सोच, ज़िम्मेदारी और सिनेमाई समझ की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने 90 के दशक में जब रोमांस को नई परिभाषा दी, तो उन्हें 'किंग ऑफ रोमांस' का दर्जा मिला। जब उन्होंने Swades, Chak De! India या My Name is Khan जैसी फिल्में कीं, तब उन्होंने समाज के गंभीर मुद्दों पर भी बात की। ऐसे में जब उनकी ही कंपनी से जुड़ा एक शो इतनी मात्रा में गालियों को "कूल" या "रियल" बताकर परोसता है, तो यह दर्शकों की उन उम्मीदों को ठेस पहुंचाता है, जो एक जिम्मेदार फिल्मकार और कलाकार से जुड़ी होती हैं।

इस शो को शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस Red Chillies Entertainment ने प्रोड्यूस किया है। शाहरुख, जो पिछले तीन दशकों से भारतीय सिनेमा का चेहरा रहे हैं, उनसे हमेशा एक ऊंची सोच, ज़िम्मेदारी और सिनेमाई समझ की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने 90 के दशक में जब रोमांस को नई परिभाषा दी, तो उन्हें 'किंग ऑफ रोमांस' का दर्जा मिला। जब उन्होंने Swades, Chak De! India या My Name is Khan जैसी फिल्में कीं, तब उन्होंने समाज के गंभीर मुद्दों पर भी बात की। ऐसे में जब उनकी ही कंपनी से जुड़ा एक शो इतनी मात्रा में गालियों को "कूल" या "रियल" बताकर परोसता है, तो यह दर्शकों की उन उम्मीदों को ठेस पहुंचाता है, जो एक जिम्मेदार फिल्मकार और कलाकार से जुड़ी होती हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि आज का यथार्थ पहले से ज़्यादा कड़वा और नग्न है, लेकिन क्या हर कड़वाहट को गालियों के ज़रिए ही दिखाना ज़रूरी है? क्या कहानी की सच्चाई और किरदारों की ग्रे सच्चाई को गालीबाज़ी से ही विश्वसनीय बनाया जा सकता है? इस सवाल पर विचार ज़रूरी है, क्योंकि कहीं न कहीं ये ट्रेंड अब एक आसान रास्ता बनता जा रहा है — कंटेंट में गंभीरता की कमी को गालियों से ढकने की कोशिश।

आर्यन खान के निर्देशन की बात करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने पहले ही प्रोजेक्ट में खुद को एक संवेदनशील और डिटेल-ओरिएंटेड फिल्ममेकर के रूप में साबित किया है। उनकी नज़र सटीक है, उनका विज़न अलग है, और उन्होंने शो में कलाकारों से बेहतरीन काम लिया है। लेकिन बतौर निर्देशक यह उनकी जिम्मेदारी भी थी कि वो भाषा के स्तर को लेकर थोड़ी और जागरूकता दिखाते। विशेष रूप से तब जब उनकी टीम और बैनर से जुड़े शाहरुख खान जैसे अभिनेता से जुड़ी एक नैतिक और सांस्कृतिक उम्मीद पहले से मौजूद हो।

इसमें कोई संदेह नहीं कि The Ba**ds of Bollywood* कई मायनों में एक बेहतरीन सीरीज है — इसकी कहानी, निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी और परफॉर्मेंस सब कुछ उम्दा है। लेकिन भाषा की अशालीनता इसका सबसे बड़ा माइनस बनकर उभरी है। यह वह दाग है जो इस चमकते शो की चमक को धुंधला कर देता है।

आशा है कि आर्यन खान भविष्य में अपने निर्देशन में इस संतुलन को बेहतर तरीके से साधेंगे — जहां यथार्थ हो, साहस हो, लेकिन साथ में एक संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी भी जो आज के दर्शक का भरोसा जीत सके। और शाहरुख खान जैसे अभिनेता, जिनकी पहचान तीन पीढ़ियों की सिने-यात्रा से जुड़ी है, उनसे जुड़ी प्रोडक्शन कंपनियों से हम उम्मीद करेंगे कि वे न केवल प्रयोग करें, बल्कि दिशा भी दें।

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