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रूसी वैक्सीन के फर्जी होने का दावा, सिर्फ 38 लोगों को लगा टीका, 144 तरह के साइड इफेक्ट; WHO ने कहा - भरोसा करना मुश्किल

दस्तावेजों के मुताबिक, वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए पूरी क्लीनिकल स्टडी हुई ही नहीं।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 13 Aug 2020 9:50:43

रूसी वैक्सीन के फर्जी होने का दावा, सिर्फ 38 लोगों को लगा टीका, 144 तरह के साइड इफेक्ट; WHO ने कहा - भरोसा करना मुश्किल

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को दावा किया कि उनके यहां दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन तैयार हो गई है। इस वैक्सीन के सफल होने का रूस दावा कर रहा है लेकिनं कोरोना वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों से कई खुलासे हुए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए पूरी क्लीनिकल स्टडी हुई ही नहीं।

डेली मेल की खबर के मुताबिक, ट्रायल के नाम पर 42 दिन में मात्र 38 वॉलंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई। ट्रायल के तीसरे चरण पर भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट्स की जानकारी भी सामने आई है। हालाकि, रूसी सरकार दावा कर रही थी कि वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखे जबकि रजिस्ट्रेशन के दौरान पेश किए दस्तावेज बताते है कि 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखे गए हैं। ट्रायल के 42 वें दिन भी 38 में से 31 वॉलंटियर्स इन साइडइफेक्ट से जूझते दिखे। वॉलंटियर्स को डोज लेने के बाद कई तरह दिक्कतें हुईं। इतना ही नहीं WHO का भी कहना है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता पर भरोसा करना मुश्किल है। WHO ने रूस द्वारा बनाई गई कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई तरह की शंकाएं जताई हैं। संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो इसे खतरनाक मानना ही पड़ेगा। दस्तावेज भी कहते हैं, जो भी ट्रायल हुए हैं वो मात्र 42 दिन के अंदर पूरे हो गए हैं।

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जानिए, रूसी सरकार के दावे और दस्तावेजों से निकली सच्चाई...

पहला दावा : रशिया के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वैक्सीन ट्रायल के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें बेहतर इम्युनिटी विकसित होने के प्रमाण मिले हैं। किसी वॉलंटियर में निगेटिव साइड इफेक्ट नहीं देखने को मिले। हालाकि, दस्तावेजों के मुताबिक, जिन वालंटियर्स को वैक्सीन दी गई, उनमें बुखार, शरीर में दर्द, शरीर का तापमान बढ़ना, जहां इंजेक्शन लगा, वहां खुजली होना और सूजन जैसे साइड इफेक्ट दिखे। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा महसूस न होना, भूख न लगना, सिरदर्द, डायरिया, गले में सूजन, नाक का बहना जैसे साइड इफेक्ट कॉमन थे। जब वैक्सीन की पहली डोज पुतिन की बेटी को दी गई तो शरीर का तापमान पहले एक डिग्री बढ़कर 38 डिग्री हो गया। वैक्सीन की दूसरी डोज दी गई तो तापमान 1 डिग्री गिरकर 37 डिग्री हो गया। लेकिन कुछ समय बाद दोबारा तापमान बढ़ा, जो धीरे-धीरे सामान्य हो गया। लेकिन, राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया कि मेरी बेटी के शरीर में एंटीबॉडीज बढ़ी हैं।

दूसरा दावा :
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा, हम वैक्सीन तैयार करने में दूसरों से कई महीने आगे चल रहे हैं। इसी महीने में बड़े स्तर पर तीन और ट्रायल किए जाएंगे। फिर रजिस्ट्रेशन के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वैक्सीन से जुड़े सभी जरूरी ट्रायल पूरे हो गए हैं। हालाकि, सच्चाई यह है कि रूस ने अब तक वैक्सीन के जितने भी ट्रायल किए हैं, उससे जुड़ा साइंटिफिक डाटा पेश नहीं किया। तीसरे चरण का ट्रायल किया है या नहीं, इस पर भी संशय है।

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तीसरा दावा : रक्षा मंत्रालय ने कई बार बयान दिया है कि वैक्सीन सुरक्षित है। हालाकि, सच्चाई यह है कि रूस ने जो भी वैक्सीन के ट्रायल किए है उसकी जानकारी WHO को नहीं दी है। बता दे, दुनियाभर में जो भी वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं, शोधकर्ता इससे जुड़ा डेटा और अहम जानकारियां साझा कर रहे हैं।

