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किसान आंदोलन में फूट, इन पांच कारणों के चलते अलग हुए दो किसान संगठन

दिल्ली में हुई हिंसा के अलावा भी कुछ अन्य वजहें भी हैं, जिसकी वजह से दोनों गुटों ने किसान आंदोलन से अलग हुए हैं। आइये हम बता हैं दोनों संगठनों के किसान आंदोलन से अलग होने की वजहें।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 28 Jan 2021 10:22:54

किसान आंदोलन में फूट, इन पांच कारणों के चलते अलग हुए दो किसान संगठन

26 जनवरी को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुए किसानों के हिंसक प्रदर्शन का अगला दिन कार्रवाईयों का रहा। बुधवार सुबह से ही दिल्ली पुलिस सक्रिय हो गई। शाम होते-होते 37 किसान नेताओं पर FIR दर्ज कर ली गई। इसके साथ ही 200 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। वहीं, पुलिस की कार्रवाई के महज 3 घंटे बाद शाम 4 बजे के करीब किसान संगठनों की फूट भी सामने आ गई। आंदोलन से जुड़े 2 संगठनों खुद को अलग कर लिया। राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने खुद को आंदोलन से अलग करने की घोषणा कर दी। भारतीय मजदूर किसान संगठन के प्रमुख वीएम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 'दिल्ली में जो हंगामा और हिंसा हुई, उसकी जिम्मेदारी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को लेनी चाहिए। हम ऐसे किसी शख्स के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो।' इसके महज 15 मिनट बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने भी प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया। इसके अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा, ‘मंगलवार को दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उससे मैं बहुत दुखी हूं और 58 दिनों का हमारा प्रोटेस्ट खत्म कर रहा हूं। भानु प्रताप सिंह का संगठन चिल्ला बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहा था।’ इतना ही नहीं भानु गुट ने तो चिल्ला बॉर्डर से अपने टेंट भी उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली में हुई हिंसा के अलावा भी कुछ अन्य वजहें भी हैं, जिसकी वजह से दोनों गुटों ने किसान आंदोलन से अलग हुए हैं। आइये हम बता हैं दोनों संगठनों के किसान आंदोलन से अलग होने की वजहें।

पहली वजह

मंगलवार को ट्रैक्टर परेड निकालने के दौरान राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के बाद जनमानस में भी किसान संगठनों की छवि खराब हुई है। दिल्ली दंगों के बाद 2 करोड़ दिल्ली वालों ने ऐसा नजारा देखा, जब कुछ उपद्रवी किसान सड़कों पर गुंडों की तरह तलवारें और लाठी डंडे लहराते नजर आए। दोनों किसान संगठनों राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने यह महसूस किया कि यह आंदोलन जनमानस के मन में नकारात्मक छवि बना रहा है तो उन्होंने इससे पीछा छुड़ाना बेहतर समझा।

दूसरी वजह

दिल्ली के लाल किला पर तिरंगे के समानांतर अन्य झंडा फहराने से आम लोग ही नहीं, बल्कि हरियाणा की दहिया खाप के साथ किसान संगठन भी नाराज नजर आए और आखिर में 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने किसान आंदोलन से मोहभंग होने का एलान कर दिया।

तीसरी वजह

बुधवार को मीडिया से रूबरू किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने राकेश टिकैत को घेरते हुए कहा कि हम लोगों को पिटवाने के लिए यहां नहीं आए हैं। देश को हम बदनाम नहीं करना चाहते हैं। उनका इशारा मंगलवार को किसानों की कई जगहों पर हुई पिटाई से था। वीएम सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक भी मीटिंग में गन्ना किसानों की मांग नहीं उठाई। बता दें कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के पैसे का मुद्दा अहम है। इसको लेकर कई बार मांग भी की जा चुकी है।

चौथी वजह

किसान नेता वीएम सिंह ने बुधवार को कहा कि हम किसी ऐसे व्यक्ति (राकेश टिकैत) के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो। इसलिए, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन वीएम सिंह और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति इस विरोध को तुरंत वापस ले रही है।

पांचवी वजह

लाल किला पर एक संगठन का झंडा फहराने से भी वीएम सिंह नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है। उस मर्यादा को अगर भंग किया है, भंग करने वाले गलत हैं और जिन्होंने भंग करने दिया, वह भी गलत हैं। आईटीओ में एक साथी शहीद भी हो गया। जो लेकर गया या जिसने उकसाया उसके खिलाफ पूरी कार्रवाई होनी चाहिए।

आपको बता दे, दिल्ली पुलिस ने हिंसा, तोड़फोड़ और नियम तोड़ने की घटनाओं में 22 FIR दर्ज की हैं। इनमें जानलेवा हमले, डकैती, सरकारी काम में रुकावट डालने और नियम तोड़ने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। इनमें से एक FIR में 37 किसान नेताओं को आरोपी बनाया गया है। इनमें राकेश टिकैत, मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव, दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह भी शामिल हैं। किसान नेताओं के खिलाफ ट्रैक्टर रैली की शर्तें तोड़ने का केस दर्ज किया गया है। इन्हीं लोगों ने उस NOC पर साइन किए थे, जो पुलिस ने ट्रैक्टर रैली के लिए जारी की थी। रैली से पहले टिकैत का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें टिकैत लोगों से कह रहे थे कि लाठी साथ रखना झंडा लगाने के लिए, समझ जाना सारी बात।

पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा में 300 जवान घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आंसू गैस के गोले दागने वाली गन छीन ली। यह गन लाल किले में एक प्रदर्शनकारी के पास देखी गई।

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