
नई दिल्ली में 23 सितम्बर का दिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया, जहां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2023 का आयोजन विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम न सिर्फ उन कलाकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं का सम्मान था, जिन्होंने वर्ष 2023 में रिलीज हुई फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता, बल्कि यह उन क्षणों का भी साक्षी बना जिनका इंतजार लंबे समय से था। इनमें सबसे खास रहा, बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान को उनके करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना।
33 वर्षों के लंबे और चमकदार करियर में दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्मों और सैकड़ों अवॉर्ड्स के बाद, शाहरुख को आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। उन्हें यह अवॉर्ड फिल्म ‘जवान’ में दमदार अभिनय के लिए प्रदान किया गया, जिसे उन्होंने निर्देशक एटली के साथ मिलकर गहराई और ऊर्जा से जीवंत किया। खास बात यह भी रही कि यह सम्मान विक्रांत मैसी के साथ साझा किया गया, जिन्होंने फिल्म ‘12वीं फेल’ में अपने संवेदनशील और सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। विक्रांत के लिए यह उपलब्धि उनकी मेहनत और भूमिकाओं में गहराई लाने की निरंतर कोशिश का प्रमाण है।
#WATCH | Delhi: President Droupadi Murmu confers Actor Mohanlal with the Dadasaheb Phalke Award, Indian cinema`s highest recognition at the 71st National Film Awards.
— ANI (@ANI) September 23, 2025
(Source: DD News) pic.twitter.com/JvclJ6H49g
दूसरी ओर, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया। मोहनलाल का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक लंबा रहा है, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। मलयालम के अलावा उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं की फिल्मों में भी अपना अभिनय कौशल दिखाया है। वे पहले ही पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके हैं, लेकिन दादासाहेब फाल्के सम्मान उनके योगदान की सबसे बड़ी राष्ट्रीय मान्यता है।
यह समारोह कई मायनों में खास रहा — एक तरफ युवा और प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच मिला, वहीं दूसरी तरफ सिनेमा के दिग्गजों को उनके जीवनपर्यंत योगदान के लिए सम्मानित किया गया। शाहरुख खान के लिए यह पुरस्कार सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस पहचान की मुहर है जिसकी उम्मीद उनके फैंस सालों से कर रहे थे। वहीं मोहनलाल जैसे कलाकार के लिए यह एक और मील का पत्थर है, जिसने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।














