
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक सैन्य अभियान के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद यह लैटिन अमेरिकी देश एक बार फिर दुनिया भर की सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता के बीच अब लोगों की नजर वेनेजुएला की डगमगाती अर्थव्यवस्था और उसकी कमजोर मुद्रा पर टिक गई है। अक्सर यह सवाल उठता है कि दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाला देश होने के बावजूद वेनेजुएला की करेंसी आखिर इतनी कमजोर क्यों है। इसी संदर्भ में भारत और वेनेजुएला की मुद्रा की तुलना भी चर्चा का विषय बन गई है।
भारत–वेनेजुएला संबंध और ऊर्जा साझेदारी
भारत और वेनेजुएला के बीच दशकों से मैत्रीपूर्ण राजनयिक और आर्थिक रिश्ते रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते आए हैं और ऊर्जा क्षेत्र में वेनेजुएला भारत का अहम सहयोगी रहा है। वर्ष 2024 में भारत ने वेनेजुएला से करीब 22 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया था, जो यह दर्शाता है कि वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में जब वेनेजुएला राजनीतिक या आर्थिक संकट में घिरता है, तो उसके प्रभाव सिर्फ वहां तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वैश्विक बाजारों और भारत जैसे देशों पर भी पड़ते हैं।
क्यों लड़खड़ाई वेनेजुएला की मुद्रा
वेनेजुएला की राष्ट्रीय मुद्रा को बोलिवर कहा जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में VES के नाम से जाना जाता है। बीते दस वर्षों में यह दुनिया की सबसे तेज़ी से गिरने वाली मुद्राओं में शुमार रही है। बेकाबू महंगाई, कमजोर आर्थिक नीतियां और लगातार बनी राजनीतिक अस्थिरता ने बोलिवर की ताकत को लगभग खत्म कर दिया।
साल 2017 में देश ने आधिकारिक तौर पर डिफॉल्ट की स्थिति स्वीकार की, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट गया। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने हालात को और भी गंभीर बना दिया। तेल उत्पादन में गिरावट, सरकारी तेल कंपनी की बदहाल स्थिति और सीमित विदेशी निवेश ने अर्थव्यवस्था को उबरने का मौका नहीं दिया।
आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर
बोलिवर की गिरती कीमत का सबसे गहरा असर वेनेजुएला के आम नागरिकों पर पड़ा है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखनी पड़ती है। कई बार तो हालात ऐसे होते हैं कि दुकानों में एक ही दिन में कीमतें कई बार बदल जाती हैं। इसी वजह से स्थानीय लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं।
वेनेजुएला में भारतीय 10,000 रुपये की वैल्यू
अगर मुद्रा विनिमय दर की बात करें तो विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 भारतीय रुपया लगभग 3.38 वेनेजुएला बोलिवर के बराबर है। इस गणना से भारत के 10,000 रुपये वेनेजुएला में करीब 33,800 से 33,900 बोलिवर के आसपास हो जाते हैं। हालांकि यह दर स्थायी नहीं रहती। वेनेजुएला में करेंसी रेट्स अक्सर राजनीतिक हालात, बाजार की मांग और आर्थिक घटनाओं के अनुसार तेजी से बदलते रहते हैं। फिर भी यह तुलना साफ तौर पर दिखाती है कि भारतीय रुपये के मुकाबले वेनेजुएला की मुद्रा काफी कमजोर स्थिति में है।
तेल की भरमार के बावजूद आर्थिक बदहाली क्यों
अक्सर यह सवाल उठता है कि जब वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, तो वह आर्थिक रूप से इतना कमजोर कैसे हो गया। इसकी बड़ी वजह वहां का भारी और गाढ़ा कच्चा तेल है, जिसे निकालना और रिफाइन करना बेहद महंगा पड़ता है। इसके अलावा पुरानी तकनीक, निवेश की भारी कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने तेल से होने वाली कमाई को सीमित कर दिया है। नतीजा यह है कि तेल की अपार संपदा के बावजूद वेनेजुएला आज गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है।














