
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए बुधवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। कभी देश की सबसे ताकतवर महिला मानी जाने वाली हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने अदालत की अवमानना के एक मामले में छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। ये फैसला अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया। यह खबर उन लाखों समर्थकों के लिए भी झटके से कम नहीं है जो उन्हें अब भी एक मजबूत नेता के तौर पर देखते हैं।
इसी मामले में गैबांधा के गोविंदगंज निवासी शकील अकंद बुलबुल को दो महीने की जेल की सजा दी गई है। खास बात यह है कि ये वही अपदस्थ अवामी लीग नेता हैं जिन्होंने करीब 11 महीने पहले पद छोड़ा और देश छोड़कर भाग गए थे। यह पहला मौका है जब हसीना को बांग्लादेश छोड़ने के बाद किसी आपराधिक मामले में सजा सुनाई गई है।
गौरतलब है कि जून 2025 में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के अभियोजकों ने पिछले साल के भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के गंभीर आरोप लगाए थे। लोगों की भावनाएं तब और आहत हो गईं जब ICT के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने दावा किया कि हसीना ने अपनी ही जनता पर हमला किया और विरोध प्रदर्शनों को बर्बरता से कुचला।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकार कार्यालय की रिपोर्ट भी बेहद चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच करीब 1,400 लोगों की जान चली गई, क्योंकि उस दौरान विरोध प्रदर्शनों और सरकार के पतन के बाद भी हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
हालांकि, शेख हसीना ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उनके वकील आमिर हुसैन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे अदालत में सभी आरोपों के खिलाफ साक्ष्यों के साथ तर्क पेश करेंगे ताकि हसीना को न्याय मिल सके। एक महिला, जो कभी बांग्लादेश की सबसे ताकतवर चेहरा थी, अब एक शांत कोने में दिल्ली के सुरक्षित घर में रह रही हैं—ये तस्वीर समय की विडंबना को दर्शाती है।
बता दें, अगस्त 2024 में देश में भारी विरोध प्रदर्शन के बाद हसीना को न सिर्फ सत्ता से हाथ धोना पड़ा, बल्कि अपनी मातृभूमि भी छोड़नी पड़ी। वर्तमान में वह भारत की राजधानी दिल्ली में शरण लिए हुए हैं और आने वाले दिनों में उनके भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।














