
नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस व्रत और अनुष्ठान में हर दिन माता के अलग-अलग रूप की आराधना की जाती है। आज शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है और इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना का विधान है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इस दिन भक्त विशेष पूजा-पद्धति अपनाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। तीसरे दिन की पूजा में लाल और पीला रंग विशेष महत्व रखता है। भक्तों को इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनकर मां चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए। पूजा में भी माता को लाल वस्त्र, लाल पुष्प और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
मां चंद्रघंटा का पूजन मंत्र
इस दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। नवरात्रि के तीसरे दिन इस मंत्र के जाप से माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन से संकट दूर करती हैं।
मां को अर्पित किए जाने वाले भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन दूध से बने प्रसाद को विशेष महत्व दिया गया है। भक्त मां को खीर, पेड़े, रसगुल्ले, मिसरी या दूध से बनी अन्य मिठाइयां अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा को केसर मिश्रित खीर अत्यधिक प्रिय है। साथ ही पंचमेवा, लौंग-इलायची या शहद का भोग लगाना भी शुभ फल देने वाला होता है।
मां चंद्रघंटा का प्रिय पुष्प
धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि मां चंद्रघंटा को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। कमल पवित्रता और शांति का प्रतीक है। इसीलिए तीसरे दिन पूजा करते समय कमल का पुष्प अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।
तीसरे दिन की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठना – सूर्योदय से पहले उठकर दिन की शुरुआत करें।
स्नान और वस्त्र धारण – स्नान के पश्चात लाल या पीले वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल की शुद्धि – घर के मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें और पुराने फूल हटा दें।
देवी की स्थापना – मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
आवाहन – धूप-दीप जलाकर देवी का आह्वान करें।
श्रृंगार – मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराकर रोली, चंदन, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।
भोग अर्पण – दूध से बनी मिठाई या शहद का भोग लगाएं।
मंत्र जाप – “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का जाप करें।
पाठ और आरती – दुर्गा चालीसा, सप्तशती या कवच का पाठ कर अंत में आरती करें।
प्रसाद वितरण – पूजा के बाद प्रसाद घर-परिवार और भक्तों में बांटें।
मां चंद्रघंटा की आरती
जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम। पूर्ण करो सब मेरे काम॥
चन्द्र समाज तू शीतल दायिनी। चन्द्र किरणों में ज्योति समायिनी॥
मन की स्वामिनी मन भाती हो। भक्तों को वरदान दिलाती हो॥
संकट समय रक्षा करने वाली। सुंदर भाव जगाने वाली॥
श्रद्धा से हर कोई गुनगान करे। बुधवार को विशेष ध्यान करे॥
चन्द्र आकार मूर्ति की पूजा। घी के दीप से करो आराधना॥
शीश नवाकर मन की कहो बात। पूर्ण करो सबकी आस जगत माता॥
कांचीपुर है पावन धाम तेरा। दक्षिण में गूंजे सम्मान तेरा॥
हे भवानी रक्षा करो हमारी। नाम जपूँ बारंबार महारानी॥
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।














