
वॉशिंगटन/दावोस: वैश्विक राजनीति में हलचल तेज करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक से वापसी के दौरान, एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य शक्ति ईरान की सीमाओं की ओर कूच कर रही है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि एक विशाल नौसैनिक बेड़ा (Carrier Strike Group) पहले ही रवाना किया जा चुका है।
शक्ति प्रदर्शन या युद्ध की आहट?
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की हालिया गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'कड़ी निगरानी' के दायरे में रखा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली जहाज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलक्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा: "हमारा एक विशाल सैन्य बेड़ा उस दिशा (ईरान) में अग्रसर है। हम स्थिति का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं और आने वाले समय में जो भी घटनाक्रम होगा, उस पर हमारी पैनी नजर है।"
हालांकि, ट्रंप ने कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश भी की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन की पहली प्राथमिकता पूर्ण सैन्य संघर्ष (Total War) नहीं है। उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग को एक 'अंतिम विकल्प' करार दिया, लेकिन उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की आशंकाओं को नए सिरे से हवा दे दी है।
सैन्य तैनाती और ट्रंप की कूटनीति
स्विस शहर दावोस से लौटते वक्त ट्रंप के बयानों में दृढ़ता और चेतावनी का मिश्रण साफ दिखा। उन्होंने दोहराया कि ईरान की ओर भेजी गई 'बड़ी फोर्स' केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह किसी भी अप्रत्याशित चुनौती का जवाब देने के लिए तैनात की गई है। ट्रंप ने कहा, "मैं नहीं चाहता कि स्थिति बिगड़े या हमें बल प्रयोग करना पड़े, लेकिन हम अपनी सुरक्षा और हितों के प्रति पूरी तरह सतर्क हैं।"
मानवाधिकार और तेहरान पर दबाव
ईरान के भीतर चल रहे घरेलू विद्रोह और प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार के रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़ा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी पिछली सैन्य धमकियों के कारण ही ईरानी शासन ने 837 प्रदर्शनकारियों की मौत की सजा को रोकने पर विवश होना पड़ा था।
ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका ईरान के साथ संवाद की मेज पर बैठने को तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान को अपनी आक्रामक नीतियों और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर अंकुश लगाना होगा।
ईरान में हिंसा का भयावह आंकड़ा
इस बीच, ईरान के भीतर से आने वाली खबरें विचलित करने वाली हैं। लंबे समय की चुप्पी के बाद ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को पहली बार विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों का आधिकारिक आंकड़ा साझा किया। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 3,117 लोगों की जान जा चुकी है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और स्वतंत्र विश्लेषक इस सरकारी आंकड़े को खारिज कर रहे हैं। उनका मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक भयावह हो सकती है और शासन द्वारा हताहतों की सही जानकारी छिपाई जा रही है।