WHO को भी हर जानकारी दी जा रही है। लेकिन, रूसी वैक्सीन में मामले में ऐसा नहीं है। ट्रायल से जुड़ी जानकारी सिर्फ बयानों में ही सामने आई है। इसे साइंटिफिक जर्नल या WHO से साझा नहीं किया गया। इस पर WHO का कहना है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता और सुरक्षा पर भरोसा करना मुश्किल है।

वैक्सीन उत्पादन के लिए कई गाइडलाइंस बनाई गई हैं, जो टीमें भी ये काम कर रहीं हैं, उन्हें इसका पालन करना ही होगा। WHO ने अपनी वेबसाइट पर क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहीं 25 वैक्सीन की लिस्ट दी है, जबकि 139 वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं।

चौथा दावा : रूसी सरकार और वैक्सीन तैयार करने वाले अलग-अलग बयान दे रहे। सरकार कह रही ट्रायल में अब तक कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा। वैक्सीन तैयार करने वाले गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर ने कहा कि बुखार आ सकता है, लेकिन इसे पैरासिटामॉल की टेबलेट देकर ठीक किया जा सकता है। हालाकि, दस्तावेज तो कुछ और ही कहते है। दस्तावेज कहते हैं कि साइड इफेक्ट केवल बुखार तक ही सीमित नहीं है।

Fontanka न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रूस की कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट के तौर पर दर्द, स्वेलिंग, हाई फीवर की तकलीफ देखने को मिली है। वहीं, कमजोरी महसूस करना, एनर्जी की कमी, भूख नहीं लगना, सिर दर्द, डायरिया, नाक बंद होना, गला खराब होना और नाक बहने जैसी शिकायतें भी रिपोर्ट की गई हैं।

गामालेया रिसर्च सेंटर का कहना है कि इतने कम लोगों पर हुई रिसर्च के आधार पर यह पुख्ता तौर पर कहना मुश्किल है कि कौन सा साइड इफेक्ट स्पष्ट दिखाई देगा। दस्तावेजों के मुताबिक, 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखे गए। ट्रायल के 42 वें दिन भी 38 में से 31 वॉलंटियर्स इन साइड इफेक्ट से जूझ रहे हैं। इसमें 27 तरह के साइड इफेक्ट ऐसे भी हैं, जिनकी वजह वैक्सीन बनाने वाले इंस्टीट्यूट को भी समझ नहीं आ रही है।

पांचवा दावा : पुतिन ने कहा, वैक्सीन का डोज लेने के बाद बेटी में काफी मात्रा में एंटीबॉडीज बनीं। हालाकि, दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है कि डोज देने के बाद वॉलंटियर्स में एंटीबॉडीज औसत स्तर से भी कम बनीं।

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दुनियाभर के विशेषज्ञ उठा रहे सवाल

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसुआ बैलक्स कहते है, रशिया का ऐसा करना शर्मनाक है। यह बेहद घटिया फैसला है। ट्रायल की गाइडलाइन को नजरअंदाज करके वैक्सीन को बड़े स्तर पर लोगों को देना गलत है। इंसान की सेहत पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान के मुताबिक, रशियन वैक्सीन की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इसे लोगों को देना खतरनाक साबित हो सकता है। वैक्सीन सबसे पहले बने, इससे ज्यादा जरूरी है यह सुरक्षित हो।

अमेरिका के प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथनी फाउची रूस के वैक्सीन बना लेने के ऐलान पर कहा कि उन्हें शक है कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस पर काम करेगी। फाउची ने कहा, 'वैक्सीन बनाना और उस वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी साबित करना दोनों अलग-अलग चीजें हैं।' फाउची ने कहा कि उन्हें कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे पुतिन के कारगर वैक्सीन बना लेने के ऐलान पर भरोसा किया जा सके। फाउची ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि रूस के लोगों ने निश्चित रूप से ये साबित किया होगा कि वैक्सीन सुरक्षित और असरदार है। हालांकि मुझे संदेह है कि उन्होंने ऐसा किया होगा।' उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को यह समझना चाहिए कि वैक्सीन की मंजूरी प्राप्त करने के लिए उसका सुरक्षित और प्रभावी साबित होना जरूरी है। फाउची ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि COVID-19 की एक सुरक्षित वैक्सीन इस साल के अंत तक आ जाएगी। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन की गारंटी कभी नहीं दी जा सकती है।'

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