हिन्दी सिने संसार में कई अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय से दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है। गुजरे जमाने की अभिनेत्रियों में शामिल रही वहीदा रहमान, मधुबाला, नूतन, हेमा मालिनी, आशा पारिख, नंदा, रेखा, वैजयन्ती माला ऐसी अभिनेत्रियाँ रही हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर अपने बूते फिल्मों को सफल बनाने में सफलता प्राप्त की है। इसी तरह की अभिनेत्रियों में अस्सी के दशक में एक अभिनेत्री शामिल हुई जिसने न केवल अपने अभिनय से बल्कि अपनी नृत्य शैली के साथ-साथ अपनी सुन्दरता से दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। एक समय तो ऐसा भी आया जब बड़े-बड़े नायक उनके साथ काम करने को तत्पर रहते थे। इनमें हिन्दी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन भी शामिल रहे हैं। इस अभिनेत्री का क्रेज आज भी कम नहीं हो रहा। इनका स्टारडम बॉलीवुड सुपरस्टार्स से भी ज्यादा रहा। दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी उनकी लेगेसी जिंदा है।
भारत की नंबर 1 स्टार कहलाने वाली इस एक्ट्रेस ने अपने शानदार किरदारों से लोगों का दिल जीता। आइकॉनिक रोल्स ने इनकी भूमिकाओं को यादगार बना दिया। आज एक्ट्रेस की पुण्यतिथि है और इस मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। एक्ट्रेस की मौत ने हर किसी को हिला दिया था और इनकी मौत की गुत्थी आज भी नहीं सुलझ पाई है। हमें उम्मीद है हमारे पाठकों ने इस अभिनेत्री को पहचान लिया होगा। अगर नहीं तो हम आपको बता रहे हैं कि वो अभिनेत्री और कोई नहीं स्वर्गीय श्रीदेवी हैं।
यह अभिनेत्री उस दौर में भी अकेले के दम पर फिल्में चलाती थी, जब मल्टीस्टारर का दौर था। कई फिल्म मेकर्स के लिए लेडी लक बनने वाली इस अभिनेत्री का नाम श्रीदेवी है। 50 साल के लंबे करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर उन्होंने बड़े-बड़े सितारों को भी पीछे छोड़ दिया।
श्रीदेवी का जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपट्टी में 13 अगस्त, 1963 को हुआ। छोटी सी उम्र में ही श्रीदेवी ने एक्टिंग शुरू कर दी। महज चार साल की उम्र में ही श्रीदेवी फिल्मों में काम करने लगीं। तमिल फिल्म ‘कंधन करुणई’ में वो चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में नजर आईं। हिन्दी फिल्मों में श्रीदेवी ने वर्ष 1975 में प्रदर्शित हुई फिल्म जूली में नजर आईं, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री लक्ष्मी की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के प्रदर्शन के ठीक 4 साल बाद उन्होंने बतौर नायिका हिन्दी फिल्मों में सोलहवां सावन से कदम रखा था, लेकिन यह फिल्म असफल रही। इसके बाद वे दक्षिण भारत की फिल्मों में व्यस्त हो गईं जहाँ उन्होंने स्टारडम की नई परिभाषा लिखी।
वर्ष 1983 में श्रीदेवी को हिन्दी फिल्मों में फिर से परिचित कराया गया। इस बार वे दक्षिण भारतीय निर्माता निर्देशक द्वारा हिन्दी में बनाई गई फिल्म हिम्मतवाला में जितेन्द्र के साथ नजर आई। हिम्मतवाला 1983 की ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई, जिसने श्रीदेवी को हिन्दी फिल्मों स्थायी जमीन प्रदान की।
80 और 90 के दशक में बॉलीवुड में श्रीदेवी का जादू इस कदर चला कि न उनके आगे कोई था और न उनके पीछे। उनके साथ काम करने अभिनेता घबराते थे। फिर एक दौर ऐसा आया जब श्रीदेवी न सिर्फ हिन्दी सिनेमा की सबसे महंगी हीरोइन थीं, बल्कि वो अपने को-एक्टर्स से भी ज्यादा फीस लेती थीं। लंबे फिल्मी करियर में श्रीदेवी ने 300 फिल्मों काम किया और 1996 में प्रोड्यूर बोनी कपूर से शादी की, जिसके बाद वो खुशी और जाह्नवी की मां बनीं। आखिरी बार एक्ट्रेस 'मॉम' में नजर आई थीं।
मौत को लेकर हुए कई दावे
श्रीदेवी की 2018 में दुबई में मौत हो गई। शुरू में उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि वो बाथटब में डूब कर मर गई थीं। उनकी मौत की खबर ने लोगों को हैरान किया और उनकी मौत लंबे वक्त तक मिस्ट्री बनी रही। आज भी लोग नहीं समझ पाए हैं कि उनकी मौत कैसे हुई। कई साल पहले केरल के डीजीपी ऋषिराज सिंह ने दावा किया कि अभिनेत्री की मौत नहीं हत्या हुई है। श्रीदेवी अपने भतीजे मोहित मारवा की शादी में शामिल होने के लिए दुबई गई थीं और इसी दौरान उनकी मौत हो गई थी। तमाम दावों के बाद परिवार और मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने यही कहा कि मृत्यु दुर्घटनावश हुई थी।